आजादी के बाद से अब तक ऐसे महंगा होता गया चुनाव, इस साल लड़ा गया सबसे सस्ता चुनाव

Election 2019: भारत में चुनावी खर्च साल दर साल बढ़ता गया। चुनाव आयोग की ओर से हर एक प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के लिए एक निश्चित रकम तय की गई। इसके बावजूद चुनावों में होने वाला खर्च बढ़ता रहा।

Money Bhaskar

Apr 11,2019 03:50:00 PM IST

नई दिल्ली. भारत में चुनावी खर्च साल दर साल बढ़ता गया। चुनाव आयोग की ओर से हर एक प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के लिए एक निश्चित रकम तय की गई। इसके बावजूद चुनावों में होने वाला खर्च बढ़ता रहा। आंकड़ों पर गौर करें, तो साल 2014 का लोकसभा चुनाव सबसे ज्यादा खर्चीला था। इस चुनाव में करीब 3870 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जबकि साल 1957 का चुनाव सबसे सस्ता रहा।


इसके अलावा साल 1957 लोकसभा का पहला ऐसा चुनाव रहा, जिसके चुनावी खर्च में पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले कमी आई हो। 1957 के आम चुनाव में 5.9 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। जबकि पहले लोकसभा चुनाव 1952 में 10.45 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इसके बाद होने वाले आम चुनावों में चुनावी खर्च की राशि बढ़ती गई। साल 2014 का लोकसभा चुनाव अब तक का सबसे महंगा चुनाव रहा। इस चुनाव में करीब 3870 करोड़ रुपए खर्च हुए। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ते प्रचार को देखते हुए इस बार उम्मीदवार ज्यादा खर्च करेंगे। हालांकि चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों से सोशल मीडिया पर विज्ञापन पर होने वाले खर्च का भी ब्योरा देने की मांग की है।

ऐसे बढ़ा चुनावी खर्च 

1951-52 - 10.45 करोड़ रुपए
1957 - 5.9 करोड़ रुपए
1962 -7.32 करोड़ रुपए
1967 - 10.62 करोड़ रुपए
1971 - 11.62 करोड़ रुपए
1977 - 23.04 करोड़ रुपए
1980 - 54.77 करोड़ रुपए
1984 - 81.51 करोड़ रुपए
1989 - 154.22 करोड़ रुपए
1991 - 359 करोड़ रुपए
1996 - 597.34 करोड़ रुपए
1998 - 666.22 करोड़ रुपए
1999 - 947.68 करोड़ रुपए
2004 - 1016.09 करोड़ रुपए
2009 - 1114.38 करोड़ रुपए
2014 - 3870 करोड़ रुपए 

 

 

इस बार 70 लाख रुपए रखी गई चुनावी खर्च लिमिट

इस बार लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी 50 लाख रुपए से 70 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम को छोड़कर अन्य राज्यों के उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार के दौरान 70 लाख रुपए तक खर्च कर सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम के लिए 54 लाख रुपए और दिल्ली के लिए 70 लाख एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 54 लाख रुपए निर्धारित की गई है। जबकि विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी 20 लाख से लेकर 28 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं। 

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