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Budget 2018: रिटर्न न भरने वाली कंपनियों की खैर नहीं, अब दर्ज होगा मुकदमा

नई दिल्‍ली। कंपनियां के लिए अब इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइलिंग को इग्‍नोर करना महंगा पड़ेगा। अब जो कंपनियां इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल नहीं करेंगी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। फाइनेंस बिल 2018-19 में कंपनियों के इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइलिंग नियम में संशोधन का प्रस्‍ताव किया गया है। यह नियम 1 अप्रैल 2018 से लागू होगा। केंद्र सरकार ने देश में बड़े पैमाने पर मौजूद शेल कंपनियों को ध्‍यान में रखते हुए इस नियम का प्रस्‍ताव किया गया है। शेल कंपनियां वे कंपनियां होती हैं जिनका इस्‍तेमाल काले धन को सफेद बनाने में किया जाता है। 

 

शेल कंपनियां नहीं फाइल करती हैं रिटर्न 

 

सीए विनोद जैन ने moneybhaskar.com को बताया कि देश में बड़े पैमाने पर शेल कंपनियां हैं। इनमें से 99 फीसदी कंपनियां रिटर्न फाइल नहीं करती हैं। मौजूदा नियम के तहत अगर कोई कंपनी की इनकम टैक्‍सेबल नहीं है और वह रिटर्न फाइल नहीं करती है तो उस पर मुकदमा नहीं चलाया जाता है लेकिन फाइनेंस बिल प्रभावी होने के बाद कंपनियों को इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करना होगा। चाहे उनकी इनकम पर टैक्‍स बनता हो या न बनता हो। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो उनके ख्रिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। 

 

काधे धन पर अंकुश के लिए शेल कंपनियों के खिलाफ एक्‍शन 

 

सरकार ने ब्लैकमनी की चुनौती से निपटने के लिए 'शेल कंपनियों' के खिलाफ लगातार एक्‍शन ले रही है। हाल में केंद्र सरकार ने  नियमों का पालन नहीं किए जाने के कारण 1.20 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल करने का फैसला लिया गया था।   

 

पहले ही कैंसल हो चुका है 2.26 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन

 

सरकार 2.26 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन पहले ही कैंसल कर चुकी है और ऐसी कंपनियों से जुड़े लगभग 3.09 लाख डायरेक्टर्स को डिसक्वालिफाई किया जा चुका है।  डिरजिस्टर्ड कंपनियों के हुए एक्शन को लेकर हुई रिव्यू मीटिंग के बाद 1.20 लाख कंपनियों के रजिस्ट्रेशन कैंसल करने का फैसला लिया गया है।
 

अवैध फंड को बाहर निकालने के लिए एक्शन

दिसंबर, 2017  तक 2.26 लाख से ज्यादा कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल किया गया था। यह एक्शन इकोनॉमी से अवैध फंड बाहर निकालने की कवायद का हिस्सा था।

 

 

 

 

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