आयकर विभाग ने किया 20 हजार करोड़ रु. के हवाला रैकेट का पर्दाफाश, ऐसे फंसाता था बड़ी कंपनियों को अपने जाल में

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सोमवार को हवाला कारोबार के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरोह दिल्ली में 20 हजार करोड़ रुपए का मनी लांड्रिंग रैकेट चला रहा था।

Money Bhaskar

Feb 12,2019 10:34:00 AM IST

नई दिल्ली। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सोमवार को हवाला कारोबार के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरोह दिल्ली में 20 हजार करोड़ रुपए का मनी लांड्रिंग रैकेट चला रहा था। पुरानी दिल्ली के विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान आईटी डिपार्टमेंट की दिल्ली इकाई ने कई छापेमारी में इसका पता लगाया।

18 हजार करोड़ रुपए के फर्जी बिल मिले

इन छापेमारी से हवाला कारोबार के तीन समूहों द्वारा अवैध वित्तीय गतिविधियों में लिप्त होने का पता चला। अधिकारी ने कहा कि नया बाजार इलाके में एक ऐसा ही सर्वे किया गया जिसमें करीब 18 हजार करोड़ रुपए के फर्जी बिल मिले। समूह ने फर्जी बिल उपलब्ध कराने के लिये कई फर्जी इकाइयां बनाई हुईं थीं। इतना ही नहीं जांच में लोगों को विदेश यात्रा कराने और विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराने के भी सबूत मिले हैं। हालांकि, विभाग ने आरोपियों की पहचान का खुलासा नहीं किया।

ये लोग बड़ी कंपनियों के शेयरों को धोखाधड़ी से बेच रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग बड़ी कंपनियों के शेयरों को धोखाधड़ी के जरिए वर्षों से रखे गए पुराने शेयर बताकर बेच रहे थे। उन्होंने कहा कि इस तरीके से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स का फर्जी दावा कर पैसे कमाए जा रहे थे। 

अधिकारियों का अनुमान है कि इस तरीके से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला किया गया। अधिकारी ने कहा, 'यह छोटा हिस्सा भर है। धोखाधड़ी का यह तरीका कई साल से इस्तेमाल किया जा रहा था।' विभाग को इसी तरह एक अन्य समूह का भी पता चला जिनके पास अघोषित विदेशी बैंक खाता पाया गया। यह समूह निर्यात का कीमत से अधिक बिल बनाकर जीएसटी के तहत फर्जी दावा भी करते थे।

ये फर्जी निर्यात 1,500 करोड़ रुपए से अधिक के हैं


उन्होंने कहा, 'शुरुआती अनुमान के अनुसार ये फर्जी निर्यात 1,500 करोड़ रुपए से अधिक के हैं।' छापेमारी करने वाले दल को करीब 100 करोड़ रुपए के हस्ताक्षर किए गए और बगैर हस्ताक्षर के दस्तावेज, समझौते, अनुबंध, नकदी कर्ज और उसपर अर्जित ब्याज, वित्तीय विवादों का नकद के बदले निस्तारण और इनके एवज में पैसे लेने की रसीदें आदि मिलीं हैं।
अधिकारी ने कहा, 'तीसरे मामले की जांच में विदेश में लोगों को विदेशी यात्रा कराने और विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराने के भी सबूत मिले हैं।' उसने कहा कि इन मामलों में कर चोरी की कुल राशि करीब 20 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

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