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रातोंरात एक लाख लोग हो गए बेकार, इन्हें कहीं और नौकरी मिलने के भी आसार नहीं

जेट एयरवेज ने आसमान में उड़ने वालों को टूटा सितारा बना डाला, तीन माह से सैलरी भी नहीं मिल रही थी

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नई दिल्ली। जेट एयरवेज के कामकाज के ठप होने से एक लाख लोग बेकार हो गए। इन लोगों को यह नहीं पता चल रहा है कि उनकी गलती क्या है। यह पूछने पर कि एक लाख लोग कैसे बेकार हो गए, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जुटे जेट एयरवेज के स्टॉफ ने बताया कि 16,000 तो वैसे कर्मचारी है जो जेट एयरलाइंस से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। कम से कम 80 हजार लोग ऐसे थे जो कहीं न कहीं अप्रत्यक्ष रूप से जेट से जुड़कर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे थे। गुरुवार की दोपहर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैकड़ों की संख्या में जेट एयरवेज के कर्मचारी जेट के कामकाज के ठप होने के विरोध में जुटे थे।

उनका कहना था कि सरकार को तत्काल प्रभाव से जेट एयरवेज को बेल आउट पैकेज देना चाहिए ताकि फिर से जेट का संचालन शुरू हो सके और वे अपनी रोजी-रोटी कमा सके। जेट एयरलाइंस पिछले तीन महीने से अपने कैप्टन को सैलरी नहीं दे रही थी जबकि अन्य विभाग के लोगों की सैलरी पिछले दो महीने से बंद थी।

केबिन क्रू ने बताया पिछले दो महीनों में लोगों ने अपने पीएफ के पैसे निकाल लिए

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के आए केबिन क्रू दिलप्रीत ने बताया कि बदहाली का आलम यह है कि पिछले दो महीनों में लोगों ने अपने भविष्य निधि (पीएफ) के पैसे निकाल लिए। वह कहते है कि जिस पैसे को हमें 60 साल के बाद इस्तेमाल करना था, उसे हम 30 साल की अवस्था में कर लिए। अब हमारी कौन मदद करेगा।

 

कर्मचारियों ने सरकार की नीति को ठहराया जिम्मेदार

जंतर-मंतर पर जुटे जेट के कर्मचारियों का कहना है कि उनकी बदहाली के लिए सरकार की गलत नीति जिम्मेदार है। उनका कहना है कि जब हर निजी एयरलाइंस का हाल बुरा होना है तो सरकार इस दिशा में पहले से क्यों नहीं अलर्ट रहती है। एयर इंडिया को सरकार की तरफ से 35,000 करोड़ का बेलआउट पैकेज दिया जा चुका है तो जेट को क्यों नहीं दिया जा रहा है। अगर सरकार की तरफ से अभी 1500 करोड़ का बेलआउट पैकेज दे दिया जाता है तो शायद फिर से कोई उम्मीद जग जाए। तीन माह पहले जेट के पास 120 जहाज थे और आज की तारीख में एक भी नहीं।

पहले से पता था ऐसा होना है

जंतर-मंतर पर जुटे जेट स्टॉफ ने मनी भास्कर को बताया कि इस एयरलाइंस को बंद करने का फैसला पहले ही हो चुका था। लेकिन कर्मचारियों के बवाल के डर से उन्होंने इसे अहिस्ता-अहिस्ता बंद करने का फैसला किया। अभी दूसरी एयरलाइंस की भी ऐसी स्थिति नहीं है कि इतने स्टॉफ को एडजस्ट कर सके। आज मुंबई में जेट एयरलाइंस यूनियन की बैठक भी हो रही है। प्रदर्शनकारी स्टॉफ ने मनी भास्कर को बताया कि कंपनी के दिवालिया घोषित होने जाने पर वे कंपनी का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते। अगर कंपनी चल रही होती और उन्हें निकाला जाता, तब वे क्षतिपूर्ति की मांग कर सकते थे।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने मीडिया को बताया कि जिन कर्मचारियों की आर्थिक हालत ज्यादा खराब है, वे आत्महत्या भी कर सकते हैं। वहीं, सरकार जेट के पूरे मामले पर पूरी नजर रख रही है और बैंकों ने अभी जेट के लिए अपना दरवाजा पूरी तरह से बंद नहीं किया है।

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