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SC से वोडाफोन को मिली राहत, टैक्स डिमांड पर दूसरा आर्बिट्रेशन शुरू करने को दी मंजूरी

11 हजार करोड़ रुपए के वोडाफोन टैक्स आर्बिट्रेशन केस में गुरुवार को नया मोड आ गया।

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नई दिल्ली. 11 हजार करोड़ रुपए के वोडाफोन टैक्स आर्बिट्रेशन केस में गुरुवार को नया मोड़ आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन को 2012 के रिस्ट्रोपेक्टिव लॉ के माध्यम से की गई इस टैक्स डिमांड के मामले में प्रिसाइडिंग आर्बिट्रेटर/चेयरमैन की नियुक्ति के लिए दूसरे आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

 

वोडाफोन ने दी यह दलील

वोडाफोन ने कहा कि यह मामला भारत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, क्योंकि उसका पहले से यूनाइटेड किंगडम के साथ एक पैक्ट है।

केंद्र सरकार ने दलील दी कि यह 'कानून की प्रक्रिया का मखौल है', क्योंकि दूसरे आर्बिट्रेशन की की नियुक्ति की वजह पहले के समान है और यह नियमों के विरुद्ध है।

 

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हाई कोर्ट का फैसला आने तक आर्बिट्रेशन में नहीं होगी सुनवाई

जस्टिस ए के सीकरी और अशोक भूषण की बेंच ने कहा कि चेयरमैन की नियुक्ति की जा सकती है जिससे आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल बन जाए, लेकिन इसे लंबित मामले में 10 जनवरी तक दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला आने तक सुनवाई शुरू नहीं करनी चाहिए।

 

 

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका

 

इससे पहले 26 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने 11 हजार करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड के मामले में वोडाफोन ग्रुप को यूके से हुई टैक्स ट्रीटी के तहत भारत के खिलाफ आर्बिट्रेशन प्रोसीडिंग्स की दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति दे दी थी।

केंद्र सरकार ने इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके इस मामले में वोडाफोन की ओर से शुरू की गई डुअल आर्बिट्रेशन प्रोसीडिंग्स को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। 2012 में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा हारने के बाद केंद्र सरकार ने टैक्स कानून में संशोधन कर उसे बैक डेट से लागू कर दिया। सरकार ने इसी संशोधित कानून का सहारा लेते हुए वोडाफोन से बतौर टैक्स 11 हजार करोड़ रुपए की डिमांड की थी। इसके बाद वोडाफोन की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को डुअल आर्बिट्रेशन प्रॉसीडिंग्स में शामिल होने का आदेश दिया।

 

 

2007 में भारत में हुई थी वोडाफोन की एंट्री

दुनिया की दूसरी बड़ी मोबाइल ऑपरेटर वोडाफोन ने हचिसन के वायरलेस एसेट्स को खरीदकर 2007 में भारत में एंट्री की थी। कंपनी इसी अधिग्रहण से जुड़े टैक्स बिल को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रही है।

 

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