70 सालों में लोगों की नहीं बढ़ी उतनी आमदनी, जितना देश में बढ़ गया प्रत्याशी का चुनावी खर्च

Election Expense 2019: दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं है। देश में चुनाव आयोग के कंधों पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने की जिम्मेदारी होती है।

Money Bhaskar

Apr 11,2019 03:24:00 PM IST

नई दिल्ली. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं है। देश में चुनाव आयोग के कंधों पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में चुनाव आयोग प्रत्याशी के खर्च की लिमिट तय कर देता है, जिससे पैसों के दम पर चुनाव न जीते जा सकें।

70 सालों में 300 गुना बढ़ा चुनावी खर्च

चुनाव आयोग की ओर से इस बार चुनाव आयोग ने 70 लाख रुपए की सीमा तय की थी। वैसे तो एक प्रत्याशी की ओर से चुनाव में करोड़ों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं। लेकिन अगर तय लिमिट के आधार पर गणना करें, तो भारत में चुनाव खर्च में पिछले 70 सालों में 300 गुना की बढ़ोत्तरी हो गई। जबकि इसी 70 सालों में लोगों की आमदनी महज 200 फीसदी बढ़ी है।


ऐसे बढ़ता गया चुनावी खर्च

देश में मौजूदा 2019 के लोकसभा चुनावों में उम्मीदवारों को 70 लाख रुपये खर्च करने की अनुमति है। लेकिन, 1951-1952 में देश में हुए पहले लोकसभी चुनावों में ज्यादा से ज्यादा एक उम्मीदवार सिर्फ 25,000 रुपये ही खर्च कर सकता था। 1951-1952 में हुए पहले लोकसभा चुनावों में बड़े राज्यों में प्रति उम्मीदवार खर्च करने की सीमा सिर्फ 25,000 रुपये थी, जो अब बढ़कर 70 लाख रुपए हो गई है। वहीं, 1951-1952 के चुनावों में छोटे प्रदेशों में प्रति उम्मीदवार खर्च की सीमा 10,000 रुपये थी, जो आज 54 लाख रुपए है।

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