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लेटलतीफी /रिलायंस के जियो इंस्टीट्यूट को झटका, निर्माण तक नहीं हुआ शुरू, कमेटी ने दिया नोटिस

money bhaskar

May 03,2019 12:00:00 PM IST

नई दिल्ली. दुनिया के 13 वें और भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी का जियो इंस्टीट्यूट अब नए विवाद में फंस गया है। संस्थान ने न तो कैंपस का निर्माण शुरू कियाा है और न ही कोई प्लान दिया है। जबकि जियो को एक साल के भीतर संस्थान को उत्कृष्ट बनाने की रिपोर्ट पेश करनी थी। इससे नाराज होकर एम्पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी (EEC) ने जियो को नोटिस जारी किया है।

गति तेज करने के लिए आश्वासन दिया है

ईईसी के चेयरमैन एन गोपालस्वामी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि जियो ने माना है कि देरी हुई है और आश्वासन भी दिया कि वे चीजों को तेजी से बढ़ाएंगे। गोपालस्वामी ने कहा कि हमने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने की मांग की है। Jio Institute के वाइस चांसलर दीपक जैन और सलाहकार (शिक्षा) विनय शील ओबेरॉय और मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय में उच्च शिक्षा के पूर्व सचिव इस मामले में 29 अप्रैल को नई दिल्ली में आयोजित समीक्षा बैठक में उपस्थित थे। आरआईएल और Jio संस्थान की टीम को अखबार ने कई ईमेल किए लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। जियो के साथ समझौता करने में जुटे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने भी कोई जवाब नहीं दिया।

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यह है वजह


संस्थान के लिए परिसर के निर्माण में देरी हो रही है। Jio संस्थान की टीम ने EEC को समीक्षा बैठक में बताया कि इसका मुख्य परिसर अब महाराष्ट्र में कर्जत के बजाय नवी मुंबई में आएगा। आरआईएल को कर्जत में कैंपस बनाने की परमिशन नहीं मिल पा रही थी। यहां कैंपस इको सेंसिटिव जोन में ले जाने की योजना बनाई थी, जहां कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी प्रतिबंधित है। हालांकि मामले के जानकार एक व्यक्ति ने बताया कि नवी मुंबई में भी निर्माण की अनुमति देने के लिए भूमि के उपयोग को बदलने के लिए आवश्यक अनुमतियां भी अभी तक नहीं आई हैं।

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सिर्फ जियो ही ऐसा उत्कृष्ट संस्थान जिसके पास कैंपस तक नहीं

केंद्र सरकार ने जियो समेत छह संस्थानों को उत्कृष्टता का दर्जा बीते साल दिया था। इन छह संस्थानों में सिर्फ जियो ही ऐसा था जिसका न तो कोई कैंपस था न ही छात्र और फैकल्टी। इस बात पर तब खूब विवाद भी उठा था कि मोदी सरकार ने कैसे जियो को उत्कृष्टता का दर्जा दे दिया। सरकार की योजना इन संस्थानों को एक हजार करोड़ रुपए का फंड देकर विश्व स्तरीय बनाने की है। Jio और मणिपाल के अलावा BITS पिलानी निजी क्षेत्र के संस्थानों को यह दर्जा मिला है। जबकि सार्वजनिक क्षेत्र से IITBombay, IIT-Delhi और IISc बेंगलुरु शामिल हैं। इसका उद्देश्य ऐसे संस्थानों की पहचान करना और उन्हें प्रोत्साहित करना था, जिनके पास 10 वर्षों के भीतर दुनिया के शीर्ष 500 में रैंक करने की क्षमता हो।

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