Home »Economy »Taxation» CBDT Says Only 16 Per Cent Of Them Were Forwarded For Further Inquiry

ब्‍लैकमनी के बारे में लोगों से मिली जानकारी पर 6 हजार के खिलाफ जांच, जारी किया था Email

नई दिल्‍ली. ब्‍लैकमनी के बारे में लोगों से जानकारी देने के लिए जारी Email पर 38 हजार से ज्‍यादा लोगों ने जानकारी दी है। इसमें से 6,050 के खिलाफ जांच के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह जानकारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्‍ट टैक्‍सेज (सीबीडीटी) ने एक आरटीआई के जबाव में दी है।
 
हजारो मेल कार्यवाही के लायक नहीं माने गए
 
सीबीडीटी ने पिछले साल दिसम्‍बर में Email पता `blackmoneyinfo@incometax.gov.in' जारी किया था। इस पर आम लोगों से ब्‍लैकमनी वालों के बारे में जानकारी मांगी थी। आरटीआई कार्यकता जितेन्‍द्र गाडगे ने सीबीडीटी से इस संबंध में जानकारी मांगी थी। इसके जबाव में सीबीडीटी ने बताया है कि देशभर से 7 अप्रैल तक 38,068 लोगों के मेल मिले। इनमें से 6,050 लोगों के खिलाफ उचित कार्यवाही के लिए डायरेक्‍टर जनरल ऑफ इनकम टैक्‍स के पास जानकारी को भेज दिया गया है। बाकी मेल कार्यवाही के लायक नहीं माने गए। जिन मेल को कार्यवाही के लायक माना गया है वह कुल आए मेल का 16 फीसदी हैं। गाडगे ने अपनी आरटीआई में फर्जी मेल के बारे में जानकारी मांगी थी। इस पर बताया गया है कि अभी इस विषय पर बता पाना संभव नहीं है जांच के बाद ही पता चलेगा।
 
दिसम्‍बर में जारी किया गया थाEmail
 
पिछले साल दिसम्‍बर में यह Emailजारी किया गया था। इसे रेवेन्‍यु सेक्रेट्री ने जारी किया था। इस मेल पर जानकारी देने वाले की पहचान को गुप्‍त रखने का आश्‍वासन दिया गया था। हालांकि इस पते पर आए 84 फीसदी मेल किसी जांच के लायक नहीं समझे गए। गाडगे के अनुसार इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि या तो यह फर्जी थे या विभाग ने इन्‍हें गंभीरता से नहीं लिया। इसके अलावा विभाग में कर्मचारियों की कमी भी इसका कारण हो सकती है। गाडगे ने एक और आरटीआई डाली थी जिसमें 1 जनवरी 2017 तक आरबीआई के पास आए पुराने नोटों के बारे में पूछा था, लेकिन विभाग ने इस जानकारी देने से मना कर दिया। 
 
नोटबंदी के बाद ब्‍लैकमनी रखने वालों पर बढ़ी है सख्‍ती
 
सरकार ने पिछले साल नवम्‍बर में नोटबंदी लागू की थी। इसे ब्‍लैकमनी के खिलाफ बड़ा कदम बताते हुए सरकार ने कई तरह से और भी लड़ाई का संकल्‍प जताया था। उसी के तहत यह Email जारी कर ब्‍लैक मनी रखने वालों के खिलाफ अभियान का हिस्‍सा बताया था। जनता ने भी इसमें पूरा साथ दिया और हजारों Email कर सरकार को जानकारी दी। 
 

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