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RBI ने एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को दी राहत, कर्जदार कंपनी की ले सकेंगी ज्यादा हिस्सेदारी

आरबीआई ने ARCs को बढ़ावा देने के वास्ते कर्जदार कंपनियों में अधिकतम 26 फीसदी हिस्सेदारी लेने के नियम को लचीला कर दिया है

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मुंबई. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी) को बढ़ावा देने के वास्ते उनके रिकंस्ट्रक्शन के प्रोसेस से गुजर रही कर्जदार कंपनियों में अधिकतम 26 फीसदी तक हिस्सेदारी लेने के नियम को लचीला कर दिया है। इसका फायदा उन्हीं एआरसी को मिलेगा, जिनका नेट-ओन्ड फंड 100 करोड़ रुपए के स्तर पर बरकरार है।

 

 

100 करोड़ एनओएफ वाली ARCs को होगा फायदा

इससे पहले एआरसी अपनी इक्विटी कैपिटल में सुधार के लिए कर्जदार कंपनी के कर्ज को 26 फीसदी तक ही इक्विटी में तब्दील कर सकते थे। हालांकि गुरुवार को आरबीआई ने एक नोटिफिकेशन में कहा, 'लगातार 100 करोड़ रुपए एनओएफ रखने वाली एआरसी को कर्जदार कंपनी की 26 फीसदी पोस्ट कन्वर्टेड इक्विटी (इक्विटी में तब्दील किए जाने के बाद) की सीमा से छूट दी गई है।' हालांकि रेग्युलेटर ने पोस्ट-डेट कन्वर्जन की नई लिमिट का उल्लेख नहीं किया है।

 

 

डायरेक्टर्स भी ले सकेंगे ज्यादा हिस्सेदारी

इसके साथ ही एआरसी के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स सहित कम से कम आधे डायरेक्टर्स कर्जदार कंपनी के 26 फीसदी से ज्यादा शेयर ले सकते हैं।

 

आरबीआई ने एआरसी कंपनियों के बोर्ड से डेट यानी कर्ज को इक्विटी में तब्दील करने के वास्ते एक पॉलिसी तैयार करने के लिए भी कहा है, जिसके अंतर्गत ऐसे मसलों पर अधिकांश इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को मिलाकर बनी कमिटी द्वारा फैसला लेने को तरजीह दी जानी चाहिए।

 
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