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PM KISAN scheme / कहीं बेकार न हो जाए मोदी का दांव, चुनाव से पहले सिर्फ 38% किसानों को मिलेगा फायदा

4.76 करोड़ किसानों के खातों में पहुंच जाएगी 2 हजार रु की दूसरी किस्त

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार का अंतरिम बजट 2019-20 में किसानों के लिए चला गया पीएम किसान योजना (PM-KISAN scheme) का दांव बेकार जा सकता है। दरअसल, लोकसभा चुनाव (Lok sabha polls) के खत्म होने से पहले देश के सिर्फ 38 फीसदी छोटे और सीमांत किसानो को ही इसका फायदा मिलेगा। इस योजना के तहत गरीब किसानों को सालाना 6 हजार रुपए देने का लक्ष्य है।

 

इन वजहों से कम किसानों को मिलेगा फायदा

इस योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, कम किसानों को इस योजना का फायदा मिलने की मुख्य वजह राज्यों द्वारा सूचनाएं देने में सुस्ती, डिजिटाइज्ड लैंड रिकॉर्ड्स का अभाव और आचार संहिता का लागू होना हैं। 

 

4.76 करोड़ किसानों तक पहुंची दूसरी किस्त

एक अधिकारी ने कहा कि इस प्रकार अधिकतम 4.76 करोड़ (38 फीसदी) किसानों तक ही दूसरी किस्त पहुंच पाएगी, क्योंकि कृषि मंत्रालय ने उन्हीं किसानों को किस्त ट्रांसफर करने का फैसला किया है, जिन्होंने 10 मार्च से पहले एनरोलमेंट कराया था। 10 मार्च को लोकसभा चुनावों की आचार संहिता जारी हो गई थी।

 

 

मोदी सरकार ने बजट में किया था ऐलान

1 फरवरी को पेश हुए अंतरिम बजट में इस योजना की घोषणा की गई थी, जिसे पिछली तारीख यानी दिसंबर, 2018 से लागू किया गया था। इस योजना को ग्रामीण क्षेत्रों की दिक्कतों को दूर करने के लिहाज से नरेंद्र मोदी सरकार का बड़ा ऐलान माना जा रहा था।

 

12.5 करोड़ किसानों को मिलने हैं 6 हजार रुपए

योजना के अंतर्गत दो एकड़ या 5 हेक्टेयर से कम जमीन वाले 12.5 करोड़ छोटे और सीमांत किसानों को तीन बराबर किस्तों में सालाना 6,000 रुपए दिए जाने हैं। योजना लागू करने में हो रही देरी पर अधिकारियों ने कहा कि राज्यों द्वारा सूचनाएं साझा करने और उसके सत्यापन में देरी, डिजिटाइज्ड लैंड रिकॉर्ड की अनुपलब्धता आदि वजहों से सभी लक्षित बेनिफीशियरीज तक योजना का लाभ पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं।

3.5 करोड़ किसानों को मिली पहली किस्त

अभी तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM KISAN) की पहली किस्त के रूप में देश के 3.5 करोड़ (28 फीसदी) किसानों तक 2,000 रुपए पहुंच चुके हैं। इसमें उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है जहां लाभार्थी किसानों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच गई है।

 

राज्यों की यह है स्थिति

अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मेघालय, राजस्थान, सिक्किम और पश्चिम बंगाल, अन्य 22 राज्य और 5 यूनियन टेरिटरीज ने केंद्र सरकार को या तो लाभार्थियों के नाम भेज दिए हैं, या फिर इसकी प्रक्रिया में हैं।
आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तराखंड ऐसे कुछ राज्यों में हैं, जहां लाभार्थियों की संख्या 6 डिजिट में हो गई है। हालांकि, अभी ज्यादातर पात्र लाभार्थियों तक इस स्कीम का लाभ पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

 

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