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विवाद /कमलनाथ सरकार को झटका, केंद्रीय मंत्री ने अतिरिक्त गेहूं लेने से इंकार किया

Moneybhaskar.com

Jun 07,2019 06:53:00 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि राज्य यदि तय कोटे से ज्यादा गेहूं खरीदते हैं तो वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगी। केंद्र सरकार ने केंद्रीय पूल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश से 67.25 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदने से भी इंकार कर दिया है। यह भी तब जबकि दो दिन पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अतिरिक्त गेहूं खरीदने की मांग रखी थी। किसान कर्जमाफी की वजह से वित्तीय संकट से जूझ रही मप्र सरकार पर अब दोहरा भार पड़ेगा। केंद्र सरकार ने कहा है कि एक राज्य के लिए नियमों में ढील नहीं दी जा सकती।

कमलनाथ सरकार ने मप्र के किसानों से 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। यह तय केंद्रीय कोटे से 14 लाख मीट्रिक टन गेहूं ज्यादा है। यही नहीं, राज्य की गेहूं खरीद 100 लाख टन को पार करने की उम्मीद है। यह गेहूं इसलिए ज्यादा खरीदा गया क्योंकि मप्र सरकार ने किसानों को केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अलावा भी प्रति क्विंटल 160 रुपए को बोनस दिया। बोनस की वजह से किसानों ने मप्र सरकार को ज्यादा गेहूं बेचा। इस अधिशेष गेहूं को राज्य सरकार केंद्र को देना चाहती थी लेकिन अब केंद्र ने मना कर दिया है। यानी सीधा 1500 करोड़ का भार राज्य सरकार पर आएगा। प्रदेश का खजाना पहले से ही खाली है, ऐसे में राज्य सरकार द्वारा यह खर्च उठाना मुश्किल है।

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केंद्र का कोटा 28 लाख टन का फिर भी मप्र से 67.25 टन खरीद रहें हैं

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि नियम के अनुसार हम किसी भी राज्य से 28 लाख टन से अधिक अधिशेष गेहूं नहीं खरीद सकते हैं। फिर भी मध्य प्रदेश को एक रियायत दी गई और एफसीआई ने 67.25 लाख टन की मात्रा खरीदने के लिए कहा है। अब नियमों में और ज्यादा ढील नहीं दी जा सकती है।

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तर्क यह भी


खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब भाजपा शासित छत्तीसगढ़ सरकार ने चावल पर बोनस की घोषणा की थी, तब भी केंद्र ने केवल उबले हुए चावल की आपूर्ति करने के लिए 28 लाख टन अधिशेष अनाज खरीदा था। हालांकि मप्र सरकार का तर्क है कि प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदने से पहले केंद्र से 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने की अनुमति मांगी थी। अब तक मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं को केन्द्र सरकार उठाती रही है। उसमें पीडीएस में बंटने वाले गेहूं की शर्त नहीं थी। जिसके बाद केन्द्र ने मौखिक रूप से राज्य को सहमति देते हुए कहा था, वह किसानों से समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीदें, केन्द्र सरकार पूरा गेहूं उठा लेगा। लोकसभा चुनाव के चलते लिखित में कोई सहमति नहीं दी गई। अब चुनाव होते ही केंद्र सरकार मुकर रही है।

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