​देश के सिर्फ दो राज्यों से आता है 50 फीसदी डायरेक्ट टैक्स

इनकम टैक्स विभाग के आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार को मिलने वाले कुल डायरेक्ट टैक्स में 50 फीसदी हिस्सेदारी महाराष्ट्र व दिल्ली की है। महाराष्ट्र व दिल्ली के साथ कर्नाटक व तमिलनाडु की हिस्सेदारी को जोड़ दिया जाए तो यह 70 फीसदी हो जाती है। देश में 30 राज्य हैं और छह केंद्र शासित प्रदेश। मतलब बचे हुए 30 फीसदी डायरेक्ट टैक्स देश के 32 प्रदेशों से मिलते हैं। गुजरात जिसे कारोबारी राज्य के रूप में देखा जाता है, डायरेक्ट टैक्स देने में काफी पीछे है।

money bhaskar

Aug 28,2018 09:31:00 AM IST

मनी भास्कर नई दिल्ली।

इनकम टैक्स विभाग के आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार को मिलने वाले कुल डायरेक्ट टैक्स में 50 फीसदी हिस्सेदारी महाराष्ट्र व दिल्ली की है। महाराष्ट्र व दिल्ली के साथ कर्नाटक व तमिलनाडु की हिस्सेदारी को जोड़ दिया जाए तो यह 70 फीसदी हो जाती है। देश में 30 राज्य हैं और छह केंद्र शासित प्रदेश। मतलब बचे हुए 30 फीसदी डायरेक्ट टैक्स देश के 32 प्रदेशों से मिलते हैं। गुजरात जिसे कारोबारी राज्य के रूप में देखा जाता है, डायरेक्ट टैक्स देने में काफी पीछे है।

314056 करोड़ रुपये का कलेक्शन महाराष्ट्र से

इनकम टैक्स के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 में केंद्र सरकार को डायरेक्ट टैक्स के रूप में कुल 849818.48 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इनमें से सबसे अधिक 314056 करोड़ रुपये महाराष्ट्र से मिले। दिल्ली से डायरेक्ट टैक्स के रूप में सरकार को 108882.50 करोड़ रुपये मिले। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में कर्नाटक का योगदान 85920.98 करोड़ रुपये का रहा तो तमिलनाडु ने 60077.95 करोड़ रुपये दिए। गुजरात जो अपने कारोबार के लिए मशहूर है, वहां से वित्त वर्ष 2016-17 में डायरेक्ट टैक्स के रूप में केंद्र सरकार को 38808.27 करोड़ रुपये मिले। पश्चिम बंगाल से 35175.89 करोड़ रुपये मिले। मध्य प्रदेश से मात्र 15768 करोड़ रुपये डायरेक्ट टैक्स के रूप में मिले। जनसंख्या के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से सिर्फ 29309.60 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। बिहार से डायरेक्ट टैक्स के रूप में मात्र 6519.42 करोड़ रुपये मिले।

लगातार बढ़ रहे है डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन

इनकम टैक्स विभाग के आंकड़ों के मुताबिक डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन लगातार बढ़ रहे हैं। वित्त वर्ष 2014-15 में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 695788.8 करोड़ रुपये रहे। वित्त वर्ष 2015-16 में यह कलेक्शन बढ़कर 741722.60 करोड़ रुपये हो गए। वित्त वर्ष 2016-17 में यह कलेक्शन 849818.48 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया।

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