‘आधार कार्ड’ सरकार के लिए क्‍यों है जरूरी, जानिए क्‍या है विवाद

Economy Team

Oct 09,2015 10:11:00 AM IST
नई दिल्‍ली। सरकार की लाख कोशिश के बावजूद ‘आधार कार्ड’ अधर में लटका हुआ है। बुधवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं के कारण अपने पहले के फैसले को बनाए रखा। इस तरह सरकार और अन्‍य पक्षों को कोई राहत नहीं मिली। और, पहले की तरह आधार कार्ड का उपयोग एलपीजी और पीडीएस तक सिमटकर रह गया और वह भी ऑप्‍शनल। टेलिफोन कनेक्‍शन लेने, बैंक अकाउंट खुलवाने और यहां तक कि मोबाइल सिम कार्ड लेने के लिए भी आधार का उपयोग नहीं किया जा सकता है। सरकार के लिए सुकून की बात सिर्फ इतनी है कि अब बड़ी बेंच इस पर सुनवाई करेगी। लेकिन, इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मोदी सरकार ने बेमन से जिस ‘आधार कार्ड’ को स्‍वीकार किया था, वही अचानक उसके लिए इतना जरूरी क्‍यों हो गया है और आखिर विवाद है कहां?
सरकार के लिए क्‍यों इतना जरूरी है आधार
मोदी सरकार के लिए आधार कार्ड कितना महत्‍वपूर्ण है, इसे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जो कहा, उससे आसानी से समझा जा सकता है। रोहतगी के शब्‍दों में महज एक साल में सरकार ने आधार कार्ड का उपयोग कर 20,000 करोड़ रुपए बचाए हैं। यह कमाई सरकारी वेलफेयर प्रोग्राम का गलत तरीके से लाभ लेने वालों पर रोक लगाने से संभव हुआ है। और, वह भी तब जब देश के सभी लोगों को आधार कार्ड मिलना संभव नहीं हुआ था। रोहतगी ने कहा कि इस कार्ड के उपयोग से 50 करोड़ से अधिक लोगों को सीधे फायदा मिलने जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे टार्गेट ग्रुप तक पहुंचेगा। सरकार ने कोर्ट से साफ कहा कि कुछ लोगों की प्राइवेसी भंग होने की आशंका के कारण 120 करोड़ की आबादी को इस सबसे प्रामाणिक कार्ड के उपयोग से वंचित करना उचित नहीं होगा। रोहतगी ने कोर्ट से यहां तक कहा कि या तो वह खुद आधार की अहमियत को सही तरीके से समझने में असफल रहे, या फिर वह कोर्ट को इसकी अहमियत समझाने में सफल नहीं हो पाए। जिसके कारण कोर्ट ने इसके उपयोग को एलपीजी सब्सिडी और पीडीएस तक सीमित कर दिया। मोदी सरकार हजारों करोड़ रुपए खर्च होने वाली इस आधार योजना के जरिए वेल्‍फेयर योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाना चाहती है। इससे बीच में काम करने वाले तंत्र खत्‍म हो जाएंगे और क्रियान्‍वयन व्‍यवस्‍था चुस्‍त होने के साथ ही उसकी स्‍पीड भी बढ़ेगी। इस तरह‍ स्‍कीम का पूरा लाभ लोगों को मिल पाएगा। सरकारी इसलिए इसकी पुरजोर वकालत कर रही है।
आधार से लोगों को किस तरह होगा फायदा
आधार के दायरे को इस बात से समझा जा सकता है कि इसके सपोर्ट में सरकार के साथ UIDAI, RBI, SEBI, IRDA, TRAI, Pension Fund Regulatory Authority के साथ गुजरात, हिमाचल प्रदेश और झारखंड जैसे राज्‍य भी कोर्ट पहुंचे हुए थे। सभी ने कहा कि कस्‍टमर्स की पहचान करने, लोन देने, इन्‍श्‍योरेंस कवर, बैंक अकाउंट्स खोलने जैसे कार्यों के लिए सिंपल और सिंगल विंडो सिस्‍टम के रूप में आधार उनके लिए बेस्‍ट ऑप्‍शन है। सभी का मानना है कि अगर पूरी आबादी को आधार कार्ड जारी हो जाए तो पीएफ अकाउंट्स, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, कूकिंग गैस, इ‍लेक्ट्रिसिटी अकाउंट्स के साथ क्रेडिट कार्ड आदि के मामले में रीयल टाइम डेटा कलेक्‍ट किया जाना संभव होगा। सभी ने कहा कि वेल्‍फेयर स्‍कीम का फायदा सीधे लोगों तक पहुंचाने के लिए दूसरे सारे ऑप्‍शन जटिल और आधार की तरह प्रामाणिक नहीं हैं। बुधवार को सरकार के चीफ स्‍टैटिसटिसिअन टी सी ए अनंत ने भी कहा कि आधार का उपयोग देशभर के लोगों को जोड़ने के लिए एक कॉमन लिंक के रूप में किया जा सकता है। उनके अनुसार इससे सरकार को जमीनी समझ हासिल करने से लेकर सर्वे करने और डिलिवरी सिस्‍टम को चुस्‍त करने में काफी मदद मिलेगी। अभी तक 92.23 करोड़ लोगों को यह कार्ड जारी किया जा चुका है।
अगली स्‍लाइड में जानें क्‍या है यह बहुचर्चित ‘प्राइवेसी’ का मुद्दा और RBI, SEBI और TRAI आदि क्‍यों कर रहे हैं वकालत...
क्या कहते हैं रेग्युलेटरी संगठन RBI और SEBI जैसे रेग्युलेटरी संगठनों का कहना है कि आधार के उपयोग से ब्लैक मनी को रोकने के साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी रोकने में भी मदद मिल सकती है। उनका यह भी कहना है कि इसके उपयोग से वित्तीय जांच में उन्हें सहयोग मिलेगा और वित्तीय हेराफेरी कम होगी। सेबी ने यह भी कहा कि मार्केट इन्वेस्टर के लिए आधार का उपयोग बाध्यकारी किया जाना चाहिए। वहीं TRAI का कहना है कि आधार के उपयोग से आतंकवादियों समेत संदेहास्पद चरित्र वाले अन्य लोगों को सिम कार्ड जारी नहीं हो, यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। क्या है प्राइवेसी का मुद्दा आधार के विरोध में दलील यह है कि इसमें उपयोग होने वाले फिंगरप्रिंट और आइरिस जैसे बायोमीट्रिक डेटा का गलत उपयोग किया जा सकता है। उनका यह भी कहना है कि यह फुलप्रूफ आइडेंटिफिकेशन मेथड नहीं है। हालांकि, सरकार ने भी एक तरह से यह माना है कि आधार से कुछ लोगों की प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है। लेकिन उसकी दलील थी कि कुछ लोगों की प्राइवेसी के कारण आधार के बड़े फायदे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। प्राइवेसी के मुद्दे को हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस केएस पुट्टास्वामी, सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन और नागरिक चेतना मंच नाम एक एनजीओ ने उठाया है। इनका कहना है कि आधार से प्राइवेसी का हनन होता है और प्राइवेसी किसी की भी हो, उससे समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट इस बात से सहमत थी कि गलत हाथों में पड़ने पर बायोमीट्रिक डेटा का दुरुपयोग किया जा सकता है। इसी कारण उसने अन्य यूज के लिए इसकी स्वीकृति नहीं देने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को भी वोटर्स इलेक्टोरल डेटा को आधार से जोड़ने की अनुमति नहीं दी।
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