नाकामयाबी /कंपनियों की छोटी सी गलती से हो गया अरबों रुपए का नुकसान, कुछ दिवालिया भी हो गईं

Moneybhaskar.com

Jun 08,2019 02:08:56 PM IST

कुलदीप सिंगोरिया. नई दिल्ली


गलतियां इंसान को सिखाती हैं। कई महान अविष्कार की शुरूआत भी गलतियों से हुई लेकिन यही गलतियां जब कंपनियों से हो जाती हैं तो उन्हें अरबों रुपए का नुकसान झेलना पड़ता है। कुछ कंपनियां दिवालिया तक हो गईं। एक समय दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) की एक ऐसी गलती के बारे में हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया कि कैसे इस कंपनी को बीते तीन साल में एक गलती की वजह से 13 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। मनी भास्कर ने इसी रिपोर्ट के आधार पर दूसरी कंपनियों की गलतियां भी तलाशी। यदि कंपनियां अपनी भूलों को सुधार लेती तो संभवत: वे गर्त में न जाती।

रिन्युएबल एनर्जी के ट्रेंड को नहीं समझ सकी जीई

जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) को 2016 की शुरुआत से लेकर 2018 के अंत तक तीन साल में 17200 करोड़ डॉलर (करीब 13 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ। इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईईएफए) की ताजा रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक जीई ने रिन्युएबल एनर्जी की बढ़ती मांग के ट्रेड को पहचानने में गलती की। कंपनी का अनुमान था कि नेचुरल गैस और कोयले की डिमांड एनर्जी मार्केट में बनी रहेगी। लेकिन, दुनियाभर में ग्रीन एनर्जी की डिमांड बढ़ी और गैस टर्बाइन और थर्मल पावर कंस्ट्रक्शन मार्केट काफी पीछे छूट गया। 2015 में हुए पेरिस समझौते के बाद से रिन्युएबल एनर्जी की लागत लगातार कम होती गई। बेहतर पर्यावरण और लागत में कमी के कारण ज्यादातर देश प्रदूषण फैलाने वाले परंपरागत माध्यमों से किनारा करने लगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे विंड और सोलर टेक्नोलॉजी की लागत कम होती गई जीई के अरबों डॉलर के निवेश वाले एसेट बेकार साबित होते गए।

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सोशल मीडिया को देरी से समझा गूगल ने, अब जगह बना पाना मुश्किल

दुनिया की नंबर एक टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल ने माना है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों को नजरअंदाज करना उसकी सबसे बड़ी गलती रही। ऐसी गलती, जिसकी भरपाई अब नहीं की जा सकती है। गूगल के पूर्व सीईओ और संस्थापक एरिक श्मिट ने ब्लूमबर्ग के साथ इंटरव्यू में कहा, "गूगल में, मैंने जो सबसे बड़ी गलती की, वह यह कि सोशल नेटवर्किंग साइटों की उभार और ताकत का सही अंदाजा नहीं लगा पाया।" गूगल ने सोशल मीडिया के शीर्ष पर पहुंचने के साथ इसमें प्रवेश की बहुत कोशिश की लेकिन फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियां तब तक बहुत आगे निकल चुकी थीं। सच्चाई तो यह है कि फेसबुक का जब जन्म भी नहीं हुआ था, तो गूगल ने ऑर्कुट के तौर पर सोशल मीडिया चलाया था, जो भारत और ब्राजील के अलावा कहीं और नहीं चल पाया। इसके बाद गूगल का बज भी फेल हो गया और अब कंपनी ने अपना पूरा ध्यान गूगल+ पर लगाया है लेकिन उसकी कामयाबी भी सीमित है।

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डिजिटल कैमरे की अहमियत नहीं समझ पाई कोडक

कोडक कंपनी 1968 में अपने कैमरे लेकर आई थी। इस कंपनी में 1,70,000 कर्मचारी काम करते थे और वो दुनिया का 85% फोटो रील बेचते थे। इस कंपनी ने फिल्म कैमरे से लेकर डिजिटल कैमरे तक बनाये। आपको यह जान कर हैरानी होगी कि पहला डिजिटल कैमरा भी कोडक कंपनी ने ही बनाया था लेकिन अहमियत नहीं समझी। कुछ ही सालो में मार्केट में डिजिटल कैमरों का दौर चल गया लेकिन कंपनी ने अपने कैमरे में कोई बदलाव नहीं किया। बाद में यह कंपनी दिवालिया हो गयी।

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एपल स्मार्ट फोन बना रहा था लेकिन नोकिया बेसिक फोन से आगे नहीं बढ़ी

नोकिया कंपनी फिनलैंड में स्थापित हुई थी। यह कंपनी कई क्षेत्रों में कार्य करती थी। इसने कई तरह के फोन बनाये थे। इस कंपनी का सबसे पहला फोन 10 किलो और दूसरा फोन 5 किलो का था। इन्होने जब 2100 सीरीज के फोन निकाले तब इस कंपनी का टारगेट 4 लाख फोन बेचने का था और बेचे थे 2 करोड़ फोन। यह कंपनी इतनी तेजी से तरक्की कर रही थी हर बार अपने द्वारा की गई उम्मीद से भी आगे बढ़ जाती थी। यहां तक की मोबाईल फोन सेलिंग में टॉप 20 फोन नोकिया के ही हुआ करते थे। कुछ समय में मार्केट में एंड्राइड आ गया। एपल ने स्मार्ट फोन लांच कर दिया। जब प्रतिस्पर्धा में अन्य फोन कंपनियां आई तब नोकिया ने कुछ खास बदलाव नहीं किया और अन्य कंपनियां इससे आगे निकल गई।

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4 G तकनीक नहीं अपनाई तो दिवालिया हो गई एयरसेल

Aircel मोबाईल नेटवर्क कंपनी का नाम सबने ही सुना होगा। इस कंपनी को चिन्नाकन्नान सिवसंकरण ने 1999 में तमिलनाडु से शुरू किया था। यह कंपनी सिर्फ 2G और 3G में ही डाटा सर्विस उपलब्ध कराती है। इस कंपनी ने अपने नेटवर्क में कोई बदलाव नहीं किया। कंपनी ने 4G नेटवर्क पर कार्य ही नहीं किया। जिसके कारण धीरे धीरे यह कंपनी टेलीकॉम कंपनियों की लिस्ट में पीछे जाती गई और दिवालिया घोषित कर दी गई।

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पीएम हो सीएम सभी इसी कार में करते थे सफर लेकिन अब प्रोडक्शन ही बंद हो गया

Ambassador कार एक ऐसी कार थी, जो बड़े-बड़े नेताओ और ऑफिसर्स की पहली पसंद हुआ करती थी। इस कार को हिंदुस्तान मोटर्स ने 1956 में ब्रिटिश मोटर कॉर्पोरेशन से लइसेंस लेकर मोर्रिस ऑक्सफ़ोर्ड 1 और 2 बनाई। इसके बाद इसी कंपनी ने एक जबरदस्त डिजाइन की कार बनाई जिसका नाम एम्बेसडर रखा गया। ये कार हिंदुस्तानी होने का अनुभव दिलाती थी। कुछ समय बाद मार्किट में मारुती सुजुकी ने अपनी बहुत सस्ती गाड़ी मारुती-800 लांच कर दी थी। इस कार के लांच के बाद एम्बेसडर का अस्तित्व खतरे में नजर आने लगा। धीरे-धीरे और नई और आकर्षक कार मार्केट में आ गई और कोई खास बदलाव न करने के कारण एम्बेसडर ने अपना नाम और पहचान मार्केट में खो दी। अब बीते सात साल से इसका प्रोडक्शन बंद है।

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सेल की अहमियत न समझ पाने से बंद ही एचएमडी घड़ी

यह कंपनी ऐसी घड़िया बनाती थी, जिन्हें बस चाबी भर कर चलाया जा सकता था। जैसे-जैसे मार्केट में सेल वाली घड़ियां आ गई। वैसे-वैसे यह घड़ियां मार्किट में पीछे होती गई। इस कंपनी की शुरुआत 1953 में हुई थी। इस 1961 में कंपनी ने पहली बार घड़ी बनाई थी। इससे पहले यह टेक्टर बनाती थी। यह भी पढ़ें : विदेशी कंपनियों को टक्कर देने के लिए सहारा इंडिया ने भी लांच की इलेक्ट्रिक स्कूटर व बाइक

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