चिंता /दुनियाभर की राहतों के बाद भी नहीं बढ़ पा रही है वैश्विक उत्पादकता : विश्व आर्थिक मंच

  • गत एक दशक में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने दी है 711 लाख करोड़ रुपए की राहत

Moneybhaskar.com

Oct 09,2019 02:00:00 PM IST

नई दिल्ली. वैश्विक वित्तीय संकट के बाद पिछले एक दशक में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने करीब 10 लाख करोड़ डॉलर (करीब 711 लाख करोड़ रुपए) मूल्य की राहत दी है। इसके बावजूद दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादकता नहीं बढ़ पाई है। यह बात जेनेवा के विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने कही।

आरएंडडी, कौशल और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने वाली नीतियां अपनाएं सरकार

वैश्विक आर्थिक विकास दर के काफी निचले स्तर पर रहने और नई आर्थिक सुस्ती के डर से नीति निर्माताओं में उत्पादकता को लेकर काफी चिंता का माहौल है। सालाना प्रतिस्पर्धात्मकता इंडेक्स जारी करते हुए डब्ल्यूईएफ ने विभिन्न देशों की सरकारों से रिसर्च एंड डेवलपमेंट, श्रम बल कौशल और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय नितियों और अन्य प्रोत्साहनों का उपयोग करने का आग्रह किया।

आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मौद्रिक नीति के उपयोग की अधिक गुंजाइश नहीं

एजेंसियों की खबरों के मुताबिक आज की सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरकारों और केंद्रीय बैंकों के पास आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मौद्रिक नीति का उपयोग करने की अधिक क्षमता नहीं रह गई है। इसलिए यह जरूरी हो गया है कि प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाली नीतियां अपनाई जाए, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी और आय की असमानता घटेगी।

डब्ल्यूईएफ की ताजा प्रतिस्पर्धा सूची में सिंगापुर पहले नंबर पर

डब्ल्यूईएफ की ताजा प्रतिस्पर्धा सूची में सिंगापुर 84.8 अंक के साथ पहले नंबर पर आया है। वहीं अमेरिका को 83.7 अंक मिला है, जबकि पिछले साल उसे 85.6 अंक मिला था। डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि जितनी तेजी से टेक्नोलॉजी से जुड़े इनोवेशन हो रहे हैं, उतनी तेजी से कई देशों में कामगारों की दक्षता नहीं बढ़ रही है। रिपोर्ट में सरकारों से श्रम और शिक्षा नीतियों पर ध्यान देने का आग्रह किया गया है।

ओईसीडी ने एक नई लंबी आर्थिक सुस्ती की जताई है आशंका

पेरिस के ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कॉपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) ने पिछले महीने कहा था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक नई लंबी सुस्ती में फंस सकती है। उसने इस साल वैश्विक विकास दर 2.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया था, जो 2008-09 के संकट के दिनों के बा से सबसे कम है।

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