GST में कहीं आप ने तो नहीं की ये गलती, हो सकती है 5 साल की जेल

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नई इन डायरेक्‍ट टैक्‍स प्रणाली (जीससटी) के तहत जुलाई-दिसंबर क्‍वार्टर के लिए फाइल किए गए रिटर्न में सिर्फ 16 प्रतिशत रिटर्न ही सही पाया गया है। बाकी 84 फीसदी मामलों में रिटर्न का मिलान नहीं हो पाया है। राजस्व विभाग ने इस मामले का विश्लेषण शुरू कर दिया है। विभाग को इस मामले में टैक्स चोरी की आशंका है। अगर टैक्‍स चोरी साबित होती है 5 साल के लिए जेल जाना पड़ सकता है। अगर आप भी ये गलती कर रहे हैं तो सतर्क हो जाएं।

Money bhaskar

Mar 19,2018 03:18:00 PM IST

नई दिल्‍ली। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नई इन डायरेक्‍ट टैक्‍स प्रणाली (जीससटी) के तहत जुलाई-दिसंबर क्‍वार्टर के लिए फाइल किए गए रिटर्न में सिर्फ 16 प्रतिशत रिटर्न ही सही पाया गया है। बाकी 84 फीसदी मामलों में रिटर्न का मिलान नहीं हो पाया है। राजस्व विभाग ने इस मामले का विश्लेषण शुरू कर दिया है। विभाग को इस मामले में टैक्स चोरी की आशंका है। अगर टैक्‍स चोरी साबित होती है 5 साल के लिए जेल जाना पड़ सकता है। अगर आप भी ये गलती कर रहे हैं तो सतर्क हो जाएं।

टैक्स चोरी की आशंका
जीससटी रिटर्न के डाटा के अनुसार 34 प्रतिशत कारोबारियों ने 34,000 करोड़ रुपए कम टैक्स दिया है। ये आंकड़े जुलाई से दिसम्बर 2017 के बीच के हैं। इन 34 प्रतिशत कारोबारियों ने 8.16 लाख करोड़ रुपए टैक्स दिया है, लेकिन इनके डाटा के अनुसार इन पर 8.50 लाख करोड़ रुपए की टैक्स की लॉयबिल्टी बनती है। राजस्व विभाग के अनुसार जीएसटी के तहत फाइल रिटर्न में से केवल 16.36 प्रतिशत ही ऐसे हैं, जिनका जीएसटीआर 3 से पूरी तरह से मिलान हो गया है। ऐसे कारोबारियों से सरकार को 22,014 करोड़ रुपए का टैक्स मिला है।

इसलिए उठे सवाल बता दें कि जीएसटीआर-1 को सप्लायर भरते हैं, जबकि जीएसटीआर-2 पर्चेजर या जिसने सप्लायर से माल खरीदा है वह भरता है। जीएसटीआर-3 दिनों को भरना पड़ता है। इससे माल खरीदने वाले और माल बेचने वाले दोनों का डाटा मिल जाता है। और पता चल जाता है कि सप्लायर ने जिसे माल बेचा वास्तव में उसी ने माल खरीदा है कि नहीं। क्योंकि परचेजर उसी माल की जानकारी रिटर्न में भरता है, जो वह परचेजर से खरीदता है। जीएसटीआर-3 में जानाकरी मिली तो रिटर्न कम्प्लीट माना जाता है। नहीं मिलने पर धांधली की आशंका रहती है। जीएसटीआर-3 का मिलान नहीं होने के चलते ही अधिकारी धांधली की आशंका जता रहे हैं।राजस्व विभाग ने शुरू किया विश्लेषण राजस्व विभाग ने जीएसटी के तहत जुलाई से अगस्त के बीच रिटर्न में से 51.96 लाख का विश्लेषण शुरू कर दिया है। देश में जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। वित्त मंत्री अरुण जेतली ने राज्यों को 10 मार्च को सलाह दी है कि टैक्स के इस अंतर का वह भी विश्लेषण करें।हो सकती है 5 साल की जेल बता दें कि जीएसटी कानून के मुताबिक, गलत फॉर्म भरना अपराध है। जीएसटी कानून के मुताबिक अगर आप फ्रॉड या टैक्स चोरी करते हैं तो आपको सजा मिलेगी। अगर आप एन्वाइस में छेड़छाड़ करते हैं, टैक्स ऑफिशियल्स को गलत जानकारी देते हैं, टैक्स भरने में गड़बड़ी करते हैं, सप्लाई या ट्रांसपोर्ट के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाते हैं तो भी आपको जेल जाना पड़ सकता है। जीएसटी मॉडल ड्राफ्ट में मिनिमम 10 हजार रुपए की पेनाल्टी से लेकर 5 साल जेल तक की सजा का प्रोविजन है। हालांकि जेल की सजा मुकदमा चलाए जाने के बाद ही हो सकती है।
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