विरोध का असर /खूनी संघर्ष के बाद बंद हुआ तूतीकोरिन प्लांट, कंपनी को 1400 करोड़ रुपए का नुकसान 

Moneybhaskar.com

Jun 16,2019 06:03:00 PM IST

नई दिल्ली. पर्यावरण और प्रदूषण के आरोपों की वजह से वेदांता लिमिटेड को खासा नुकसान उठा पड़ा है। कंपनी के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता लिमिटेड ने लगभग 200 मिलियन अमरीकी डॉलर (1400 करोड़ रुपए) को नुकसान हुआ है। वजह है तमिलनाडु में तांबे के स्मेल्टर प्लांट को एक साल पहले बंद करवाया जाना। अग्रवाल ने कहा कि कंपनी की यूनिट स्टरलाइट के तूतीकोरिन संयंत्र में उत्पादन बंद होने से देश को तांबे का आयात करना पड़ा, जिससे कीमती विदेशी मुद्रा खर्च की गई। इसी प्लांट में विरोध को दबाने के लिए पुलिस की गोलियों से 13 लोगों की मौत हो गई थी।



फिर से खोला जाए प्लांट, 20 हजार रोजगार का हुआ नुकसान

एक साक्षात्कार में अग्रवाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, '' हमने 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर गंवाए हैं। आप उत्पादन कैसे रोक सकते हैं? वह भी तब जबकि आपको इसके एवज में आयात करना पड़े। तमिलनाडु सरकार ने पिछले साल मई में थुथुकुडी में संयंत्र में खूनी विरोध प्रदर्शन के बाद तांबा स्मेल्टर को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया था। वेदांता कंपनी चाहती है कि संयंत्र को फिर से खोल दिया जाए। स्मेल्टर के बंद होने से 20,000 और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर खत्म हो गए हैं। यही नहीं, 98,400 अधिक उपभोक्ता या डाउनस्ट्रीम उद्योगों में प्रभावित हुए हैं।


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पुलिस फायरिंग गलत थी लेकिन अब और भी गलत हो रहा है


अग्रवाल ने कहा कि "पुलिस फायरिंग में बहुत दुर्भाग्यपूर्ण कदम था और हमारे विचार और सहानुभूति पीड़ितों के साथ हैं। लेकिन अब जो हो रहा है वह उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है। ”थूथुकुडी जिले में वेदांता संयंत्र भारत के तांबे के उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन करता है। गौरतलब है कि कंपनी ने क्षमता विस्तार की योजना की घोषणा की थी, जिससे प्रदूषण के बारे में चिंताओं पर विरोध हुआ।

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प्लांट बंद होने से भारत में तांबे की कमी हुई



वेदांता लिमिटेड ने 2018-19 के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा: “भारत को वेदांता के तूतीकोरिन स्मेल्टर बंद होने के कारण परिष्कृत तांबे की उपलब्धता में कमी का सामना करना पड़ा। जबकि चौथी तिमाही के दौरान रखरखाव के लिए कुछ स्मेल्टरों के बंद होने के बावजूद चीनी स्मेल्टर के उत्पादन में 4.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ”भारत में परिष्कृत तांबे की खपत 2018 में 2.9 प्रतिशत बढ़ी, जबकि चीन में तांबे की सबसे बड़ी उपभोक्ता की माँग 4.9 प्रतिशत तक बढ़ गई। परिष्कृत तांबा मुख्य रूप से विनिर्माण केबलों, ट्रांसफार्मर और मोटर्स के साथ-साथ कास्टिंग और मिश्र धातु आधारित उत्पादों में उपयोग किया जाता है।
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