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सुविधा /क्यूआर कोड से स्कैन होगा स्मार्ट एड्रेस, आसानी से मिल जाएगा आपके घर का पता

money bhaskar

May 15,2019 07:43:23 PM IST

कुलदीप सिंगोरिया. नई दिल्ली


खाना ऑर्डर करना हो या टैक्सी बुलानी हो, या फिर मेहमान को घर आने के लिए रास्ता बताना हो। कई बार गफलत की स्थिति बन जाती है। ऐसे ही किसी के घर का पता ढूंढ़ने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ जाती है। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए अब क्यूआर कोर्ड आधारित स्मार्ट एड्रेस की शुरुआत की गई है। सबसे पहले भोपाल में इसकी लॉन्चिंग हो रही है। इसके बाद स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के अन्य शहरों में भी यह स्कीम लागू की जाएगी।

दिसंबर तक शहर के हर घर का होगा क्यूआर कोड

भोपाल के चार इमली क्षेत्र में सरकारी बंगलों पर इन दिनों एक कॉपर की नंबर प्लेट लगाई जा रही है। इस नंबर प्लेट पर एक क्यूआर कोड भी बना हुआ है। यह कॉपर की नंबर प्लेट एक तरह का डिजिटल स्मार्ट एड्रेस है। चार इमली क्षेत्र में यह काम पूरा हो गया है। इसके बाद शिवाजी नगर, 74 बंगला क्षेत्र और फिर अरेरा कॉलोनी और होशंगाबाद रोड पर काम होगा। वहीं, शहर के अन्य इलाकों में अभी सर्वे करने के साथ मैप तैयार करने और मैन रोड, स्ट्रीट और एवेन्यू के डिजिटाइजेशन का काम चल रहा है। इस डिजिटाइजेशन के बाद मकान को नंबर दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद यहां भी कॉपर की प्लेट लगाई जा रही है। इस साल के अंत यानी दिसंबर तक भोपाल देश का पहला ऐसा शहर हो जाएगा, जहां हर मकान का एक ई एड्रेस होगा। आंध्रप्रदेश व तेलंगाना के कुछ शहरों की कॉलोनियों में इसका प्रयोग किया है।

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स्मार्ट एड्रेस के यह हैं फायदे

इमरजेंसी में पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड भी सीधे मौके पर पहुंच सकेंगे। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन और बिजली बिल की मॉनिटरिंग जैसे काम भी इसके माध्यम से हो सकेगी। इस एड्रेस को स्मार्ट सिटी कंपनी के भोपाल प्लस एप से जोड़ा जाएगा। एप पर एक रेड बटन होगा। इस बटन को प्रेस करते ही निकटस्थ पुलिस थाने को सूचना पहुंच जाएगी। इस एड्रेस और क्यूआर कोड का सीधा फायदा यह है कि किसी मेहमान या कुरियर बॉय को आपके घर की लोकेशन पता करने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें क्यूआर कोड भेजने पर सीधे आपके घर की लोकेशन मैप पर आ जाएगी।

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गोपनीयता भी रहेगी

क्यूआर कोड को स्कैन करके केवल आपके एड्रेस की जानकारी ही मिलेगी। यानि मकान में निवास करने वाले व्यक्ति का नाम या संबंधित प्रॉपर्टी के बारे में कोई अन्य जानकारी इसके जरिए नहीं मिलेगी। मप्र में स्मार्ट सिटी के प्रभारी सीयू रॉय बताते हैं कि अभी भोपाल में यह प्रयोग किया जा रहा है। फिर प्रदेश के अन्य छह स्मार्ट शहरों में इसका प्रयोग किया जाएगा। भारत सरकार से समझौता होने की वजह से उन्हें भी यह जानकारी भेजी जाएगी। नॉलेज शेयरिंग के जरिए देश के दूसरे शहर भी इसका प्रयोग कर सकते हैं। भोपाल में भोपाल प्लस एप व जीआईएस मैप का एक साथ टेंडर किया गया था। इसी में स्मार्ट एड्रेस को शामिल किया गया है। इसी वजह से स्मार्ट एड्रेस की लागत महज एक करोड़ रुपए आई है।

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