Home »Economy »Policy» SC Said Aadhar Card Should Not Be Made Mandatory For Govt Schemes

SC ने केंद्र से पूछा- PAN के लिए आधार को कैसे बना सकते हैं अनिवार्य? अगली सुनवाई 25 को

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने पैन कार्ड के लिए आधार को अनिवार्य बनाने पर केंद्र के फैसले पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने केंद्र से पूछा, ‘‘आप आधार को अनिवार्य कैसे बना सकते हैं जबकि हमने इसे वैकल्पिक रखने का आदेश दिया है।’’  केंद्र को रूख को जस्टिफाई करते हुए अटॉर्नी जनरल ने जस्टिस एके सिकरी की बेंच को बताया कि सरकार ने यह पाया है फेक डॉक्‍यूमेंट के आधार पर कई लोगों ने पैन बनवाए हैं। ऐसे उदाहरण हैं कि शेल कंपनियों को फंड्स डायवर्ट करने के लिए कई पैन कार्ड का इस्तेमाल किया गया था। ऐसी चीजों को रोकने का एक ही ऑप्शन है कि आधार कार्ड को जरूरी किया जाए। बेंच ने कहा कि वह पैन के लिए आधार को अनिवार्य बनाने के सरकार के फैसले के खिलाफ पिटीशंस पर 25 अप्रैल को सुनवाई करेगी।
 
 
- सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि वह इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने के लिए आधार को अनिवार्य बनाना जस्टिफाई करें क्‍योंकि यह उसके पहले दिए गए आदेश का उल्‍लंघन है।
- शीर्ष कोर्ट ने केंद्र से यह भी पूछा कि, ‘‘क्‍या आधार को बलपूर्वक लागू कराना ही फ्राड रोकने का एकमात्र रास्‍ता है।’’
- इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2015 को कहा था कि सरकार की वेलफेयर स्कीम्स का फायदा लेने के लिए आधार जरूरी नहीं रहेगा। 
- इस केस में अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी। अभी केंद्र के 19 मंत्रालयों की 92 स्कीम्स में आधार का इस्तेमाल हो रहा है।
 
सरकार ने ITR फाइल करने के लिए आधार को किया है अनिवार्य 
- बजट 2017-18 के फाइनेंस बिल में सरकार ने आईटीआर फाइल करने के लिए आधार को अनिवार्य बनाया है और पैन को आधार से लिंक करने की सुविधा उपलब्‍ध कराई है। सरकार की तरफ से यह कदम कई पैन कार्ड के लिए टैक्‍स चोरी करने के लिए उठाया गया है।
- फाइनेंस एक्‍ट 2017 द्वारा इनकम टैक्‍स कानून के सेक्‍शन 139एए के तहत पैन के लिए आधार को अनिवार्य बनाया गया है।
- दो अलग-अलग पिटीशंस ने सेक्‍शन 139एए को चुनौती दी गई है। इसमें से एक पिटीशन रिटायर्ड ऑर्मी अफसर एसजी वंबटकेरे और सफाई कर्मचारी आंदोलन के कन्‍वेनर और फाउंडर बेजवाडा विल्सन की ओर से फाइल की गई थी। वहीं, एक अन्‍य पिटीशन सीपीआई लीडर बिनोई विश्‍वाम ने फाइल की थी। 
 
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था?
- पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार और उसकी एजेंसियां आधार कार्ड को सोशल वेलफेयर स्कीम्स का फायदा लेने के लिए जरूरी नहीं कर सकती है।
- कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि सरकार और उसकी एजेंसियों को नॉन-वेलफेयर स्कीम्स जैसे बैंक खाते खोलने में आधार का इस्तेमाल करने से नहीं रोका जा सकता।
- चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एसके कौल ने कहा था, "आधार को चुनौती देने वाली पिटीशंस की सुनवाई के लिए 7 जजों की एक बेंच बनाई जानी है, लेकिन फिलहाल अभी ऐसा संभव नहीं है, इस बारे में फैसला बाद में किया जाएगा।" 
- जजों की बेंच ने केंद्र सरकार को जारी अपने इंटरिम ऑर्डर में कहा था, "हम यह क्लियर कर देना चाहते हैं कि आधार कार्ड स्कीम पूरी तरह से वॉलंटरी है और इसे तब तक मैंडेटरी नहीं किया जा सकता, जब तक कि कोर्ट इस मामले में अपना आखिरी फैसला नहीं दे देती।"
 
SC ने कुछ स्‍कीम्‍स के लिए आधार के यूज पर लगाई थी रोक
- आधार स्कीम यूनीक अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) की देखरेख में चल रही है। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सरकारी स्कीम्स में आधार के वॉलंटरी यूज पर रोक लगा दी थी।
- इन स्‍कीम्‍स में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, LPG, महात्मा गांधी नेशनल रूरल इम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा), प्रधानमंत्री जन धन योजना और नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम स्कीम्स शामिल हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्‍पष्‍ट कर दिया था कि आधार कार्ड या नंबर न होने पर भी किसी शख्स को कोई सर्विस देने से इनकार नहीं किया जा सकता। 
- बता दें, केंद्र के 19 मंत्रालयों की 92 स्कीम्स में आधार का इस्तेमाल हो रहा है। इनके जरिए एलपीजी सब्सिडी, फूड सब्सिडी और मनरेगा के तहत कैश ट्रांसफर किया जा रहा है।
 

 

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