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ई-वे बिल: लॉन्च डे पर 1.71 लाख बिल हुए जेनरेट, अब तक 11 लाख टैक्सपेयर्स रजिस्टर्ड

नई दिल्ली। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तहत शुरू की गई ई-वे बिल सिस्टम के तहत पहले ही दिन 1.71 लाख बिल जेनरेट हुआ है। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने इस बात की जानकारी दी है। 

वहीं, अब तक सिस्टम में करीब 11 लाख टैक्सपेयर्स रजिस्टर्ड हो चुके हैं। ई-वे बिल सिस्टम रविवार से देशभर में सफलता पूर्वक लागू हो गई है। कर्नाटक को छोड़कर सभी राज्यों ने ई-वे बिल सिस्टम को इंटर स्टेट लागू किया है। ई-वे बिल पूरी तरह से ऑनलाइन सिस्टम होगा।


GSTN ऑफिशियल की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। बता दें कि फिलहाल ई-वे बिल प्रणाली को 50000 रुपए से अधिक के सामान को सड़क, रेल, वायु या जलमार्ग से एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने पर लागू किया गया है। सरकार का दावा है कि देश में गुड्स का मूवमेंट बेहद आसान हो जाएगा। साथ ही चुंगी नाकाओं पर ट्रकों और गुड्स कैरियर व्हीकल की लाइन भी खत्म होगी। 

 

 

सिर्फ कर्नाटक ने लागू किया इंट्रा-स्‍टेट
ऑफिशियल ने बताया कि सभी राज्यों ने ई-वे बिल सिस्टम को इंटर स्टेट लागू किया है। सिर्फ कर्नाटक ऐसा राज्य है, जिसने मूविंग गुड्स पर ई-वे बिल सिस्टम को इंट्रा स्टेट लागू किया है। कर्नाटक ई-वे बिल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पिछले साल सितंबर से ही कर रहा है। 

 

सवालों के जवाब देने के लिए हेल्प डेस्क 
जीएसटीएन ऑफिशियल के अनुसार टैक्सपेयर्स और ट्रांसपोर्टर्स के किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए जीएसटी का सेंट्रल हेल्पडेस्क बनाया गया है। हेल्प डेस्क पर 100 एजेंट का स्पेशल अरेंजमेंट किया गया है जो ई-वे बिल से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब देंगे। उन्होंने बताया कि ई-वे बिल को कई तरह से जेनरेट किया जा सकता है। मसलन ऑनलाइन, एंड्रॉएड ऐप, SMS, बल्क अपलोड टूल का इस्तेमाल कर और एपीआई बेस्ड साइट टु साइट इंटीग्रेशन से। 

 

24 घंटे में कैंसिलेशन का भी प्रावधान
ई-वे बिल सिस्टम के तहत यह भी प्रावधान है कि ई-वे बिल को 24 घंटे के अंदर कैंसल करा सकते हैं। कैंसल वहीं शख्‍स करा सकता है, जिसने इसे जेनरेट किया हो। उसी तरह से रेसिपेंट भी किसी गलती के पाए जाने पर 72 घंटे के अंदर या ई-वे बिल की वैलिडिटी पीरियड के अंदर इसे रिजेक्ट कर सकता है।  

 

कारोबारियों को इन दो बातों का डर 

 

1 अप्रैल से शुरू हुए इस नए सिस्टम को लेकर कारोबारियों में आशंका भी है। उसकी दो प्रमुख वजहें है, पहला यह कि ई-वे बिल इससे पहले 1फरवरी 2018 में भी लागू किया गया था। लेकिन ऑनलाइन नेटवर्क सिस्टम कुछ ही घंटों में फेल हो गया। जिसकी वजह से सरकार ने इसे अनिश्चित समय के लिए टाल दिया था। 


दूसरी प्रमुख वजह यह है कि ई-वे बिल अभी भी पूरी तरह से लागू नहीं किया जा रहा है। ई-वे बिल का अहम हिस्सा इंट्रा-स्टेट बिल 15 अप्रैल से तीन राज्यों में ही केवल शुरू होगा। जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके लागू किया जाएगा। सरकार के लिए एक चिंता की यह भी बात है कि ई-वे बिल के तहत जीएसटी में रजिस्टर्ड कुल कारोबारियों में से केवल 10 फीसदी ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। पुराने अनुभव को देखते हुए कारोबारियों ने 31 मार्च तक ही एडवांस में गुड्स का ट्रांसपोर्ट अगले 4-6 हफ्तों के लिए कर दिया है।

 

 

पहले दिन कोई समस्‍या नहीं आई

IFTRT के एसपी सिंह का कहना है कि ई-वे बिल लागू होने के पहले दिन अवकाश का दिन था। इसके चलते डिस्‍पैच काफी कम था। इसके अलावा कई शहरों में गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंट का कारोबार भी आज बंद था। इसके चलते पहले दिन इस सिस्‍टम का सही फीडबैक नहीं मिल सका है। लेकिन पहले दिन कोई परेशानी की बात सामने नहीं आई है।

 

 

 

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