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संसद का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से, राफेल डील-GST पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष

संसद का शीतकालीन सत्र इस साल 15 दिसंबर से 5 जनवरी तक चलेगा।

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नई दिल्‍ली. संसद का शीतकालीन सत्र इस साल 15 दिसंबर से 5 जनवरी तक चलेगा। संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने शुक्रवार को बताया कि इस बताया कि इस बार 14 दिन का सत्र होगा। 25 और 26 दिसंबर को क्रिसमस के लिए अवकाश रहेगा। विपक्ष की तरफ से शीतकालीन सत्र बुलाने में देरी के चलते मोदी सरकार की आलोचना हो रही थी। कुछ दिन पहले सोनिया गांधी ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार गुजरात चुनाव की वजह से शीतकालीन सत्र बुलाने में देरी कर रही है। हालांकि, इन आरोपों का सरकार की तरफ से भी जवाब आया। खुद फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा था यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है, कांग्रेस खुद पहले ऐसा कर चुकी है।

 

 

शीत सत्र में ये मुद्दे रह सकते हैं हावी

 

संसद के शीतकालीन सत्र में इस बार विपक्ष नोटबंदी समेत कई मुद्दों पर मोदी सरकार को घेर सकती है। विपक्ष सरकार को नोटबंदी, राफेल डील में गड़बड़ी, जीएसटी को गलत तरीके से लागू करना, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर घेर सकती है। बता दें, 2016 के सेशन में हंगामे की वजह से काम ज्यादा नहीं हुआ था। लोकसभा की प्रोडक्टिवटी सिर्फ 16% रही थी।

 

 

संसदीय मामलों की कैबिनेट का फैसला

 

संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि 25 दिसंबर से 26 दिसंबर को क्रिसमस का अवकाश रहेगा। सेशन 14 दिन का होगा। यह फैसला संसदीय मामलों की कैबिनेट मीटिंग में लिया गया। इससे पहले, कांग्रेस के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने 21 नवंबर को कहा था कि सरकार संसद सत्र नहीं बुलाना चाहती। क्योंकि, उसे डर है कि संसद में जवाब देना पड़ेंगे। अगर इन मुद्दों पर बहस होती है तो सरकार गुजरात इलेक्शन के दौरान बेनकाब हो जाएगी।

 

सरकार पर क्‍या लग रहे हैं आरोप

 

गुजरात में 9 और 14 दिसंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। नतीजे हिमाचल प्रदेश के साथ 18 दिसंबर को आएंगे। आमतौर पर संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे हफ्ते में शुरू होकर दिसंबर के तीसरे हफ्ते तक चलता है। सरकार ने अब इस सत्र को दिसंबर के दूसरे हफ्ते में शुरू करने का फैसला किया है।

सोनिया गांधी ने बीते सोमवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की मीटिंग में कहा था कि मोदी सरकार कमजोर आधार पर संसद के शीतकालीन सत्र को नुकसान पहुंचा रही है। इससे संसदीय लोकतंत्र पर बुरा असर पड़ रहा है।

 

जेटली ने दिया था जवाब

 

सोनिया गांधी के आरोपों का जवाब हालांकि फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने दिया था। जेटली ने कहा था कि पहले भी चुनावों के मद्देनजर संसद के सत्र का वक्त बदला जाता रहा है। कांग्रेस खुद ऐसा कई बार कर चुकी है। 2011 में भी कांग्रेस ने ऐसा ही किया था। यह तो एक परंपरा है जो कई बार दोहराई जा चुकी है। चुनाव के दौरान संसद सत्र को रिशेड्यूल किया जाता रहा है।

 
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