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इनसॉल्वेंसी प्रॉसेस से गुजर रही कंपनियों को राहत, CBDT ने लचीले किए MAT के नॉर्म्स

नई दिल्ली. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स का सामना कर रही कंपनियों को मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) पर राहत दी है। डिपार्टमेंट ने शनिवार को ऐसी कंपनियों के लिए एमएटी के नॉर्म्स को लचीला कर दिया है।

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115जेबी के तहत पिछले घाटे को घटाने के बाद प्रॉफिट या मूल्यह्रास जो भी कम हो, पर एमएटी लगाया जाता है।

 

एमएटी पर लचीले किए नॉर्म

डिपार्टमेंट ने कहा, 'ऐसी कंपनी जिसके खिलाफ आईबीसी के अंतर्गत कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्युशन प्रोसेस की एप्लीकेशन स्वीकार कर ली गई है, वह एसेसमेंट ईयर 2018-19 (वित्त वर्ष 2017-18) से एक्ट के सेक्शन 115जेबी के अंतर्गत एमएटी लगाने के उद्देश्य से प्रॉफिट बुक करने के लिए कुल लॉस (मूल्यह्रास सहित) को आगे फॉरवर्ड करने की मंजूरी होगी।'

 

 

कंपनियों की दिक्कतें होंगी कम

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) ने कहा कि ऐसी कंपनियों के सामने आने वाली वास्तविक दिक्कतों को न्यूनतम करने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है।

डिफॉल्ट करने वाली ऐसी कंपनियों के लेंडर्स ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोडके अंतर्गत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल से संपर्क किया है।

 

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