• Home
  • Economy
  • Corona virus effect 100 million people in 35 countries imprisoned in homes MSME sector adding 1183 billion dollar to the economy badly hit 40 crore daily wage laborers most affected

कोरोनावायरस इफेक्ट : 35 देशों के करीब 100 करोड़ लोग घरों में कैद, अर्थव्यवस्था में 1183 बिलियन डॉलर जोड़ने वाला MSME सेक्टर बुरी तरह प्रभावित, नुकसान की चपेट में सबसे ज्यादा 40 करोड़ दिहाड़ी मजदूर

  • भारत का 348 मिलियन डॉलर का कारोबार प्रभावित हो सकता है। 
  • सुस्त भारतीय अर्थव्यवस्था को जकड़ सकती है तेज मंदी 

Moneybhaskar.com

Mar 22,2020 11:23:33 AM IST

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के चलते दुनिया लॉकडाउन की स्थिति से गुजर रही है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर करीब 35 देशों के 900 मिलियन लोगों ने सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंशिंग बना ली है। यूनाइटेड नेशशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवल्पमेंट (UNCTAD) की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस की वजह से साल 2020 में अर्थव्यवस्था को 1 से 2 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। वहीं भारत का 348 मिलियन डॉलर का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

देश के 40 करोड़ दिहाड़ मजूबर सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत की कुल वर्कफोर्स में से 93 फीसदी यानी करीब 400 मिलियन लोग मुख्त तौर पर अस्थायी सेक्टर से आते हैं जबकि करीब 93 मिलियन लोगों को सीजनल रोजगार मिलता है। इस सभी कामगारों को कोरोना वायरस की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल के मुताबिक भारत के अस्थायी रोजगार की बात करें, तो 75 फीसदी लोग स्वरोजगार हैं। यानी रिक्शा, कारपेंटर, पलंबर जैसे काम करते हैं। इन कामगारों को पेड लीव, मेडिकल जैसी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है।

MSME सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर

रिसर्चर राकेश के शुक्ला की मानें, तो कोरोनावायरसस की वजह से दिहाड़ी मजदूरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। शहरी इलाकों में करीब 25 से 30 फीसदी लोग दिहाड़ी पर मजदूरी करते हैं।

देश की करीब 75 मिलियन एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ की इंजन हैं, जो करीब 180 मिलियन नौकरी पैदा करती हैं। साथ ही करीब 1183 बिलियन डॉलर के हिसाब से अर्थव्यवस्था को रफ्तार देती है। इसमें से केवल 7 मिलियन एमएसएमई ही रजिस्टर्ड हैं।

  • नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने 31 मार्च तक 5 लाख से ज्यादा रेस्टोरेंट बंद करने का प्रस्ताव दिया है। इसकी वजह से रेस्टोरेंट में काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेज दिया गया है।
  • इवेंट एंड एंटरटेनमेंट मैनेजमेंट एसोसिएशन के मुताबिक कोरोना वायरस के चलते सभी कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है। इससे करीब 3000 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
  • ओला उबर जैसी ऐप बेस्ड कैब ऑपरेटर्स के मुताबिक राइड डिमांड में 50 फीसदी कमी दर्ज की जा रही है। बता दें डिमांड कम होने के चलते ओला उबर ने अपनी शेयर्ड सर्विस को बंद कर दिया है। इसके अलावा कार शोरूम और रेंटल स्टोर को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
  • ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वर्किंग फोर्स की काम करने की रफ्तार में कमी दर्ज की जा रही है, जो पिछले करीब 10 से 12 माह के निचले स्तर पर है। ऑलिव ग्रुप के संस्थापक एडी सिंह बतात हैं कि इंडस्ट्री के लिए बीता एक सप्ताह गंभीर चुनौतियों वाला रहा। सिंह की मानें, होली तक दक्षिण मुंबई के उनके 30 रेस्तरां में व्यापार काफी अच्छे से चल रहा था। लेकिन कोरोना वायरस की वजह लोगों का आना बिल्कुल बंद हो गया है।

सुस्त भारतीय अर्थव्यवस्था आ सकती है भयंकर मंदी की चपेट में

कोरोना वायरस के पहले से भारतीय अर्थव्यवस्था आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रही थी, लेकिन कोरोना वायरस के चलते अब भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है। एनएसओ ने अनुमान जाहिर किया कि साल 2019-20 में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 5 फीसदी रह सकती है, जो कि 11 साल का सबसे खराब स्थिति है। वहीं बेरोजगारी दर 45 साल के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। साल 2016 की नोटबंदी और जीएसटी लागू होने की वजह से भी अर्थव्यवस्था रफ्तार नहीं पकड़ सकी। बेरोजगारी, कम आमदनी और खेती की खराब हालात के चलते देश में कंज्यूमर सेंटीमेंट और डिमांड में कमी देखी गई।

क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की हर एक घर की औसत सेविंग और कर्ज

वित्त वर्ष सेविंग कर्ज
2012 23.6 फीसदी 8.7 फीसदी
2018 18.2 फीसदी 18.5 फीसदी
X

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.