नायाब /देश में तेजी से बढ़ रहा है जोंक से इलाज का कारोबार अब ब्यूटी प्रोडक्ट्स के लिए हो रहा इस्तेमाल, एक करोड़ से ज्यादा का है बिजनेस

  • युवक-युवती सौन्दर्य के लिए जोंक पद्धति से इलाज करवा रहे हैं

Moneybhaskar.com

Jun 19,2019 05:59:50 PM IST

अमित कुमार निरंजन

नई दिल्ली। नागपुर के उमेश बावणे 46 डिग्री की गर्मी में साइकिल से ही सड़क नापने निकल जाते हैं। साइकिल पर चलने वाला यह इंसान महाराष्ट्र के चिकित्सा क्षेत्र में अपनी अनोखी पहचान बनाए हुए हैं। इनकी तीन पुश्ते जोंक (लीच) की सप्लाई देश के कई डॉक्टरों को करते हैं। उमेश के द्वारा सप्लाई किए जोंक से ये डॉक्टर कई पुरानी बीमारियों को ठीक कर रहे हैं। लेकिन उनका यह जोंक का धंधा आजकल मंदा चल रहा है। या यूं कहा जाए कि पूरा ठप हो चुका है। उमेश बताते हैं कि हर साल अप्रैल, मई और जून में जोंक कम विकिसत होते हैं, क्योंकि इस दौरान गर्मी जबरदस्त होती है। अपने नाना सीताराम अटोणे से जोंक के रखरखाव और विकास का हुनर सीख चुके हैं, उमेश का बेटा अंकुश भी जोंक का रखरखाव करना जानता है। उमेश बताते हैं कि आम तौर पर एक जोंक सौ रुपए का बेचते हैं। और गर्मी के मौसम में एक जोंक कीमत दौ सौ से ढाई सौ रुपए तक पहुंच जाती है। उन्होंने बताया कि वह औसतन हर माह एक हजार जोंक बेच देते हैं। इन्होंने बताया कि पूरे देश में मेरे जैसे करीब 100 सप्लायर हो सकते हैं। और इसका हर माह एक करोड़ तक का धंधा हो सकता है।

मनी भास्कर खास / 15 दिनों की देर से चल रहे मॉनसून की मार किसानों पर पड़ना तय

100-200 रुपए में बेची जाती है एक जोंक


करीब ढाई हजार डॉक्टरों को हर साल जोंक सप्लाई करने वाले उमेश बताते हैं कि हमारी तीन पीढ़ियां करीब पचास सालों से इस धंधे में हैं। करीब एक दशक पहले जितने जोंक बेचते थे उतने ही जोंक अभी भी बेचते हैं, लेकिन अब उसकी कीमत सात गुना बढ़ गई है। एक दशक पहले एक जोंक 15 रुपए का बिकता था, अब यही जोंक 100-200 रुपए में बेची जाती हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, समेत देश के एक दर्जन प्रदेशों मेंं जोंक से इलाज का काम चलता है। जोंक का रखरखाव कठिन है, और सबसे बड़ी चुनौती है सही जोंक को बेचना। जोंक दो तरह की होती है निर्विष और विषारी। निर्विष श्रेणी की जोंक हरे रंग की होती है जो इलाज में काम आती है, और विषारी श्रेणी की जोंक विषयुक्त होती है। यह नुकसानदायक होती है और हरे रंग छोड़कर कोई भी रंग में हो सकती है। मध्य प्रदेश के बैतूल में जोंक से इलाज करने वाले डॉ आलोक वर्मा बताते हैं वे हफ्ते में एक दिन जोंक से इलाज करते हैं। इन्होंने बताया कि पुराने घाव, त्वचा संबंधी बीमारी, हार्ट ब्लॉकेज, खून और बालों संबंधी जैसे कई पुरानी बीमारियों का इलाज जोंक की मदद से किया जाता है। लोगों को इससे आराम मिल रहा है, इसलिए वे अपने परिचितों को इसके बारे में बताते हैं। इसमें जोंक के रखरखाव पर ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। हर तीन चार दिन में पानी न बदलने से ये जोंक मर जाते हैं।

Good News / छोटे कारोबारियों को बिना गिरवी के मिलने वाले लोन की राशि दोगुनी करने की सिफारिश, आरबीआई ले सकता है फैसला

इससे कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे मरीज को आराम मिला है


चेन्नई की डॉ अनीता पटेल करीब दो दशक से जोंक के माध्यम से इलाज कर रही हैं। इन्होंने बताया कि पहले दो से तीन मरीज हफ्ते में आते थे, लेकिन अब हर रोज चार से पांच मरीज आते हैं। उन्होंने बताया कि इससे हमने कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे मरीज को आराम मिला है। इस पद्धति से कैंसर ठीक तो नहीं होता, लेकिन उसमें आराम जरूर मिल जाता है। उन्होंने रखरखाव के बारे में बताया कि एक जोंक को एक मरीज के लिए इस्तेमाल किया जाता है, दूसरे पर इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके अलावा एक मरीज का एक जोंक से दस बार ही इलाज किया जाता है। हर सिटिंग के बाद जोंक को हल्दी लगाकर उसके मुंह से गया मरीज का खून निकलवाया जाता है, और पानी बदल दिया है। इलाज पूरा होने के उस मरीज के जोंक को दोबारा इलाज में इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

इससे किसी प्रकार का कोई साइड इफैक्ट नहीं


राष्ट्रीय आयुर्वेद वि‌द्यापीठ के गुरु और नागपुर के डॉ गउकर आयुर्वेद धाम अस्पताल के संचालक डॉ धनराज गउकर ने बताया कि पांच हजार साल पहले आयुर्वेदिक में जलोकावारन पद्धति में जोंक से इलाज किया जाता है। इससे कई बार सर्जरी में इसका उपयोग किया जाता है। भगंदर का इलाज भी जोंक से किया जाता है। ये पूरा गंदा खून चूस लेता है। माईग्रेन और पैरासिस का इलाज भी इससे करते हैं। उन्होंने बताया कि युवक-युवती सौन्दर्य के लिए इस पद्धति से ईलाज आजकल खूब ले रहे हैं। जिन युवक-युवतियों की शादी होने वाली होती है और उनके चेहरे पर फोड़े, फुंसी और मुहांसे होते हैं, वे इस पद्धति से इलाज ले रहे हैं। क्योंकि इससे किसी प्रकार का कोई साइड इफैक्ट नहीं है। अब इससे विदेशों में भी इलाज किया जाता है।

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.