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रिपोर्ट /कोरोनावायरस इफेक्ट : 21 दिनों के लॉकडाउन से एयरलाइंस कंपनियों की टूटी कमर, एयर इंडिया को प्रतिदिन 30 से 35 करोड़ रुपए का नुकसान, देखें अन्य कंपनियों के नुकसान की लिस्ट

  • स्पाइसजेट को लॉकडाउन के चलते करीब 1412 करोड़ रुपए नुकसान होने की उम्मीद 

Moneybhaskar.com

Mar 26,2020 04:58:43 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस से बचाव के तौर पर केंद्र सरकार ने देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन किया है। सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन इंडिया (CAPA) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के एविएशन सेक्टर को 11 बिलियन डॉलर (करीब 75 से 80 हजार करोड़ रुपए) के नुकसान का अनुमान है। वैश्विक स्तर पर एविशन सेक्टर को 281 बिलियन अमेरिकी डॉलर (21 लाख करोड़ रुपए) के नुकसान का अनुमान जाहिर किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन एयरलाइंस को अप्रैल-जून की तिमाही में सबसे ज्यादा कमाई होती है। लेकिन लॉकडाउन के चलते इन साल की तिमाही में एयरलाइंस को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। जिसका असर अगले एक साल तक दिखेगा। CAPA की रिपोर्ट की मानें, तो 21 दिनों के बाद हुए नुकसान के बाद एयरलाइंस इस हालात में नहीं होंगी कि वो 30 जून 2020 तक अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दोबारा शुरू कर सकें। एयरलाइंस कंपनियां नुकसान की वजह से वित्त वर्ष 2021 के प्लान में बदलाव करके फ्लीट के विस्तार, टिकट की कीमत समेत अपने पूरे बिजनेस मॉड्यूल को बदल सकती हैं।

यह सेक्टर होंगे सबसे ज्यादा प्रभाव

  • एयरपोर्ट ऑपरेटर्स
  • ड्यूटी फ्री, रिटेल, फूड एंड ब्रेवरेज और एयरपोर्ट की अन्य छूट
  • ग्राउंड हैंडलिंग
  • MROs
  • फ्लाइट की कैटरिंग कंपनी
  • हवाई यात्रा

सरकार से मदद की मांग

संकट से जूझ रही एविएशन इंडस्ट्री ने सरकार से तत्काल सहायता की मांग की है। CAPA ने तीन चरणों में सरकार से एविेएशन सेक्टर को आर्थिक मदद देने को कहा है।


पहला चरण - सरकार की तरफ से पहले चरण में तत्काल प्रभाव से आर्थिक मदद की जानी चाहिए। जिससे एयरलाइंस अपने कर्मचारियों को 3 से 6 माह की सैलरी दे सकें।

दूसरा चरण - एयरपोर्ट चार्ज, एविएशन टर्बाइन फ्यूल, जीएसटी और अन्य टैक्स में छूट की मांग की गई है। साथ ही अगले 3 से 6 माह तक ब्याज और प्रिंसिपल पेमेंट को आगे बढ़ाने की अपील की गई है.

तीसरा चरण - तीसरे चरण में रिकवरी के तरीके में बदलाव की मांग की गई है। इसमें एविएशन टर्बाइन फ्यूल को जीएसटी फ्रेमवर्क के तहत लाने को कहा गया है। जिससे फुल इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही एटीएफ पर सेल टैक्स घटाकर 4 फीसदी करने की मांग की है। एयरलाइंस को बैंक की तरफ से क्रेडिट उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

इंडस्ट्री सपोर्ट - एयरपोर्ट को रेवेन्यू में हिस्सेदारी के तौर पर मिलने वाली रकम में 3 से 6 माह की छूट दी जानी चाहिए।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व जनरल मैनेजर जीएस बावा ने कहा कि आईएटीए (इंटरनेशनल एयर ट्रैफिक एसोसिएशन) का एक डेटा कहता है कि कोविद -19 के प्रकोप के कारण ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री को करीब 25 बिलियन डॉलर (1.8 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में एविएशन इंडस्ट्री को नुकसान की भरपाई के लिए
आर्थिक पैकेज की जरूरत होगी।

मुंबई एयरपोर्ट
मुंबई एयरपोर्ट
मुंबई एयरपोर्ट
दिल्ली एयरपोर्ट


क्या होगा असर और कब तक होगा सुधार

CAPA की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कोविंड 19 की वजह से शुरुआती तौर पर 21 दिनों का लॉकडाउन किया है। लेकिन इस लॉकडाउन के ज्यादा दिनों तक बढ़ने का अंदेशा जाहिर किया जा रहा है। अगर लॉकडाउन तीन माह तक जारी रहता है, तो दो लिस्टेड एयरलाइंस इंडिगो और स्पाइसजेट का वित्त वर्ष 2020 की चौथी और वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में साझा नुकसान करीब 1.25 से लेकर 1.50 बिलियन डॉलर होगा। ऐसे में इंडिगो का अन्य छोटी एयरलाइंस कैरियर का कैश रिजर्व खत्म हो सकता है और उन्हें अपने ऑपरेशन हमेशा के लिए बंद करने पड़ सकते हैं।

  • एयरलाइंस की ओर से एयरक्राफ्ट के आर्डर बढ़ाए जा सकते हैं या फिर कैंसिल किए जा सकते हैं। साथ ही लीज में बदलाव किया जा सकता है। इसकी वजह से एयरलाइंस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
  • टाटा संस अपनी रणनीति में बदलाव करके अपनी दो एरलाइंस (एयरएशिया और विस्तारा) को मिलाकर एक साथ ऑपरेट कर सकता है।
  • एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन का प्लान वित्त वर्ष 2021 के लिए स्थगित किया जा सकता है। ऐसे में सरकार को एयरइंडिया के लिए दूसरा प्लान लाना होगा। साथ ही आगे एयर इंडिया को आगे के ऑपरेशन जारी रखने के लिए 1.5 बिलियन डॉलर की मदद की जरूरत होगी।
  • लॉकडाउन कब तक जारी रहेगा यह तय नहीं है। ऐसे में लॉकडाउन के बाद भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्री संख्या में 30 से 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की जाएगी।

21 दिनों के लॉकडाउन में होने वाला नुकसान

21 दिनों के लॉकडाउन को ध्यान में रखकर एयरलाइंस कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी काट सकती हैं। हालांकि कर्मचारियों की सैलरी में कटौती किस आधार पर की जाएगी। फिलहाल इसे लेकर कोई ऐलान नहीं किया गया है। एयरलाइंस कंपनियां सरकार की तरफ से एविएशन इंडस्ट्री के लिए आर्थिक पैकेज के ऐलान का इंतजार कर रही हैं। इसके बाद ही एयरलाइंस कंपनियां सैलरी में कटौती का ऐलान करेंगी। मौजूदा वक्त में देश में 5 प्राइवेट सेक्टर की एयरलाइंस स्पाइजेट, इंडिगो, गो एयर, एयर एशिया और विस्तारा जैसी कंपनियां हैं। गो एयर के प्रवक्ता ने बतायया कि कर्मचारियों की सैलरी का काटने का निर्णय सरकार के फैसले के बाद लिया जाएगा। कोरोना वायरस के पहले से ही भारतीय एयरलाइंस सेक्टर में उथल-पुथल थी। अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज ने अपना ऑपरेशन रोक दिया था, जो भारत का सबसे बड़ा एयरलाइंस था। एविएशन एक्सपर्ट मार्क मार्टिन के मुताबित अगर औसतन 180 सीट वाली एक फ्लाइट की टेकऑफ करती हैं, तो फ्लाइट के प्रति व्यक्ति औसतन 6000 रुपए खर्च आता है। एक फ्लाइट पर औसतन खर्च कुल खर्च 10,80,000 रुपए खर्च आता है।

  • CAPA की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री को हर एक सेक्टर के हिसाब से साल 2021 के पहले क्वॉर्टर में होने वाला नुकसान
सर्विस अनुमानित नुकसान
एयरलाइंस 1.75 बिलियन डॉलर
एयरपोर्ट एंड कंसेसन 1.75 बिलियन डॉलर
ग्राउंड हैंडलिंग 90 मिलियन डॉलर
कुल 3.6 बिलियन डॉलर

एयर इंडिया को रोजाना 30 से 35 करोड़ रुपए का नुकसान

एक अनुमान के मुताबिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ाने रद होने के चलते एयर इंडिया को प्रतिदिन 30 से 35 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। एयर इंडिया के मुताबिक फ्लाइट बंद होने के चलते फ्यूल, ग्राउंडड हैंडलिंग, एयरपोर्ट चार्ज पर होने वाले खर्च की बचत हो रही है। लेकिन सैलरी और अलाउंसेस, लीज रेंट और मिनिमम मेंटीनेंस और इंटरेस्ट पेमेंट देना होगा। बता दें कि एयर इंडिया की रोजाना की आमदनी करीब 60 से 65 करोड़ रुपए है। इसमें से 90 फीसदी कमाई पैसेंजर ट्रैवल से होती है। एयर इंडिया की मानें, तो अभी पैसेंजर ट्रैवल से होने वाली कमाई पूरी तरह से ठप है। एयर इंडिया को कर्मचारियों की सैलरी के तौर पर 250 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च करने होते हैं, जबकि एरक्राफ्ट की लीज और रेंट पर करीब प्रतिमाह 30 मिलियन डॉलर का खर्च आता है। एयरलाइंस ने करीब 21 बोइंग B787-800s लीज पर ले रखें हैं। जबकि इसके अतिरिक्त 27 एयरबस A320Neo प्लेन की लीज देनी होती है। एयर इंडिया को एक बोइंग B787 एयरक्राफ्ट के लिए 1 मिलियन डॉलर यानी 10 लाख डॉलर रुपए प्रतिमाह के हिसाब से किराए का भुगतान करना होता है। जबकि A20Neo एयरक्राफ्ट के लिए 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने होते हैं। इसके अलावा, एयरलाइन को अन्य तमाम तरह के ब्याज के रूप में प्रति माह 225 करोड़ रुपए का पेमेंट करना होता है।

अन्य एयरलाइंस को होने वाल नुकसान

  • आईसीआईसीआी सिक्योरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक इंडिगो को 21 दिनों के लॉकडाउन के चलते 5494 करोड़ रुपए हो सकता है। जबकि स्पाइसजेट को करीब 1412 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। दूसरी एयरलाइंस कंपनियों को भी 21 दिनों के लॉकडाउन के चलते भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इन कंपनियों के लिस्टेड न होने के चलते नुकसान का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है।

किस कंपनी के पास कितने एयरक्राफ्ट

एयरलाइंस एयरलाइंस संख्या
एयरएशिया इंडिया 30
एयर इंडिया 122
एलायंस एयर 19
एयर इंडिया एक्सप्रेस 25
गो एयर 57
इंडिगो 261
स्पाइस जेट 116
स्टार एयर 3
ट्रूजेट 6
विस्तारा 41
जूम एयर 4
कुल 684

एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए का नुकसान


कोरोना वायरस के चलते भारत की एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लग रही है। प्रतिदिन करीब 4000 घरेलू और 500 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है। अकेले दिल्ली में ही रोजाना 900 से अधिक उड़ानों का संचालन होता है। भारतीय विमानन उद्योग को 75 से 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है। इसकी वजह से राजस्व में भी 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की जा सकती है। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोना के संकट से पहले देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का एक दिन का राजस्व करीब 350-400 करोड़ रुपए था, जो कि अब घटकर आधा रह गया है।रोजाना 150 करोड़ रुपए का नुकसान

किस एयरलाइंस के पास कितनी फ्लाइट और स्टॉफ

एयरलाइंस प्रतिदिन की फ्लाइट कुल स्टॉफ
इंडिगो 1500 28,000
विस्तारा 200 4000
गो एयर 300 5500

एयरलाइंस कंपनियों के सामने मुसीबत

एयरलाइंस मैन्यूफैक्चरिंग गाइडलाइन के मुताबिक पार्क किए गए प्लेन को भी मेंटिनेंस की जरूरत होती है। ऐसे में एयरलाइंस को सीमित तादाद में स्टॉफ को ड्यूटी पर रखना होता है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान छोटी एयरलाइंस कंपनी जैसे ट्रूजेट और स्टार एयरएयर को होगा। इन एयरलाइंस के पास बड़ी संख्या में मैनपावर और रिसोर्स की कमी होती है। भारत के सामने 650 कमर्शियल और निजी जेट विमानों के बेड़े की नाइट पार्किंग या अनिश्चित कालीन पार्किंग के लिए सरकार या हवाई अड्डे के ऑपरेटर से अनुमति की जरूरत होती है। अगर विमान में नाइट पार्किंग नहीं है, तो सरकार की ओर से विमान के आयात की इजाजत नहीं दी जाती है। ऐसे में भारत के 650 प्लेन के पास नाइट पार्किंग प्लेस होता है, तो उन्हें पूरी रात बिना किसी पार्किंग के विमान को घुमाना होता है।

प्लेन कहां खड़े किए गए

एयरपोर्ट पार्क प्लेन की संख्या
दिल्ली एयरपोर्ट 205
मुंबई एयरपोर्ट 100
बेंग्लुरु 71
हैदराबाद 61
कोलकाता एयरपोर्ट 54
चेन्नई एयरपोर्ट 53

यह बड़ा सवाल है कि आखिर 650 प्लेन को कहां पार्क किया गया है। फ्लाइट रडार 24 के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइंस इंडिगो के करीब 60 एयरक्राफ्ट दिल्ली में पार्क हैं, जो कि कुल फ्लीट का एक चौथाई है। वहीं एयर इंडिया के करीब 50 प्लेन दिल्ली में पार्क हैं।

एयरलाइंस कंपनी के विमान कितने एयरपोर्ट पर हैं पार्क

दिल्ली, मुंबई, बेंग्लुरू, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा एयरक्राफ्ट पार्क किए गए हैं। इसके अलावा कुछ एयरक्राफ्ट इंदौर, पुणे, अमृतसर, गुवाहाटी, चंढ़ीगढ़, जयपुर, लखनऊ, कालीकट और त्रिरुअनंतपुरम में पार्क हैं। इनमें से

एयरलाइंस एयरपोर्ट की संख्या
इंडिगो 18
स्पाइस जेट 11
गोएयर 11
एयर इंडिया 7
विस्तारा 6
एयर एशिया 5


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