Home »Economy »Taxation» Income Tax Department Has Sent A Fresh Notice To UK-Based Oil Explorer Cairn Energy

I-T डिपार्टमेंट ने केयर्न एनर्जी को भेजा 30700 करोड़ रु पेनल्‍टी का नो‍टिस

नई दिल्‍ली. इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी को 30,700 करोड़ रुपए की पेनल्टी का नोटिस भेजा है। टैक्‍स डिपार्टमेंट ने केयर्न को पहले 10,247 करोड़ रुपए कैपिटल गेन्स टैक्स का नोटिस भेजा था। इसे नहीं चुकाए जाने के कारण तीन गुना पेनल्टी लगाई है। यूके की केयर्न एनर्जी ने 2006 में अपनी इंडियन यूनिट केयर्न इंडिया को यहां की सारी एसेट ट्रांसफर कर दी थी। इसके बदले में केयर्न इंडिया ने केयर्न एनर्जी को 69 फीसदी इक्टिव होल्डिंग दी थी। टैक्स डिमांड इसी एसेट ट्रांसफर से जुड़ा है।
 
 
- टैक्‍स देनदारी का यह मामला इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल में गया। ट्रिब्‍यूनल ने 9 मार्च को 10,247 करोड़ रु. के रेट्रोस्पेक्टिव (पिछली तारीख से) टैक्स को सही ठहराया था, लेकिन पिछली तारीख से ब्याज को खारिज कर दिया था।
- आईटी डिपार्टमेंट का कहना है कि शेयर के इस इनडायरेक्‍ट ट्रांसफर की वैल्‍यू लोकल एसेट्स के आधार पर है। जिसमें राजस्‍थान और कृष्‍णा-गोदावरी बेसिन के अत्‍यधिक प्रोडक्टिव ऑफ फील्‍ड्स शामिल हैं। यूके कंपनी का कहना है कि एसेट ट्रांसफर का यह मामला इन्‍टरनल रिग्रुपिंग का है।
- इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट के एक अफसर के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने ब्याज पर रोक लगाई है, पेनल्टी पर नहीं। इसलिए पेनाल्टी का नया नोटिस दिया गया है।
- इनकम टैक्‍स कानून में 100 से 300 फीसदी तक पेनल्टी का प्रावधान है। टैक्‍स अफसर ने बताया कि यह कारण बताओ नेटिस की तरह है। टैक्‍स डिपार्टमेंट ट्रिब्यूनल के आदेश के छह महीने के भीतर पेनल्टी लगा सकता है।
 
नेक्स्ट 50’इंडेक्स से बाहर होगी केयर्न इंडिया
- बीएसई सेंसेक्स के ‘नेक्स्ट 50’ इंडेक्स से 26 अप्रैल को केयर्न इंडिया और यूनाइटेड स्पिरिट्स को हटाया जाएगा। इनकी जगह पेट्रोनेट एलएनजी और हैवेल्स इंडिया लेंगी। बीएसई ने एक सर्कुलर में यह जानकारी दी है।
- इस इंडेक्स में सेंसेक्स-50 के बाहर की 50 प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। एक्सचेंज के अनुसार वेदांता में केयर्न इंडिया के विलय के बाद इसमें ट्रेडिंग रोक दी गई है। इसलिए इसे इंडेक्स से हटाया जा रहा है।
 
2007 में एसेट ट्रांसफर का है मामला
- केयर्न एनर्जी ने 2006 में अपनी इंडियन यूनिट केयर्न इंडिया को यहां की सारी एसेट ट्रांसफर कर दी थी। टैक्स डिमांड इसी एसेट ट्रांसफर से जुड़ा है।
- केयर्न एनर्जी ने जनवरी 2007 में भारतीय इकाई को शेयर बाजार में लिस्ट कराया। इसके बाद 2011 में यह कंपनी वेदांता को बेच दी। लेकिन इसके 9.8% शेयर अपने पास रखे। ड्राफ्ट असेसमेंट के बाद इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने इसकी बिक्री पर रोक लगा रखी है।
- इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट के अनुसार 31 मार्च 2007 को केयर्न पर कैपिटल गेन्स टैक्स बनता था। उसका रिटर्न दिसंबर 2007 तक फाइल करना था। लेकिन कंपनी ने 31 मार्च 2014 को रिटर्न फाइल किया।
- इससे पहले 24 जनवरी 2014 को डिपार्टमेंट ने ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर जारी किया था। असेसमेंट जनवरी 2016 में पूरा हुआ। इसके बाद 10,247 करोड़ रु. टैक्स के साथ 10 साल के ब्याज के रूप में 18,800 करोड़ रु. (कुल 29,047) का डिमांड नोटिस भेजा गया।
- केयर्न ने शेयरधारकों को भेजी सूचना में कहा था कि वह असेसमेंट ऑर्डर का विरोध करेगी। टैक्स की देनदारी सिर्फ भारत स्थित एसेट पर बनती है। 31 दिसंबर 2016 को इसकी वैल्यू 75 करोड़ डॉलर (4,875 करोड़ रु.) थी। 
 

Recommendation

    Don't Miss

    NEXT STORY