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लोकसभा चुनाव रिजल्ट /राहुल के 'न्याय' से वोटर्स ने किया किनारा, गेमचेंजर की जगह लूजर बनी घोषणा

money bhaskar

May 23,2019 11:35:24 AM IST

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव की काउंटिंग शुरू होते ही कांग्रेस को जोर का झटका लगा है। वह बुरी तरह से रुझानों में पिछड़ रही है। ऐसा तब जबकि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में अब तक की सबसे बड़ी डायरेक्ट टू कैश की योजना न्याय का वादा किया था। कांग्रेस को उम्मीद थी कि हाल ही में विधानसभा चुनावों में किसान कर्जमाफी के वादे की तरह न्याय भी गेमचेंजर साबित होगी। लेकिन लोगों को यह योजना बिल्कुल भी प्रभावित नहीं कर पाई। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का न्याय के जरिए पिछड़े तबके को लुभाने का तरीका फेल हो गया। लोगों ने न्याय को खारिज कर दिया।

न्याय के तहत इस फायदे का किया गया था वादा


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वादा किया है था वो न्यूनतम आय सहायता योजना (न्याय) लागू करेंगे। इसके तहत देश के 5 करोड़ परिवार या 25 करोड़ लोगों को सालाना 72 हजार रुपए दिए जाने का वादा किया गया। उनका दावा था कि ये योजना देश की 20 फीसदी जनता के लिए है। कांग्रेस के मुताबिक वो सत्ता में आई तो ये रकम गरीबों के बैंक खाते में डाली जाएगी। ये रकम 12 हजार रुपए महीने तक की आय वाले गरीब परिवारों को मिलेगी। हर महीने 6 हजार रुपए की रकम बैंक अकाउंट में डाली जाएगी। इसको न्यूनतम आय गारंटी और गरीबी हटाने वाली योजना कहा गया।

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इस तरह मिलते 72 हजार


उदाहरण के लिए अगर किसी की आय 4,000 रुपये प्रति माह है तो कांग्रेस सरकार बनने पर 8,000 रुपये की मदद दी जाती। अगर मासिक आय 5 हजार रुपये है तो 7 हजार रुपये देकर 12 हजार रुपये की न्‍यूनतम आय की श्रेणी में लाने का काम किया जाती। हालांकि, न्‍यूनतम आय 12 हजार रुपये को पार कर जाती है तो इस सुविधा का लाभ नहीं मिलता।

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इसलिए लोगों के गले नहीं उतरी न्याय

कांग्रेस के घोषणा पत्र की लांचिंग के वक्त से ही न्याय की सफलता पर अर्थशास्त्रियों ने संदेह जता दिया था। कांग्रेस को सफाई तक देनी पड़ी थी। बल्कि राहुल गांधी को यह भी कहना पड़ा था कि बड़े उद्योगपतियों की जेब से पैसा निकालकर लोगों को देंगे। लोगों को इसी बात पर यकीन नहीं हुआ। उन्हें न्याय की जटिलता भी पसंद नहीं आई। आबादी के जिस 20 प्रतिशत तबके के लिए यह योजना थी, वह इसे समझ नहीं पाया। जबकि बाकी 80 प्रतिशत लोगों को यह योजना वोट खरीदने जैसी लगी। इसलिए उसने इस योजना का खारिज कर दिया।

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