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सिफारिश /डायरेक्ट टैक्स कोड समिति ने डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को खत्म करने का दिया है सुझाव

  • 5%, 10% और 20% के इनकम टैक्स स्लैब की सिफारिश

Moneybhaskar.com

Aug 29,2019 02:43:00 PM IST

नई दिल्ली. व्यक्तिगत आयकर की दरों के मामले में डायरेक्ट टैक्स कोड (DTC) पर बनी समिति ने 5, 10 और 20 प्रतिशत के तीन स्लैब की सिफारिश की है अर्थात अधिकतम कर की सीमा पर आम जनता को राहत प्रदान करने की व्यवस्था की है क्योंकि अभी 5, 20 और 30 प्रतिशत की दर से आयकर वसूला जाता है। इससे रेवेन्यू के फ्रंट पर सरकार के कैश फ्लो में कमी आने की संभावना है।

5%, 10% और 20% के इनकम टैक्स स्लैब की सिफारिश

आयकर की चोरी को रोकने के लिए आयकर में दरों की ढील देने का राहत भरा सुझाव डायरेक्ट टैक्स कोड (DTC) पर बनी समिति ने दिया है। सूत्रों का मानना है कि निजी आयकर की दरों के मामले में समिति ने 5, 10 और 20 प्रतिशत के तीन स्लैब की सिफारिश वैश्विक तौर पर रीजनेबल और राहत भरी कर की दर मानी जाएगी। टैक्स स्लैब में बदलाव सरकार की आमदनी दो-तीन साल के लिए घट जाएगी। हालांकि यह अभी तय नहीं है और सरकार को इस पर निर्णय लेना होगा। इस फैसले से आम जनता में कर चुकाने की भावना और अधिक बलवती होगी और आयकर की रिटर्न फाइल करने में आसानी होगी।

सुगम कराधान की व्यवस्था

विभिन्न प्रकार की फोटो और उनकी घटनाओं से मुक्ति के लिए तरह-तरह की छुट्टी खत्म हो जाएंगी जिससे इनकम टैक्स की गणना करना और रिटर्न फाइल करना आसान हो सकेगा।’साथ ही आयकर से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए मध्यस्थता पैनल यानी पंचाट बनाने से कर चोरी रोकने में भी मदद मिलेगी।

डिविडेंड पर तीन बार टैक्स

अभी भारतीय कंपनियों को किसी वित्त वर्ष में घोषित या चुकाए गए कुल लाभांश पर 15 प्रतिशत का डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स देना पड़ता है और इस पर 12 प्रतिशत का सरचार्ज और 3 प्रतिशत का एजुकेशन सेस भी लगता है। इससे कुल कर 20.35 प्रतिशत हो जाता है। कुछ समय पहले शेयर बाजार के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री सीतारमण के साथ मीटिंग में उनका ध्यान इस ओर दिलाया था कि लाभांश पर एक से अधिक बार आयकर लग रहा है जोकि इस कानून की आत्मा के खिलाफ है कि एक इनकम पर एक से अधिक बार टैक्स लगना ठीक नहीं इसलिए इसमें कटौती की जानी चाहिए और एक आय पर एक ही बार टैक्स लगे।

शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है

सबसे पहले तो कंपनियों को कुल मुनाफे पर कॉर्पोरेट टैक्स देना पड़ता है, उसके बाद वे डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स चुकाती हैं और इस बार के कर प्रावधान के अनुसार बड़े निवेशकों के हाथ में भी इस पर टैक्स की देनदारी बनती है। इन्हीं वजहों से संस्थागत विदेशी निवेशक और बड़े भारतीय निवेशक शेयर बाजार से निकलकर अब अमेरिकी और यूरोपीय बाजार की तरफ रुख करने लगे हैं जिसकी वजह से शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है और कुल पूंजीकरण लगातार गिरता जा रहा है अगर ऐसा ही रहा तो संभवतः हमारा पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का ख्वाब अधिक समय लेगा। इस समिति का सुझाव है कि लाभांश को भी एक सामान्य आय मान कर ही उस पर टैक्स लगाया जाए।

इनकम टैक्स कानून की धारा 115 (o) में बदलाव का सुझाव दिया गया है

डायरेक्ट टैक्स कोड की समिति ने डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटाने का सुझाव दिया है। इसके बजाय उसने डिविडेंड को सामान्य आमदनी मानकर उस पर टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। इसके लिए समिति ने इनकम टैक्स कानून की धारा 115 (o) में बदलाव का सुझाव दिया है। समिति का यह भी मानना है कि टैक्स नियमों में किसी भी वर्ग के निवेशकों के साथ भेदभाव न हो। इसलिए उसने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स को बनाए रखने का सुझाव दिया है। वह STT को भी बरकरार रखने के पक्ष में है क्योंकि उससे ट्रांजैक्शंस पर नजर रखने में मदद मिलती है।’

इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार नए नियमों को लागू करने पर फैसला लेगी

स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए जो भी व्यापार होता है, उस पर STT के रूप में डायरेक्ट टैक्स चुकाना होता है। इसकी दर डिलिवरी वाले सौदे पर 0.1 प्रतिशत है। इंट्रा-डे सौदों में शेयर खरीदने पर कोई STT नहीं चुकाना पड़ता, लेकिन बेचने पर कुल टर्नओवर का 0.025 प्रतिशत कर देना होता है। ज्ञातव्य है कि इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार नए नियमों को लागू करने पर फैसला लेगी। डायरेक्ट टैक्स कोड इनकम टैक्स में आमूलचूल परिवर्तन की एक प्रक्रिया है जिससे नए कानून को बना कर आमजन के लिए आयकर को सुगम और सरल बनाया जा सकेगा जोकि भाजपा सरकार चुनाव घोषणा पत्र की प्राथमिकताओं में शामिल है।

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