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प्रतिक्रिया /कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का इंडस्ट्री ने किया स्वागत, कहा - बढ़ेगा विदेशी निवेश, बेहतर होगी कामगारों की वित्तीय स्थिति

  • सरकार ने घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स 30% से घटाकर 22% किया

Moneybhaskar.com

Sep 20,2019 07:08:50 PM IST

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की है। सरकार ने घरेलू कंपनियों पर लगने वाले कॉरपोरेट टैक्स को 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर दिया है। सेस और अन्य टैक्स को जोड़कर यह नया टैक्स 25.17 फीसदी होगा। जो कंपनियां इस नई टैक्स छूट का लाभ लेंगी उन्हें सरकार की ओर से दिए जा रहे अन्य लाभ नहीं मिलेंगे। इसके अलावा सरकार ने कंपनियों पर लगाए जाने वाले मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) को भी खत्म कर दिया गया है। लेकिन जो कंपनियां सरकारी इंसेंटिव का लाभ लेना चाहती है उन्हें मैट (मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स) देना होगा लेकिन इसकी दर 15 फीसदी होगी। अभी यह दर 18.5 फीसदी है। टैक्स में दी गई इस छूट से सरकार पर 1.45 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार के इस ऐलान का कॉरपोरेट जगत ने स्वागत किया है और इसे अर्थव्यवस्था की दृष्टि से बेहतर बताया है।

आइए जानते हैं कॉरपोरेट जगत के दिग्गजों ने क्या कहा है :

अशोक मोहनानी (अध्यक्ष, एकता वर्ल्ड और उपाध्यक्ष, नरेडको महाराष्ट्र) - निवेशक और होमबॉयर्स अनिश्चितता और धूमिल अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण के कारण हाल ही में दूसरी तरफ रहे हैं। आज की घोषणा अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर प्रकाश की किरण लेकर आई है, जिसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स में 1900 पॉइंट्स की वृद्धि हुई है। इसने निवेशक के धन में करीब 7 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि की है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सेंटीमेंट में सकारात्मक बदलाव आएगा। इसके अलावा, इस क्षेत्र ने आवास परियोजनाओं को पूरा करने के लिए ऋणों के आजीवन पुनर्गठन की अनुमति देने के लिए और होम लोन को 7% तक कम करने के लिए भी एफएम को अनुरोध किया है, जिससे हम 2022 तक सभी के लिए आवास प्राप्त कर पाएंगे।

शिशिर बैजल (चेयरमैन & मैनेजिंग डायरेक्टर, नाइट फ्रैंक इंडिया ) - कॉर्पोरेट कर व्यवस्था के पुनर्गठन पर हम आज सुबह माननीय वित्त मंत्री की घोषणा से खुश हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को शुरू करने और उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक माइलस्टोन प्रयास है। यह पर्याप्त प्रत्यक्ष कर कटौती उन कॉर्पोरेट्स के लिए अधिक तरलता की अनुमति देगा जो वर्तमान में अपनी लाभप्रदता की रक्षा के लिए कठोर उपाय की कल्पना कर रहे हैं। कॉर्पोरेट करों में इस कमी से संगठनों को बढ़ने में मदद मिलेगी और हमारी अर्थव्यवस्था में संतुलन बहाल करते हुए रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए एक मजबूत अर्थव्यवस्था जीडीपी वृद्धि के लिए उच्च खपत का कारण बनेगी। जैसा कि यह हमेशा होता है, एक उच्च जीडीपी वृद्धि लंबी अवधि के प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने वाले उपयोगकर्ता खरीद पैटर्न और सामान्य वित्तीय विश्वास की ओर ले जाती है।ये उपाय आरबीआई द्वारा तरलता और उपभोक्ता खर्च बढ़ाने में मौद्रिक नीति के उपायों के पूरक होंगे। एक ट्रिकल-डाउन प्रभाव के रूप में, हमें रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए भी पुनरुद्धार की उम्मीद करनी चाहिए। यह बढ़ावा निश्चित रूप से वाणिज्यिक स्थानों की मांग में तेजी लाएगा, लेकिन हम समझते हैं कि अपेक्षित वित्तीय स्थिरता निकट भविष्य में संकटग्रस्त आवासीय बाजार के लिए विकास को बढ़ावा देगी।

पार्थ मेहता (प्रबंध निदेशक, पैराडिम रियल्टी) - नई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए टैक्स दर घटाकर 15 फीसदी किए जाने से कॉरपोरेट क्षेत्र को लाभ होगा और अर्थव्यवस्था में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सही दिशा में है। FPI को पूंजीगत लाभ पर सरचार्ज से मुक्त करना सरकार का एक साहसिक कदम है। यह कदम एफआईआई द्वारा पूंजी बाजार में निवेश को आमंत्रित करेगा।

मंजू याग्निक, उपाध्यक्षा, नाहर ग्रुप और उपाध्यक्षा, नरेडको (महाराष्ट्र)- कॉरपोरेट टैक्स घटने से श्रमिक वर्ग की वित्तीय स्थितियों के बदलने की भी उम्मीद है। कंपनियां कर्मचारियों को बेहतर पेशकश कर सकती हैं। इससे नई स्टार्ट अप फर्मों और युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने में भी मदद मिलेगी। टैक्स में कमी से विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। इससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

रोहित पोद्दार (प्रबंध निदेशक, पोद्दार हाउसिंग एंड डेवलपमेंट लिमिटेड) - कॉरपोरेट टैक्स को 35% से घटाकर 25.17% करने और MAT में कटौती से नए उपक्रमों के लिए रचनात्मक वातावरण तैयार होगा। ये सुधार देश को विदेशी निवेशकों के लिए सबसे अनुकूल गंतव्य में से एक बनाएगा।

निरंजन हीरानंदानी (अध्यक्ष, नरेडको) - यह भारत सरकार द्वारा एक सुधारात्मक कदम है। इस कदम का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विकास को पुनर्जीवित करना है। यह कदम भारतीय कॉर्पोरेट कर व्यवस्था को दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के समान बनाता है।

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