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व्यापार /आज धनतेरस का दिन भी देश भर के स्वर्ण एवं चांदी के व्यापारियों के लिए बेहद फीका रहा

  • देश भर के व्यापारी दिवाली पर भी कर रहे आर्थिक मंदी का सामना
     

Moneybhaskar.com

Oct 25,2019 05:52:00 PM IST

नई दिल्ली. दिवाली जैसे बड़े त्यौहार की गहमागहमी इस बार देश भर के बाजारों में कहीं भी देखने को नहीं मिल रही है और सभी प्रकार के व्यापार में गहरी मंदी छाई हुई है। आज धनतेरस के त्योहारी दिन व्यापारियों खास तौर पर सोना चांदी, बर्तन, किचन इक्विपमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स के व्यापारियों को आज व्यापार में खासी बढ़ोतरी की सम्भावना थी लेकिन देश भर में व्यापार आज भी बेहद सुस्त रहा और ग्राहकों की कमी बेहद दिखाई दी।

लोगों ने खरीदा नाम मात्र का सोना-चांदी

कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की गोल्ड एंड ज्वेलरी कमेटी के चेयरमैन पंकज अरोरा ने आज देश भर के विभिन्न बाजारों के व्यापारियों से बातचीत के आधार पर कहा की पिछले साल के मुकाबले आज सोना चांदी के व्यापार में लगभग 35 से 40 फीसदी के व्यापार की गिरावट दर्ज़ की गई जो बेहद चिंतनीय है। देश भर के सोना-चांदी के बाजारों में ग्राहक बेहद कम रहे और केवल शगुन के रूप में ही लोगों ने नाम मात्र का सोना चांदी खरीदा। आज धनतेरस के दिन जो की सोना चांदी की खरीदी के लिए बेहद शुभ माना जाता है पर भी बेहद मंदी ने देश के सभी बाजारों की कमर तोड़ कर रख दी है।

आयात शुल्क में वृद्धि के बाद से सोने का व्यापार पड़ा ठप्प

पिछले साल सोने के भाव रूपए 32500 प्रति दस ग्राम था जबकि आज सोने का भाव रुपए 39500 प्रति दस ग्राम रहा वहीं चांदी का भाव पिछले वर्ष रुपए 39,000 किलो था जबकि आज चांदी का भाव रुपए 48,000 प्रति किलो रहा। पिछले वर्ष धनतेरस के दिन लगभग 17 हजार किलो के सोने की बिक्री हुई थी जिसकी कीमत लगभग 5,500 करोड़ थी जबकि आज देश भर में लगभग 6 हजार किलो का व्यापार हुआ जिसकी कीमत लगभग 2,500 करोड़ है। सरकार ने चार महीने पहले सोने के आयात शुल्क में वृद्धि की है तबसे देश में सोने का व्यापार पूरी तरह ठप्प है। हर वर्ष लगभग 900 टन सोना इम्पोर्ट होता है जबकि इस साल अभी तक केवल 400 टन सोना ही इम्पोर्ट हुआ है। आयात शुल्क में वृद्धि होने के बाद अवैध व्यापार तेजी से बढ़ा है जिसके कारण ईमानदारी से व्यापार करने वाले व्यापारी बेहद परेशान है।

व्यापारियों में खत्म हो गया दिवाली का उत्साह

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की कमोबेश यही हाल बर्तन, किचन इक्विपमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स के व्यापार में हुआ। इन वस्तुओं में भी पिछले साल के मुकाबले आज लगभग 40 फीसदी व्यापार की गिरावट रही। धनतेरस पर इन वस्तुओं की खरीदी भी बेहद शुभ मानी जाती है और सभी वर्गों के लोग अपनी स्थिति के अनुसार इन वस्तुओं की खरीद धनतेरस पर अवश्य करते हैं लेकिन आज धनतेरस के दिन पूरे देश में इन वस्तुओं की भी कोई खास कारोबारी न होने से दिवाली को उत्साह व्यापारियों में अब लगभग खत्म ही हो गया है। सही अर्थों में इस बार जिस प्रकार से अनैतिक व्यापार का सहारा लेकर ऑनलाइन कंपनियों ने देश के व्यापारियों की कमर तोड़ी है और बाजार में नकद की तरलता बेहद कम है, इसके कारण इस वर्ष व्यापारियों के लिए दिवाली त्यौहार का कोई मतलब ही नहीं रह गया है। भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा की यदि समय रहते सरकार ने देश के रिटेल व्यापार की और ध्यान नहीं दिया और आवश्यक कदम नहीं उठाए तो देश के रिटेल व्यापार बुरी तरह पस्त हो जाएगा जिसका सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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