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EPFO में लावारिस पड़े हैं 40.8 हजार करोड़ रुपए, नहीं है कोई दावेदार

हाई कोर्ट ने EPFO को एक नोटिस जारी कर इस मामले में 1 फरवरी तक जवाब देने के लिए कहा था

40k crore unclaimed amount lying with PF office

नई दिल्ली। हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने बताया है प्रोविडेंट फंड ऑफिस के खातों में करीब 40.8 हजार करोड़ रुपए पड़े हुए हैं। यह खाते निष्क्रिय हैं और खातों में पड़ी इस राशि का कोई हकदार नहीं है और साल 2017 से यह राशि इन खातों में पड़ी हुई है। बेंच ने यह भी बताया कि इस राशि का लाभ पीएफ ऑफिस को भी हो रहा है। पीएफ ऑफिस को इस राशि से हर महीने  4 हजार करोड़ रुपए का लाभ पहुंचता है। इस बात की जानकारी एमिकस क्यूरीए अतुल पाठक ने दी। अतुल पाठक ने हाल ही में एक पीआईएल डाली है जिसमें उन्होंने लेबर मिनिस्ट्री से निष्क्रिय खातों में सालों से पड़े पीएफ राशि को लेकर  गाइडलाइंस तैयार करने की मांग की है। इस मामले से जुड़ी अंतिम सुनवाई में, जस्टिस रवि देशपांडे और विनय जोशी की डिविजन बेंच ने केंद्र मंत्रालय और सहायक आयोग के साथ ईपीएफओ को एक नोटिस जारी कर इस मामले में 1 फरवरी तक जवाब देने के लिए कहा था। 

 

हाईकोर्ट ने 8 हफ्तों के लिए टाल दी थी सुवनाई
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने ईपीएफओ के शहर कार्यालय के साथ काम करने वाले असिस्टेंट कमीशनर देवेंद्र सोंटाके को भी इस सुनवाई में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन वह किसी कारणवश सुनवाई में शामिल नहीं हो पाए। बीते सोमवार, देवेंद्र सोंटाके हाई कोर्ट के सामने पेश हुए और नोटिस का जवाब ना दे पाने के लिए उन्होंने माफी मांगी। सोंटाके ने कोर्ट को बताया कि उन्हें नोटिस 24 जनवरी को मिला था जिसके बाद उन्होंने एसडी सिरपुरकर पैरवी करने के लिए वकील के तौर पर रखा।  हालांकि, जब पिछली बार पीआईएल सूचीबद्ध की गई थी उस समय सिरपुरकर का नाम दैनिक कारण सूची में शामिल नहीं था। जिसके कारण ना तो देवेंद्र सोंटाके  और ना ही उनके वकील सुनवाई के लिए पहुंच पाए। जिसके चलते उचित जवाब दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट ने सुनवाई को 8 हफ्तों के लिए टाल दिया।

 

एमिकस ने श्रम और रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय की रिपोर्ट का हवाला दिया
इससे पहले, एमिकस ने राज्य के श्रम और रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पीएफ ऑफिस में पड़े 40.8 हजार करोड़ की राशि के बारे में कहा था। उन्होंने तर्क दिया कि नियोक्ता ब्याज के साथ अपनी राशि की वापसी के लिए हकदार है, क्योंकि इस राशि को लाभार्थियों की जानकारी के बिना एकत्र किया गया है। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बड़ी राशि को कोई क्लेम करने वाला नहीं है। इस राशि का फायदा जिसे मिलने वाला है उसे पता भी नहीं है कि उसकी तरफ से रेस्पॉन्डेंट्स को हिस्सा भेजा जा रहा है। 

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