Home » Economy » TaxationHC rejects plea of firm linked to Vadra against IT reassessment notice

35 करोड़ की एक चूक से फंसी वाड्रा की कंपनी, इन 2 डील ने खोली पोल

रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को कहीं से राहत नहीं मि‍ल रही है।

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नई दि‍ल्‍ली। रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को कहीं से राहत नहीं मि‍ल रही है। आईटी डि‍पार्टमेंट ने उसकी कंपनी पर शि‍कंजा कस दि‍या है और अब कंपनी को पेश होकर पाई पाई का हि‍साब देना होगा। इनकम टैक्‍स्‍ा डि‍पार्टमेंट ने स्‍काई लाइट हॉस्‍पि‍टेलि‍टी को नोटि‍स भेजकर हि‍साब कि‍ताब के साथ पेश होने को कहा था, मगर कंपनी ने पेश होने की बजाए हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। अदालत में इनकम टैक्‍स डि‍पार्टमेंट ने ऐसी दलीलें और दस्‍तावेज पेश कि‍ए कि‍ कोर्ट ने कंपनी को कोई राहत नहीं दी। 


दरअसल आईटी डि‍पार्टमेंट की नजर दो खास डील पर है जो स्‍काई लाइट हॉस्‍पि‍टेलि‍टी कंपनी ने वर्ष 2010-11 में की । वि‍भाग को शक है कि‍ इससे मि‍लने वाले प्रॉफि‍ट का गोलमाल कि‍या गया है। वैसे तो कंपनी ने हाईकोर्ट में इनकम टैक्‍स डि‍पार्टमेंट के खि‍लाफ काफी दलीलें रखीं मगर डि‍पार्टमेंट भी ऐसी तैयारी करके आया था कोर्ट ने कंपनी की एक नहीं सुनी। इस कंपनी में सोनि‍या गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पार्टनर हैं।  आगे पढ़ें इन दो डील पर है नजर 

इन दो डील पर है नजर 


आयकर वि‍भाग ने दि‍ल्‍ली की हॉस्‍पि‍टेलि‍टी फर्म स्‍काई लाइट हॉस्‍पि‍टेलि‍टी को वर्ष 2010-11 में की गई दो डील में हुए प्रॉफि‍ट के री अससमेंट के लि‍ए नोटि‍स जारी कि‍या था। जमीन से जुड़ी इनमें से एक डील हरि‍याणा और दूसरी राजस्‍थान में हुई थी। हाईकोर्ट में आईटी डि‍पार्टमेंट ने कहा कि उनके पास यह बात मानने की पुख्‍ता वजह हैं कि कंपनी ने 2010-11 में जो 35 करोड़ रुपए कमाए वो इनकम असेसमेंट में शामि‍ल नहीं हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वजह की जानकारी हासि‍ल होने के बाद हम इनकम टैक्‍स डि‍पार्टमेंट की दलील को लेकर संतुष्‍ट हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने कंपनी की अपील रद्द कर दी। यही नहीं अदालत ने कंपनी को नि‍र्देश दि‍या है कि वह वि‍भाग की कार्यवाही में शामि‍ल होने के लि‍ए 19 फरवरी को पेश हो।  आगे पढ़ें कोर्ट ने कंपनी को ऐसे दि‍या जवाब 

हाईकोर्ट ने कहा, सबूत काफी हैं 


अदालत में कंपनी ने कहा कि इनकम टैक्‍स डि‍पार्टमेंट को बस ऐसा लगता है, लेकि‍न इससे यह साबि‍त नहीं हो जाता है कि सच में वह आय असेसमेंट के दायरे से बाहर रह गई थी। मगर हाईकोर्ट ने कहा कि यहां जो सबूत हैं वो नोटि‍स को वाजि‍ब ठहराते हैं। इसके अलावा अगर अधि‍कारी को ईमानदारी  और समझदारी से ऐसा लगता है कि कुछ गड़बड़ हुई है तो कोर्ट को इस तरह के मामलों में हस्‍तक्षेप नहीं करना चाहि‍ए। 

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