राहत /आर्थिक सुस्ती दूर करने के लिए रेलवे ने माफ किया मालभाड़ा सरचार्ज

  • ढुलाई भाड़ा हो जाएगा कम
  • कीमत में आएगी कमी
  • नहीं लिया जाएगा बिजी सीजन सरचार्ज
  • छोटे पार्सल पर लिया जाने वाला पांच फीसदी अतिरिक्त शुल्क भी माफ

Moneybhaskar.com

Sep 12,2019 07:07:03 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे ने आर्थिक सुस्ती को दूर करने के मकसद से उद्योग एवं कारोबारी जगत की मांग पर मालभाड़े में बड़ी रियायतों की गुरुवार को घोषणा की और कहा कि रेलवे इससे होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई मात्रा बढ़ा कर करेगी। रेलवे बोर्ड के सदस्य (यातायात) पीके मिश्रा ने यहां रेल भवन में संवाददाताओं से कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में उद्योग एवं कारोबार जगत को बल देने के लिए माल के रेल परिवहन की लागत को घटाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि एक अक्टूबर से 31 मार्च और फिर एक अप्रैल से 30 जून तक लिए जाने वाले बिजी सीजन सरचार्ज तथा छोटे पार्सल पर लिया जाने वाला पांच फीसदी अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा खाली कंटेनरों के हॉलेज पर लगने वाले शुल्क में एक चौथाई की कमी की गई है। रेलवे ने इलेक्ट्रॉनिक रसीद प्रणाली भी शुरू कर दी है। इससे कागज ले जाने की जरूरत खत्म हो गई है।

मालभाड़ा से अर्जित राजस्व की घटी है वृद्धि दर

मिश्रा ने कहा कि वर्तमान वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में गत वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले मालभाड़ा से अर्जित राजस्व की वृद्धि दर में कमी देखी गई है, लेकिन अर्जित राजस्व में कमी नहीं आई है। पर इस रुझान को देखते हुए रेलवे ने विभिन्न पक्षों से अलग-अलग विचार-विमर्श किया और उनकी मांग पर ये कदम उठाने का फैसला किया है। रेलवे ने माल ढुलाई में राजस्व के खाते को दुरुस्त रखने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। इनमें छोटी दूरी के लिए कंटेनरों की बुकिंग शुरू करने तथा सीमेंट, ऑटोमोबाइल्स, छोटे पार्सल आदि क्षेत्र में विस्तार करना शामिल है। रेलवे ने वैगनों एवं कंटेनरों के तौलाई की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है, ताकि समय कम लगे।

15 फीसदी घटी है कोयले की ढुलाई

रेलवे की कुल माल ढुलाई का 49 फीसदी कोयला होता है। वित्त वर्ष 2019-20 के पहले पांच माह में कोयला ढुलाई में करीब 15 फीसदी की कमी देखी गई है। मिश्रा ने बताया कि यह कमी भारी वर्षा के कारण कोयला उत्पादन के प्रभावित होने से आई है, लेकिन लौह अयस्क सहित अन्य वस्तु के परिवहन में कमी नहीं देखी गई है। उन्होंने कहा कि माल ढुलाई में ऑटोमोबाइल्स उद्योग की हिस्सेदारी दो फीसदी से बढ़ाकर आठ फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस समय मारुति एवं ह्यूंडई के अलावा फोर्ड एवं कीआ के वाहन और दो पहिया वाहन भी रेलवे के माध्यम से एक स्थान से दूसरे तक पहुंचाने की बात हुई है। इन कंपनियों के साथ मिल कर ऐसे वैगन बनाए जा रहे हैं जिनमें चार पहिया वाहनों के साथ दो पहिया वाहनों का भी परिवहन हो सके। आर्थिक सुस्ती के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने कहा कि यह अस्थायी रुझान है। बहुत जल्द अर्थव्यवस्था गति पकड़ लेगी।

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