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    GST कानूनों के ड्राफ्ट को 22 मार्च को कैबिनेट के सामने रखेगी फाइनेंस मिनिस्ट्री

    GST कानूनों के ड्राफ्ट को 22 मार्च को कैबिनेट के सामने रखेगी फाइनेंस मिनिस्ट्री
    नई दिल्ली.फाइनेंस मिनिस्ट्री सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सी-जीएसटी), इंटिग्रेटेड जीएसटी (आई-जीएसटी) और स्टेट जीएसटी (एस-जीएसटी) कानूनों को मंजूरी के लिए आगामी 22 मार्च को कैबिनेट के सामने पेश करेगी। मिनिस्ट्री के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। जीएसटी काउंसिल ने 4 मार्च को ही सी-जीएसटी और आई-जीएसटी के ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी।
     
    जीएसटी काउंसिल ने शनिवार को ही दो अहम कानूनों सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) और इंटिग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी। सरकार ने 1 जुलाई से जीएसटी को लागू करने का लक्ष्य रखा है।
     
     
    काउंसिल की अगली मीटिंग 16 मार्च को
    जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में सीजीएसटी और आईजीएसटी के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गयी। काउंसिल की अगली मीटिंग 16 मार्च को होगी, जिसमें राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) तथा यूनियन टेरिटरी जीएसटी (यूटी-जीएसटी) संबंधी बिल्स के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाना है।
     
    पार्लियामेंट में पेश होंगे सीजीएसटी और आईजीएसटी बिल
    वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीटिंग के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सी-जीएसटी और आई-जीएसटी बिल संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में मंजूरी के लिए रखे जाएंगे। दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू हो रहा है।
    सीजीएसटी केंद्र को एक्साइस और सर्विस टैक्स के जीएसटी में समाहित होने के बाद गुड्स और सर्विसेज पर जीएसटी लगाने का अधिकार देगा। वहीं आईजीएसटी इंटर-स्टेट बिक्री पर लागू होगा।  
     
    विधानसभा में पारित कराना होगा एसजीएसटी बिल
    एसजीएसटी बिल को प्रत्येक राज्य की विधानसभा में पारित कराना होगा। वहीं यूटी-जीएसटी को मंजूरी के लिए संसद में रखा जाएगा।
    वैट और राज्य में लगने वाले अन्य टैक्सेस के जीएसटी में समाहित होने के बाद एस-जीएसटी राज्यों को टैक्स लगाने की अनुमति देगा।
     
    40 फीसदी होगी उच्चतम रेट
    जेटली ने कहा कि मॉडल जीएसटी कानून में गुड्स और सर्विस टैक्स की उच्चतम रेट को 40 फीसदी तक (20 फीसदी केंद्र और उतना ही राज्यों द्वारा) किए जाने की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन जीएसटी की प्रभावी दरों को पूर्व में मंजूर 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत पर ही रखा जाएगा।
    वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि जीएसटी रेट्स वही रखी जाएंगी, जिन्हें काउंसिल ने तय कर रखा है। कोई टैक्स ज्यादा नहीं लगाया जाएगा लेकिन बिल में मैक्सिमम रेट को थोड़ा ऊंचा रखा जाएगा। यह उसी तरह का होगा जैसा सीमा शुल्क के मामले में होता है जहां बाउंड रेट (शुल्क का दायरा) और लागू रेट में फर्क होता है।
     
    1 जुलाई से जीएसटी लागू होने की संभावना
    जेटली ने उम्मीद जताई कि जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करने समयसीमा संभव लगती है। उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि गाड़ी पटरी पर है। उम्मीद है कि ये बिल इसी सत्र में संसद के सामने रख दिए जाएंगे। संसद की मंजूरी मिलने के बाद लगता है कि इस साल एक जुलाई से जीएसटी लागू किया जा सकता है।’
     
    50 लाख तक टर्नओवर वाले छोटे होटलों पर 5% टैक्स
    बैठक में ढाबों और छोटे रेस्तरां पर एक पैकेज कंपोसिट स्कीम के तहत 5 फीसदी टैक्स लगाने पर सहमति बनी, जिसमें 2.5 फीसदी केंद्र और 2.5 फीसदी राज्यों के हिस्से में जाएगा। इसके अंतर्गत सालाना 50 लाख रुपए तक का कारोबार करने वाली इकाइयां ही आएंगी।
     
    1 जुलाई से GST लागू होने की संभावनाएं बढ़ीं: PwC
    पीडब्ल्यूसी इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स लीडर प्रतीक जैन ने कहा कि इन बिलों को मंजूरी जीएसटी लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि काउंसिल राज्यों के सभी सुझावों पर सहमत हो गई, जिसमें आईजीएसटी लॉ के अंतर्गत क्रॉस एम्पावरमेंट भी शामिल है। इसके साथ ही जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करने में कोई बाधा नहीं दिखती।’

     

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