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लोकसभा चुनाव रिजल्ट / राहुल ने कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी ली, अमेठी में जीत के लिए स्मृति को बधाई दी

कभी माडलिंग करती थी ईरानी, फिर क्योंकि सास भी कभी बहु से मिली पहचान

Rahul took responsibility for the defeat of Congress, congratulated the Smriti for victory in Amethi

नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव परिणाम की पूर्ण घोषणा से पहले ही हार की जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई थी और जनता ने उनकी विचारधार को मान्यता दी। अमेठी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि स्मृति ईरानी को अमेठी से चुनाव जीतने के लिए बधाई। वह अमेठी की जनता का प्यार से देखभाल करेंगी। हालांकि अभी अमेठी लोक सभा सीट के परिणाम की घोषणा नहीं की गई है। ईरानी गांधी से लगभग 25,000 वोटों से आगे चल रही है। गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि इस हार से उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। वह अपना काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि देश में काफी ऐसी जनता है जो कांग्रेस की विचारधार में विश्वास रखती है। इस पहले गांधी परिवार का कोई भी सदस्य अमेठी से चुनाव नहीं हारा था। सूत्रों के मुताबिक गांधी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश भी की है।

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क्योंकि सास भी कभी बहू थी से हुई थी फेमस

 राजनीति में अपने सफर की शुरुआत करने से पहले ही स्मृति ईरानी काफी लोकप्रिय चेहरा थीं। उन्हें लोग सबसे ज्यादा 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से जानते हैं। अपने दिनों में यह टीवी धारावाहिक बेहद मशहूर था। इसमें स्मृति ने बहू 'तुलसी' की भूमिका निभाई थी7 इस रोल में स्मृति को काफी सराहा गया। स्मृति ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। उनका जन्म 23 मार्च 1976 में हुआ। वह मिस इंडिया 1998 की फाइनिस्ट रही हैं। बातचीत में वह शुरू से बेहद मुखर रही हैं। हाजिर जवाबी में उनका कोई जवाब नहीं है। तीन बहनों में वह सबसे बड़ी हैं।

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वर्ष 2003 में राजनीति में आईं 


टीवी की दुनिया से राजनीति में आने का उनका सफर 2003 में शुरू हुआ। इसी साल वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ीं। अभी वह मोदी सरकार में कपड़ा मंत्री हैं। इसी सरकार में स्मृति मानव संसाधन विकास मंत्री रहते हुए भी सेवाएं दे चुकी हैं। 2010 के शुरू में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया था। 

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 इसलिए अमेठी था कांग्रेस का गढ़ 


अमेठी को कांग्रेस का दुर्ग कहा जाता है। इस संसदीय सीट पर अभी तक 16 लोकसभा चुनाव और 2 उपचुनाव हुए हैं। इनमें से कांग्रेस ने 16 बार जीत हासिल की है। इस बार अमेठी पर सभी की निगाहें हैं। यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा। सोनिया गांधी के राजनीतिक सफर की शुरुआत भी अमेठी से हुई थी। 1999 में वह अमेठी से चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बनीं। 2004 में उन्होंने बेटे राहुल के लिए इस सीट को छोड़ दिया। इसके बाद राहुल ने लगातार तीन बार यहां से जीत हासिल की।
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