Home » Economy » Taxationइनकम टैक्‍स पर आते हैं 5 तरह के नोटिस, हर कोई नहीं होता खतरे की घंटी

इनकम टैक्‍स विभाग भेजता है 5 तरह के नोटिस, हर बार नहीं होती खतरे की घंटी

जिन लोगों ने इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल नहीं किया गया होगा, उन तक कभी भी नोटिस पहुंच सकता है।

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नई दिल्‍ली. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्‍ट टैक्‍सेज (CBDT) ने इनकम टैक्‍स से संबंधित नोटिस भेजे जाने के लिए 31 मई को आखिरी तारीख तय किया था। अब यह समय सीमा खत्‍म हो चुकी है। ऐसे में जिन लोगों ने इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल नहीं किया गया होगा, उन तक कभी भी नोटिस पहुंच सकता है। लेकिन जरूरी नहीं है कि इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट की तरफ से जो भी नोटिस भेजा जाए वह खतरे की घंटी ही हो। कुछ नोटिस ऐसे भी हैं जो रिटर्न फाइल करने वालों के पास भी आते हैं। लेकिन इन्‍हें लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं होती। आइए आपको बताते हैं ऐसे ही 5 तरह के टैक्‍स नोटिस के बारे में- 

 

1. रुटीन नोटिस

जब आप इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करते हैं तो इनकम टैक्‍स एक्‍ट, 1961 के सेक्‍शन 143 (1) के तहत एक नोटिस भेजा जाता है। कई बार यह नोटिस केवल एक सूचना के तौर पर भेजा जाता है कि आपका रिटर्न सफलतापूर्वक फाइल हो चुका है। इसलिए हर बार जरूरी नहीं है कि इस नोटिस का जवाब दिया जाए। लेकिन कुछ बार इसके जरिए लोगों को रिटर्न फाइलिंग में हुई गलतियों, इनकम के मिसमैच होने आदि के बारे में सूचना दी जाती है। ऐसे मामलों में आपको जवाब देने की जरूरत होती है। 

 

आगे पढ़ें- अन्‍य नोटिसेज के बारे में

2. स्‍क्रूटनी नोटिस 

जब इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट को आपके द्वारा फाइल किए गए रिटर्न के असेसमेंट को लेकर किसी तरह की इनफॉरमेशन या क्‍लैरीफिकेशन की जरूरत होती है तो आपके पास वेरिफिकेशन के लिए एक नोटिस आता है। इसे स्‍क्रूटनी नोटिस कहते हैं। अगर नोटिस असेसमेंट या रीअसेसमेंट के लिए है तो ऐसे में आपसे किसी ट्रान्‍जैक्‍शन, असेट या इनकम को लेकर जानकारी मांगी जाती है। आपको बस उसी को देना होता है।

 

आगे पढ़ें- टैक्‍स नोटिस का एक और टाइप

3. कारण बताओ नोटिस

जब डिपार्टमेंट को लगता है कि आपने अपनी इनकम को छिपाते हुए कम टैक्‍स जमा किया है तो फिर आपको कारण बताओ नोटिस भेजा जाता है। ऐसे में आपको पेनल्‍टी भरने को भी कहा जाता है। 

 

आगे पढ़ें- एक अन्‍य तरह का टैक्‍स नोटिस 

4. प्रोसिक्‍यूशन नोटिस

अगर आप टैक्‍स नोटिस मिलने के बाद भी इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो डिपार्टमेंट आपको इनकम टैक्‍स एक्‍ट, 1961 के सेक्‍शन 143 (2) के तहत एक अन्‍य नोटिस भेज सकता है। इसे प्रोसिक्‍यूशन नोटिस कहते हैं। इसके अलावा कम टैक्‍स भरने पर भी यह नोटिस भेजा जा सकता है। 

 

आगे पढ़ें- पांचवां टाइप

5. देश से बाहर के एसेट या इनकम पर नोटिस

देश में काले धन और बेनामी प्रॉपर्टी पर लगाम लगाने के लिए काफी कोशिशें की जा रही हैं। इसी के तहत इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट विदेश में मौजूद संपत्ति की भी डिटेल्‍स मांगता है। इसके लिए भी एक नोटिस होता है। इसके अलावा देश से बाहर इनकम के सोर्स को लेकर डॉक्‍यूमेंटरी एविडेंस की मांग भी की जा सकती है। 

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