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पॉलिसी /उत्तर प्रदेश ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कंपनियों से मांगे आमंत्रण, एक्सप्रेस-वे और नेशनल हाईवे पर लगेंगे चार्जिंग स्टेशन

  • तेल कंपनियों ने अपने पंपों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने शुरू भी कर दिए हैं।
  • राज्य से गुजरने वाले तीन प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग -एनएच -1, 24 और 27- भी इसके लिए निर्धारित किए गए हैं। 

Moneybhaskar.com

Jun 10,2019 10:37:00 AM IST

नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग स्टेशन की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। हाल ही में उत्तरप्रदेश ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए कंपनियों को एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट के लिए आमंत्रित किया है। और यह काम करने वाला उत्तरप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। सरकार ने दिसंबर में चार्जिंग स्टेशन से जुड़े दिशानिर्देश जारी किए थे। इसमें राजमार्गों पर हर 25 किलोमीटर और शहर में हर तीन किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा सब्सिडी दी गई। एनटीपीसी और पावर ग्रिड सरीखी कंपनियों के साथ मिलकर ये चार्जिंग स्टेशन लगाने की तैयारी है। जो भी ये चार्जिंग स्टेशन लगाएगा, तीन साल तक मरम्मत का भी जिम्मा उसे ही निभाना पड़ेगा।

चार्जिंग स्टेशन के लिए उत्तर प्रदेश के 8 राज्यों की पहचान की गई है


दिल्ली अभी तक एकमात्र शहर है जहां इस तरह के चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। केंद्र के दिशा निर्देशों को उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के साथ सुरक्षित, विश्वसनीय, सुलभ और किफायती चार्जिंग बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है। एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट की ओर से 6 जून को जारी किए गए डॉक्यूमेंट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के 8 राज्यों की पहचान की गई है। जिसमें लखनऊ, कानपुर, अगरा, नोएडा, प्रयगराज, गाज़ियाबाद, और मेरठ शामिल हैं। इसके साथ ही इन चार्जिंग स्टेशनों को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, साथ ही लखनऊ से बलिया एक्सप्रेसवे जिसका अभी निर्माण चल रहा है पर भी लगाने के लिए कहा गया है। राज्य से गुजरने वाले तीन प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग -एनएच -1, 24 और 27- भी इसके लिए निर्धारित किए गए हैं।

2030 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार करीब 50 हजार करोड़ रुपये का हो जाएगा


जानकारों के मुताबिक, 2030 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार करीब 50 हजार करोड़ रुपए का हो जाएगा। बिजली कंपनियों के साथ रेलवे अपनी पार्किंग पर चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए जमीन देने की रणनीति बना रहा है। तेल कंपनियों ने तो अपने पंपों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने शुरू भी कर दिए हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी और दूसरी जरूरी चीजों के लेकर सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों अपनी रणनीति में तेजी से बदलाव कर रही हैं। मारुति, महिंद्रा, टाटा और हुंदै जैस कंपनियों का इलेक्ट्रिक वाहन की दिशा में खास फोकस कर रही हैं।

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