नई व्यवस्था /आरबीआई की रिपोर्ट: एटीएम की बजाय किराना दुकान से ले सकेंगे कैश

money bhaskar

Jun 05,2019 12:14:54 PM IST

नई दिल्ली. भारत में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा गठित समिति ने छोटे शहरों या सबअर्बन क्षेत्रों में दुकानदारों के जरिए कैश आपूर्ती की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि एटीएम महंगा होने की वजह से बैंक इन्हें बंद कर रहे हैं, ऐसे में किराना दुकान या अन्य छोटी दुकानों के जरिए बैंक कैश सप्लाई कर सकते हैं। यही नहीं, यही व्यापारी लोगों को डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहित भी कर सकेंगे।

नंदन नीलकणी की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट के मुताबिक नई व्यवस्था कैश इन कैश आउट (CICO) नेटवर्क कहलाएगा। इसमें लोग अपने नजदीकी रिटेलर से डिजिटल मनी को कैश में बदलवा सकेंगे। कोटक महिंद्रा बैंक के मुख्य डिजिटल अधिकारी ने कहा कि CICO मॉडल कैश आउट सुविधाओं के लिए तीन करोड़ PoS मशीन के रिटेल पॉइंट की जरूरत होगी। और इसमें अहम कड़ी होंगे स्थानीय किराना व्यापारी। वे वित्तीय समावेशन का अगले चरण का नेतृत्व करेंगे।

कैश काम करेगा नया मॉडल

समिति की सिफारिश के मुताबिक अब बैंक डेबिड व क्रेडिट कार्ड के लिए पीओएस मशीन पर फोकस कर रहे हैं। बीते एक साल में 6.4 लाख मशीनें बैंकों ने वितरित की हैं। यानी कि अब छोटे व्यापारी भी यह मशीन रखने लगे हैं। इसी मशीन के जरिए लोग अपने कार्ड को स्वैप कर दुकानदार से कैश ले सकेंगे। यही नहीं क्यूआर कोड और आधार कार्ड के जरिए भी यह सुविधा मुहैया कराई जाएगी। वहीं, व्यापारियों के पास रोज कैश इकट्‌ठा होता है। उन्हें इसे रोजाना बैंक लाने ले जाने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वे लोगों को ही कैश उपलब्ध करा देंगे तो बैंको के चक्कर काटने से बचेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में दुकान से बैंक और फिर बैंक से एटीएम तक नकदी ले जाने में होने वाला खर्च भी बचेगा। इसका फायदा दुकानदारों को पीओएस के जरिए होने वाले अन्य भुगतान में सर्विस चार्ज कम करके दिया जा सकता है।

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एटीएम कैश के लिए प्राइमरी सोर्स की तरह उपयोग होंगे


रिपोर्ट के मुताबिक नई व्यवस्था से एटीएम प्राइमरी सोर्स की तरह उपयोग होंगे। यानी व्यापारी कैश जमा करने व लोगों की जरूरत के हिसाब से कैश निकालने में एटीएम का उपयोग कर सकेंगे। यह एक तरह से ग्राहक सेवा केंद्र बन जाएंगे। वहीं, समिति ने बैंकों को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या बैंक को लेन-देन के लिए भुगतान करने की सिफारिश की है।

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