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बजट 2020  /किसानों की आय दोगुनी करने को वित्त मंत्री से इनकम सिक्योरिटी एक्ट लाने की मांग

  • किसान संगठन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में बदलाव की रखी मांग 
  • किसानों की सरकार से पराली बैंक स्थापित करने की मांग

Moneybhaskar.com

Dec 24,2019 01:23:00 PM IST

नई दिल्ली. देशभर के किसानों के प्रतिनिधि के तौर पर कंसोर्टियम ऑफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन (सीआईएफए) की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्री-बजट मीटिंग की गई, जहां किसानों से जुड़े कई सारे मुद्दों के साथ ही कुछ मांगों को रखा गया। इसमें किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुना करने और भारत को साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया। सीआईएफए के जनरल सेक्रेटरी बोज्जा दशरथ रमी रेड्डी ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था रफ्तार देने के सरकार को खेती के कई सेक्टर पर जोर देना होगा।

किसानों की तरफ से रखी गई यह मांगे

  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण हो, जिसमें खेती की लागत, पारिवारिक मजदूरी, भूमि की कीमत को जोड़ने के बाद उसके ऊपर 50 फीसदी लाभ दिया जाएं।

  • पराली बैंक स्थापित करने की मांग की जाएं, जहां पराली को इकट्ठा किया जा सके और इसे उन इलाकों में सप्लाई किया जाएं, जहां जानवर के लिए चारे की कमी रहती है।

  • अनाज, फल और सब्जियों को इकट्ठा करने के लिए वेयरहाउस की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। सीआईएफ ने कहा कि बिना किसी पूर्व अनुमान के 6.6 मिलियन मिट्रिक टन दाल के आयात की इजाजत दी गई, जबकि इस बार भारत दाल की ज्यादा पैदावार हो गई। इसके चलते किसानों को मजबूरी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर दाल की बिक्री करनी पड़ी।

  • किसानों के संगठन ने सरकार से बटाई पर और मजदूरी करने वाले किसानों के लिए इनकम सिक्योरिटी एक्ट लाने की मांग की, जिससे इन्हें एक तय इनकम हासिल हो सके।

  • किसानों के प्रतिनिधियों ने कमोडिटी एक्ट के तहत की जरूरी फसलों की स्टॉक लिमिट तय करने की मांग की।

  • किसान संगठनों ने सरकार से सभी एग्री इनपुट और इक्यूपमेंट पर लगने वाली जीएसटी को जीरो करने की मांग की। साथ ही एग्रीकल्चर में निवेश करने के साथ ही चावल के निर्यात के प्रोत्साहन पर जोर देन की मांग की।

  • एग्री वैल्यूड एडेड प्रोडक्ट की डिमांड को बढ़ाने पर जोर देना चाहिए और सभी फूड, प्रोसेस्ड पर जीरो प्रतिशथ जीएसटी लगाई जानी चाहिए। इससे बड़ी तादात में एग्री प्रोड्यूस्ड को प्रोसेस्ड किया जा सकेगा। साथ ही एग्री वेस्टेज से किसानों की आदमनी को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  • किसानों की तरफ से मांग की गई कि तंबाकू के निर्यात के लिए बढ़ावा दिया जाएं। इसमें मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फॉर्म इंडिया स्कीम (MEIS) की मदद ली जानी चाहिए। बताया गया कि भारत में तंबाकू पैदा करने वाले किसानों की आमदनी दिन प्रतिदिन घट रही है। ऐसा घरेलू स्तर पर सिगरेट की डिमांड कर होने की वजह है। तंबाकू उत्पादक किसानों की तरफ से सरकार से मांग की गई कि उन्हें सिगरेट पर लगने वाले सेस में छूट दी जाएं। राज्य सरकारों को दूध उत्पादक, तंबाकू, कॉफी उत्पाद किसनों की मदद करनी चाहिए। मेक इन इंडिया ड्राइव के तहत देश के किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात के लिए तैयार करना चाहिए।

  • क्षेत्रीय स्तर पर हॉर्टिकल्चर फसल को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय स्तर के कमोडिटी समूह बनाएं जाएं। कमोडिटी समूह की जिम्मेदारी तय हो कि वो खेती और प्रोसेस्ड फूड्स प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी से बाचतीत करके इन फसलों को विदेशी मार्केट में बढ़ावा दिया जाएं।
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