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भारत में पनामा पेपर्स लीक के ये होंगे बड़े असर

विदेशों में ब्‍लैकमनी रखने वालों की इस सिक्रेट लिस्‍ट में टॉप बिजनेसमैन, नेता, अभिनेता समेत भारत के 500 लोगों के नाम हैं।

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नई दिल्‍ली. ब्‍लैकमनी मामले में पनामा पेपर्स के खुलासे से दुनियाभर में बवाल खड़ा हो गया है। विदेशों में ब्‍लैकमनी रखने वालों की लिस्‍ट में टॉप बिजनेसमैन, एक्टर और नेताओं समेत भारत के 500 लोगों के नाम हैं। इसे देखते हुए भारत सरकार भी हरकत में है। अरुण जेटली ने जांच के लिए ‘मल्‍टी एजेंसी ग्रुप’ बना दिया है। वहीं, ब्‍लैकमनी पर बनाई एसआईटी ने कहा है कि वह मामले की विस्‍तार से जांच करेगी। 
 
 
ब्‍लैकमनी मूवमेंट को मिलेगी गति
 
यह खुलासा इस बार ब्‍लैकमनी मूवमेंट को जोरदार ताकत दे सकता है। ब्‍लैकमनी लाने का वादा कर सत्‍ता में आई मोदी सरकार के लिए इस बार हालात को संभालना मुश्किल हो सकता है।  
 
फाईनेंशियल लेवल पर क्या हो सकता है असर?
 
देश के कई बिजनेस टायकून के नाम इस लिस्‍ट में हैं। इससे पिछले कुछ सालों में सुधरी कार्पोरेट सेक्टर की इमेज फिर खराब हो सकती है। केपी सिंह, अडानी, और अपोलो ग्रुप के बिजनेस पर इसका असर हो सकता है। 
 
क्‍या होंगे सियासी असर?
 
- इस खुलासे के गंभीर सियासी असर हो सकते हैं। जो काम सरकार को करना चाहिए था, वह कुछ जर्नलिस्ट्स कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर आवाज उठेगी। पांच राज्‍यों में चुनाव चल रहे हैं। इन पर भी असर हो सकता है। 
 
कानूनी तौर पर क्या?
 
ज्यादातर मामले फेरा के वक्त के हैं। किसी भी कानून की एक टाइमलिमिट होती है। ऐसे में लिस्‍ट में शामिल लोगों के बचने की गुंजाइश ज्यादा है। फेमा ने फेरा की जगह ले ली है, ऐसे में नए कानून के तहत उनके खिलाफ मामला मुमकिन होता नहीं दिख रहा है।
 
क्या हैं आरबीआई नॉर्म्स?

- 2003 से पहले कोई भी कंपनी या शख्स विदेशों में कोई कंपनी नहीं बना सकती थी।
- 2004 में पहली बार लोगों को लिबरेलाइज्‍ड रेमिटेंस स्‍कीम के तहत 25 हजार डॉलर तक की राशि विदेश भेजने की इजाजत दी गई थी।
- इसके बाद इस लिमिट को बढ़ाकर दो लाख 50 हजार डॉलर कर दिया गया, जो अभी भी इस्तेमाल में है।
 
 
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