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IOC ने शुरू की दुनिया के सबसे साफ बीएस6 पेट्रोल-डीजल की सप्लाई, ऐसा करने वाली बनीं भारत की पहली कंपनी

  • एक हफ्ते के भीतर पूरा देश इस सबसे स्वच्छ ईंधन पर स्विच कर जाएगा।

Moneybhaskar.com

Mar 22,2020 03:50:04 PM IST

नई दिल्ली. भारत की सबसे बड़ी ऑयल फर्म इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (OIL) ने बीएस6 उत्सर्जन मानक वाले फ्यूल की सप्लाई शूरू कर दी है। बीएस6 पेट्रोल-डीजल दुनिया का सबसे स्वच्छ ईंधन है। आईओसी बीएस6 फ्यूल सप्लाई करने वाली पहली कंपनी बन गई है। बीएस 6 फ्यूल को पूरा देश 1 अप्रैल से अपनाएगा। आईओसी ने दो हफ्ते पहले ही 28000 पेट्रोल पंपों पर इस फ्यूल की सप्लाई शुरू कर दी है। बीएस 6 मानक वाले पेट्रोल डीजल में बहुत कम मात्रा में सल्फर होता है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए कम खतरनाक होता है।

एक हफ्ते के भीतर पूरा देश इस सबसे स्वच्छ ईंधन पर स्विच कर जाएगा

इंडियन ऑइल के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि हमने देशभर में बीएस-6 ग्रेड के ईंधन की सप्लाई शुरू कर दी है। हमारे 28 हजार पेट्रोल पंप एक हफ्ते से ज्यादा समय से इसे डिस्पेंस कर रहे हैं। भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम(HPCL) भी बीएस 6 फ्यूल सप्लाई कर रही हैं और एक हफ्ते के भीतर पूरा देश इस सबसे स्वच्छ ईंधन पर स्विच कर जाएगा। आईओसी के सप्लाई शुरू के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां कम सल्फर वाले स्व्चछ फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता है। भारत महज 3 सालों में बीएस-4 से बीएस-6 में शिफ्ट रहा है। खास बात यह है कि स्वच्छ फ्यूल बीएस-6 में स्चिंग ऐसे समय में हो रही है जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी की चपेट में है।


सल्फर के उत्सर्जन में कमी लाना


हर एक उत्सर्जन मानक में पेट्रोल और डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के साथ सल्फर की मात्रा को कम करना होता है। बीएस3 स्टैंडर्ड के तहत पेट्रोल गाड़ियां 150 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम सल्फर उत्सर्जित कर सकती थी। जो बीएस6 में घटकर 10 मिलीग्राम प्रति किग्रा हो गया है। इसी तरह डीजल गाड़ियां बीएस3 स्टैंडर्ड नॉर्म्स के तहत 350 मिलीग्राम प्रति किग्रा सल्फर उत्सर्जित कर सकती थी, जिसकी मात्रा घटकर 10 मिलीग्राम प्रति किग्रा हो गई है।

सल्फर उत्सर्जन (अधिकतम) बीएस3 (mg/kg) बीएस4 (mg/kg) बीएस6 (mg/kg)
पेट्रोल 150 50 10
डीजल 350 50 10

भारत स्टेज नॉर्म्स कब लागू हुआ


भारत में साल 2000 के बाद से बीएस नार्म्स एक साथ कभी लागू नहीं हुए। इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। पहले मेट्रो और कुछ चुनिंदा शहरों में इन्हें लागू किया गया। इसके बाद टायर2 और टायर3 शहरों में लागू किए जाते रहे हैं। हालांकि साल अब साल 2020 में फिर से पूरे देश में एक साथ बीएस6 इमीशन एक साथ देशभर में लागू किया जा रहा है।

बीएस1 को साल 2000 में देशभर में एक साथ लागू किया गया।

  • बीएस2 को चरणबद्ध तरीके से सबसे पहले दिल्ली एनसीआर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में लागू किया गया। इसके बाद अप्रलै 2003 में बीएस2 को 13 अन्य शहरों में लागू किया गया।
  • बीएस3 को अप्रैल 2005 में दिल्ली एनसीआर समेत 13 शहरों में लागू किया गया। इसके बाद अप्रैल 2010 में इसे देशभर में लागू कर दिया गया।
  • बीएस 4 को अप्रैल 2010 में दिल्ली एनसीआर समेत देश के चुनिंदा 13 शहरों में लागू किया गया। इसके बाद अप्रैल 2017 में इसे देशभर में लागू किया गया है।
  • बीएस 5 को छोड़कर सीधे बीएस 6 लागू किया गया।
  • बीएस 6 को अप्रैल 2020 में देशभर में लागू किया जा रहा है।

बीएस4 और बीएस 6 में क्या अंतर


बीएस4 इमीशन नार्म्स के तहत वाहन के इंजन को इस हिसाब से डिजाइन किया जाता है कि उससे निकलने वाले धुएं से सल्फर की मात्रा भारत सरकार के तय पैमाने के आधार पर निकले। इसके लिए कम सल्फर वाले ईंधन (डीजल) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए सरकार की तरफ से ईंधन का ग्रेड तय किया जाता है। ग्रेड आधारित ईंधन बीएस6 ईंधन देशभर में एक अप्रैल 2020 से मिलना शुरू होगा। बीएस-6 नियम आने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे पहले 1 अप्रैल 2017 से ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने पूरे देश में बीएस-IV ग्रेड के पेट्रोल और डीजल की बिक्री शुरू किया था। वर्तमान में जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान के कुछ हिस्सों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में बीएस-4 ईंधनों की आपूर्ति की जा रही है, जबकि देश के बाकी हिस्से में बीएस-3 ईंधन की आपूर्ति की जा रही हैं.

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