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बढ़ेगी मिनिमम सैलरी, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को फायदा

सरकार इकोनॉमी को बूस्ट करने के लिए मिनिमम सैलरी बढ़ाने की तैयारी में है। इस बार इसका दायरा भी बढ़ेगा।

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नई दिल्ली। सरकार इकोनॉमी को बूस्ट करने के लिए मिनिमम सैलरी (वेज) बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इतना ही नहीं इस बार सरकार इसका दायरा बढ़ाने जा रही है, इसमें अब सभी सेक्टर शामिल होंगे। अभी मिनिमम वेज एक्ट के तहत सिर्फ 45 सेक्टर आते हैं। नए कानून में इसको तय शर्तों के आधार पर सभी सेक्टर के लिए लागू किया जाएगा। सरकार के इस कदम का सीधा फायदा प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को होगा।
 
इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए मिनिमम सैलरी बढ़ाएगी सरकार
 
लेबर सेक्रेटरी शंकर अग्रवाल ने गुरुवार को सीईआई के एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार मिनिमम सैलरी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। अग्रवाल ने कहा, ‘हम देश में सभी कारोबारों में न्यूनतम वेतन तय करने के लिए एक कानून बनाएंगे।’ इसका उद्देश्य देश में गुड्स और सर्विसेज की डिमांड बढ़ाकर इकोनॉमी को रफ्तार देना व नए रोजगार पैदा करना है। वर्तमान में केंद्र के साथ ही राज्य भी कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल कामगारों के लिए वेतन तय करते हैं।
 
ट्रेड यूनियनों की मांग, 15,000 रु हो मिनिमम सैलरी 
 
ट्रेड यूनियन लंबे समय से हर क्षेत्र में न्यूनतम वेतन प्रति महीने 15000 रुपए  तय करने की मांग करती रही हैं। उनका यह भी कहना है कि यह सैलरी पूरे देश के लिए लागू होनी चाहिए। लेबर एक्ट के तहत वर्तमान में मिनिमम सैलरी 160 रुपए प्रति दिन है, यह सिर्फ सजेस्टिव है और कानूनी तौर पर बाध्य नहीं है। 
 
सरकार का 273 रु प्रति दिन मिनिमम सैलरी करने का प्रस्ताव
 
ट्रेड यूनियंस के मुताबिक सरकार ने देश भर में मिनिमम सैलरी 273 रुपए प्रति दिन या 7,100 रुपए सैलरी करने का ड्राफ्ट तैयार किया है। यूनियंस के मुताबिक यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय गाइडलाइंस और इंडियन लेबर कांफ्रेंस 1957 के प्रस्तावित नॉर्म्स की तुलना में आधे से भी कम है, जिन्हें करेंट प्राइस पर लागू करने की बात थी।
 
अगली स्लाइड में पढ़िए-केंद्र और राज्य इन कैटेगरीज में तय करते रहे हैं मिनिमम सैलरी
 
 
केंद्र और राज्य इन कैटेगरीज में तय करते रहे हैं मिनिमम सैलरी
 
वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकारें काम की विभिन्न कैटेगरीज के लिए मिनिमम सैलरी तय करती हैं। मिनिमम वेज एक्ट, 1948 के अंतर्गत केंद्र 45 कैटेगरीज में और राज्य 1,679 कैटेगरीज में मिनिमम सैलरी तय करते हैं। लेबर इकोनॉमिस्ट कहते रहे हैं कि मिनिमम वेज तय करने के लिए कई अथॉरिटी होने से वर्कर्स के लिए मिनिमम सैलरी की डिमांड करना मुश्किल हो जाता है, जिससे आय असमानता और गरीबी की स्थिति काफी खराब हो गई है।
 
नए कानून में बढ़ेगा दायरा, अभी हैं 45 सेक्टर
 
अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा कानून में सिर्फ शिड्यूल्ड उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन तय किया जाता है। लेकिन नए कानून में सभी सेक्टर इसके दायरे में आ जाएंगे। मौजूदा मिनिमम वेज एक्ट, 1948 के दायरे में सिर्फ 45 सेक्टर आते हैं। अगर नया कानून बनता है तो इसका दायरा काफी बढ़ जाएगा।
 
खरीददार की जेब में पैसा होगा, तभी बढ़ेगी डिमांड
 
अग्रवाल ने कहा कि हम मिनिमम वेज एक्ट के तहत वेतन में बढ़ोत्तरी करेंगे, जिससे वेतन महंगाई के अनुरूप हो और लोगों के पास गुड्स व सर्विसेज खरीदने के कुछ पैसा बचे। अग्रवाल ने कहा कि रोजगार पैदा करके इकोनॉमिक ग्रोथ को बूस्ट किया जा सकता है और उसके लिए गुड्स व सर्विसेज की डिमांड पैदा करनी होगी। इससे मैन्युफैक्चरिंग और अन्य आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी।
 
गुड्स और सर्विसेज की डिमांड बढ़ने से पैदा होंगे रोजगार
 
उन्होंने कहा, ‘नए रोजगार पैदा करने के लिए हमें गुड्स और सर्विसेजके लिए डिमांड पैदा करने की जरूरत है। लेकिन ऐसा तभी होगा, जब खरीददारों के जेब में पैसा होगा।’ मौजूदा परिदृश्य में लेबर संविधान की समवर्ती अनुसूची में आती है। 
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