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टैक्‍स भरने की पूरी प्रक्रिया अब होगी ऑनलाइन, नहीं लगाने पड़ेंगे आई-टी ऑफिस के चक्‍कर

टैक्‍स भरने की पूरी प्रक्रिया अब होगी ऑनलाइन, नहीं लगाने पड़ेंगे आई-टी ऑफिस के चक्‍कर
नई दिल्‍ली।टैक्‍स भरने की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट से जुड़ी सभी प्रोसिडिंग्‍स को अब ऑनलाइन ही किया जाएगा। टैक्‍स बॉडी सीबीडीटी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा है कि टैक्‍सपेयर और टैक्‍स वसूलने वाले अधिकारी के बीच होने वाली प्रोसिडिंग्‍स भी अब ऑनलाइन ही होगी।
 
भ्रष्‍टाचार को रोकना है मकसद
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्‍ट टैक्‍स (सीबीडीटी) ने आय कर भरने वाले व्‍यक्ति और इसका आकलन करने वाले अधिकारी के बीच मानवीय दखल को एकदम कम करने के लिए यह कदम उठाया है। इस पहल के जरिए टैक्‍सपेयर को होने वाली दिक्‍कतों में कमी आएगी और भ्रष्‍टाचार भी कम होगा।
 
ई-फाइलिंग वेबसाइट पर आएगी नई लिंक
डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जल्द ही एक नया लिंक या विंडो ‘ई-प्रोसिडिंग्‍स’ पेश किया जाएगा। टैक्‍स भरने के लिए इस्‍तेमाल की जाने वाली इस वेबसाइट को डिपार्टमेंट के आंतरिक बिजनेस एप्लिकेशन से जोड़ा गया है। इससे आकलन अधिकारी नई व्‍यवस्‍था का आसानी से यूज कर सकेंगे। इसके साथ ही टैक्‍सपेयर को भी बार-बार इनकम टैक्‍स के ऑफिस के चक्‍कर नहीं लगाने होंगे।
 
सीबीडीटी ने जारी किया नो‍टिफिकेशन
सीबीडीटी ने सोमवार को इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया है। उसने इसमें साफ किया है कि ई-कम्‍युनिकेशन की नई प्रक्रिया इनकम टैक्‍स एक्‍ट, 1961 के तहत होने वाले हर काम पर लागू होगी। हालांकि एक टैक्‍सपेयर ई-कम्‍युनिकेशन सुविधा का इस्‍तेमाल करना चाहे या नहीं, यह उस पर निर्भर करता है। ऐसे में वह मौजूदा ऑफलाइन व्‍यवस्‍था से भी टैक्‍स भरने की सारी प्रक्रिया पूरी कर सकता है।
 

सीबीडीटी ने लाया पूंजी लाभ कर से छूट देने का प्रस्‍ताव
इसी बीच, शेयर बाजार में शेल कंपनियों के नाम से होने वाली कर चोरी पर नजर रखने के लिए और सही सौदों की सुरक्षा के लिए इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने सोमवार को कुछ विशेष डील्‍स को लंबी अवधि के पूंजी लाभ कर से छूट देने का प्रस्‍ताव रखा है। यह ऐसे सौदों के लिए होगा, जहां प्रतिभूति लेनदेन कर एसटीटी नहीं चुकाया गया है। वित्त विधेयक-2017 के अनुसार ऐसी लंबी अवधि पूंजी परिसंपत्ति के लेनदेन से बढ़ी आय को कर से छूट दी जाएगी, जिनका लेनदेन एक अक्तूबर 2004 के बाद किया गया है और जिन पर प्रतिभूति लेनदेन कर ‘एसटीटी’ देय है।

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