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कस्‍टम ड्यूटी की चोरी के मामले में भी फंसे नीरव मोदी, Email पर जारी हुआ अरेस्‍ट वारंट

रेवेन्‍यु इंटेलीजेंस एजेंसी DRI ने वारंट ईमेल के जरिए नीरव मोदी को भेजा है।

DRI serves arrest warrant to Nirav Modi via email

नई दिल्‍ली. 13,000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा के PNB घोटाले के मुख्‍य आरोपी डायमंड व्‍यवसायी नीरव मोदी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कस्‍टम ड्यूटी की चोरी के एक मामले में सूरत की कोर्ट ने नीरव मोदी के खिलाफ अरेस्‍ट वारंट जारी किया है। रेवेन्‍यु इंटेलीजेंस एजेंसी DRI ने इसे ईमेल के जरिए नीरव मोदी को भेजा है। 

 

DRI ने मार्च में नीरव मोदी और उनकी तीन फर्मों फायरस्‍टार इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (FIPL), फायरस्‍टार डायमंड इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (FDIPL) और रैडेशिर ज्‍वैलरी को प्राइवेट लिमिटेड (RJCPL) के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। ये फर्म सूरत की स्‍पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) में हैं। DRI का आरोप है कि नियमों में उल्लिखित उद्देश्‍यों से अलग कामों के लिए ड्यूटी फ्री इंपोर्टेड सामान का इस्‍तेमाल किया गया। 

 

क्‍या है मामला 

नियमों के मुताबिक, सेज में स्थित यूनिट्स द्वारा सामानों के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट को केवल तभी मंजूरी मिलती है, जब उनका इस्‍तेमाल कच्‍चे माल के तौर पर किया जाए और वैल्‍यु एडिशन या प्रोसेसिंग के बाद उनका एक्‍सपोर्ट किया जाए। अधिकारियों के मुताबिक, नीरव मोदी के मामले में पाया गया कि 890 करोड़ रुपए के महंगे हीरे और मोती, जिन पर 52 करोड़ कस्‍टम ड्यूटी बनती है को गलत तरीके से सेज यूनिट्स द्वारा मंगाया गया और उन्‍हें मार्केट में बेचा गया। इंपोर्ट ड्यूटी से बचने के लिए नीरव मोदी ने खराब गुणवत्‍ता वाले हीरे-मोती एक्‍सपोर्ट किए और दावा किया कि इन्‍हें पहले इंपोर्ट किया गया और फिर इनकी प्रोसेसिंग की गई।  

 

पहले भेजे गए थे समन

DRI का दावा है कि इस मामले में नीरव मोदी और उनकी फर्मों के खिलाफ उसके पास सभी जरूरी डिटेल्‍स, डॉक्‍युमेंट्स और सबूत हैं। इस मामले में मुकदमा दायर होने के बाद सूरत के चीफ ज्‍यूडिशियल मजिस्‍ट्रेट की कोर्ट ने नीरव मोदी के खिलाफ समन जारी किए थे लेकिन तय तारीखों पर कोर्ट में न ही खुद नीरव मोदी और न ही उनका कोई प्रतिनिधि पेश हुआ। उसके बाद कोर्ट ने अरेस्‍ट वारंट जारी किया है।

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