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  • India has adequate resources to treat the corona virus the ability to build a 2000 bed ICU hospital in every city of the country in two weeks

कोरोना वायरस /भारत के पास इलाज के पर्याप्त साधन, मात्र दो हफ्तों में देश के हर शहर में 2000 बेड वाला आईसीयू बनाने की क्षमता, लेकिन मामला कानूनी दांव पेंच में उलझा

  • भारत एमसीआई रेग्यूलेशन में बदलाव करके 1.5 लाख डॉक्टर और स्पेशलिस्ट की फौज तत्काल प्रभाव से खड़ी कर सकता है। 

Moneybhaskar.com

Mar 27,2020 01:03:09 PM IST

नई दिल्ली. पीएम मोदी ने कानूनी दांप-पेंच में उलझे भारतीय सिस्टम को लचीला बनाने पर हमेशा जोर दिया। लेकिन भारत का मेडिकल सिस्टम अभी भी कानूनी की जंजीरों में जकड़ा है। नारायण हेल्थ की चेयरमैन और फाउंडर देवी शेट्टी की मानें, तो दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत के पास कोरोना से जंग जीतने के साधन मौजूद हैं, साथ ही पर्याप्त मात्रा में डॉक्टर और नर्स भी हैं, जो कानूनी दांव-पेंच के चलते कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं।

कोरोना वायरस का सही इलाज न मिलने से लोगों की हो रही मौत

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल एजूकेशन को कंट्रोल करने वाली बॉडी "मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया" ने कहा कि रेग्यूलेटरी नियमों में बदलाव करके लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती है। शेट्टी ने कहा कि अगर भारत में कोविड-19 दूसरे चरण में पहुंचा, तो इलाज के लिए आईसीयू में बड़ी तादाद में बेड की जरूरत होगी। उनके मुताबिक वायरस ही लोगों को नहीं मारता है, बल्कि आईसीयू में बेड न होने, डॉक्टर और नर्स की कमी के चलते भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है। कोरोना वायरस से मरीजों को बचाने में आईसीयू बेड की खास अहमियत होती है। जिस देश के पास ज्यादा संख्या में आईसीयू बेड, डॉक्टर और नर्स हैं, वहां कोरोना वायरस के संक्रमण के बावजूद होने वाली मौत का आंकड़ा कम रहता है।


किस देश में कितने बेड

देश मरने की दर प्रति एक लाख नागरिक पर ICU में बेड
जर्मनी 0.3 फीसदी 29 बेड
इटली 9.26 फीसदी 13 बेड
भारत 2.3 बेड

शेट्टी के मुताबिक भारत ही एक ऐसा देश हैं, जो सही रणनीति और उसके क्रियान्वयन से जर्मनी जैसे देश की तरह रिजल्ट हासिल कर सकता है। हमारी सरकार हर एक शहर में 200 बेड वाले आईसीयू को दो हफ्ते से कम समय में बनाने की क्षमता रखती है और लोकल स्तर पर वेंटिलेटर का प्रोडक्शन बढ़ा सकती है। साथ ही जरूरत पड़ने पर चीन से वेंटिंलेटर का आयात कर सकती है। भारत के पास बड़े सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज के साथ अच्छे स्पेस वाले बेड हैं। इन बेड्स में पाइप ऑक्सीजन और सेक्शन लगाकर इन्हें दो हफ्तों से कम समय में कोरोनावायरस के इलाज के लिए तैयार किया जा सकता है। हालांकि डॉक्टर, नर्स और फॉमास्यूटिकल की कमी जरूर एक मुददा बन सकता है?

भारत में डॉक्टर और नर्स की कमी

दुनिया में भारत अकेला ऐसा देश हैं, जहां एमसीआई रेग्यूलेशन में बदलाव करके 1.5 लाख डाक्टर और स्पेसलिस्ट को तत्काल प्रभाव से पैदा किया जा सकता है। यह भारत के लिए लड़ाई की दिशा में बड़ा कदम कारगर साबित होगा। ब्रिटेन जैसे देशों में अगर डॉक्टर और नर्स की कमी होती है, तो ब्रिटिश मेडिकल यूनिवर्सिटी फाइनल ईयर के एमबीबीएसस स्टूडेंट्स की परीक्षा रद करके यूके की जनरल मेडिकल काउंसिल की ओर से पिछले मार्क्स के आधार पर छात्रों को डिग्री दे दी जाती है। इसी तरह इटली में डॉक्टर की कमी को पूरा करने के लिए स्थानीय सरकार मेडिकल यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स के 10 माह के पीरियड को कम करके उन्हें डिग्री देकर डॉक्टर बना देती है। लेकिन भारत को इस तरह के फैसले लेने की जरूरत नहीं होती है। क्योंकि यहां पहले से भारी तादात में डॉक्टर और नर्स मौजूद हैं, बस उन्हें कानूनी रुप से इजाजत देने भर की देर है।

  • भारत में करीब 40 हजार स्पेशलिस्ट एनेस्थेसियोलॉजिस्ट, इंटेंसिविस्ट और इमर्जेंसी मेडिसिन स्पेशलिस्ट हैं, जिन्हें कालेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन की ओर से ट्रेनिंग मिली है। कई साल पहले एमसीआई ने 100 साल पुराने इस संस्थान की डिग्री को बैन कर दिया था।
  • एमसीआई को चाहिए कि वो सोसाइटी फॉर इमर्जेंसी मेडिसिन इंडिया और इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन से ऑफर की जाने वाली फेलोशिप से बैन को हटा देना चाहिए। साथ ही इग्नू से कम्यूनिटी कार्डियोलॉजी से प्राप्त डिप्लोमा को वैध करार दिया जाना चाहिए।
  • रूस और चीन से हजारों की संख्या में डॉक्टरों ने ट्रेनिंग हासिल की है, जिन्हें एमसीआई के इलिजिब्लिटी टेस्ट का इंतजार है। यह डॉक्टर दुनिया के ज्यादातर देशों में ट्रेनिंग करने के लिए मान्य हैं। एमसीआई को भी इन्हें अस्थाई लाइसेंस देकर सीनियर डॉक्टर के अंडर कारम करने की इजाजात दी जानी चाहिए।
  • बाकी दुनिया की तरह ही भारत को भी टेली मेडिसिन, ऑनलाइन कंसल्टेशन, प्रिसक्रिप्शन में छूट देनी चाहिए।
  • कोरोना वायरस के खिलाफ बैटल ग्राउंड घर और सड़क से अब अस्पताल और आईसीयू तक पहुंच चुका है। यह लड़ाई युवा डॉक्टर और नर्स से जरिए जीती जा सकती है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस 60 या उससे ज्यादा की उम्र के डाक्टर को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में युवा डॉक्टर और नर्स को आगे करना होगा
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