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योजना /नौकरियां बढ़ाने और आयात कम करने के लिए कॉरपोरेट कंपनियां खोलेंगी 700 एमएसएमई क्लस्टर, सरकार ने हटाया बैन

Moneybhaskar.com

Jun 14,2019 03:13:04 PM IST

नई दिल्ली। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को एमएसएमई सेक्टर में कॉरपोरेट और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने एमएसएमई सेक्टर में 700 कलस्टर स्थापित करने के लिए कॉरपोरेट और प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। इससे नौकरियों की बहार आएगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।

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सरकार और उद्योग के बीच विश्वास की कोई कमी नहीं: गडकरी

दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की राष्ट्रीय परिषद को संबोधित करते हुए गडकरी ने वित्तपोषण के नए तरीके लाने के लिए उद्योग से हाथ मिलाने का आग्रह करते हुए कहा कि उद्योग और सरकार के बीच विश्वास की कोई कमी नहीं है, जो लालफीताशाही की वजह पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार निवेश फ्रेंडली है और उद्योग जगत को रोजगार, विकास और निर्यात बढ़ाने के लिए हरसंभव मदद करेगी। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर हमारे साथ काम कर सकते है और मुझे आपकी सहायता की जरुरत है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कलस्टर को लेकर हमें उद्योग जगत से प्रस्ताव मिले हैं। अगरबत्ती उद्योग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हम 4 हजार करोड़ की अगरबत्ती का आयात करते हैं। यदि इसके लिए कलस्टर बनाए जाएं तो इसका हम उत्पादन कर सकते हैं। 

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कृषि, पिछड़े क्षेत्र के विकास पर भी ध्यान दें कॉरपोरेट

गडकरी ने कहा कि देश की प्रगति के लिए औद्योगिक विकास आवश्यक है लेकिन हमारी बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए कृषि क्षेत्र में कैसे विकास लाया जा सकता है इसके लिए भी औद्योगिक घरानों को काम करने की जरूरत है। इसके अलावा पिछड़े क्षेत्रों को विकास भी सबकी जिम्मेदारी है इसलिए इस ओर भी ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास नई तकनीकी का इस्तेमाल कर ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है और इसके लिए प्रशिक्षण केंद्र  स्थापित किए जा रहे हैं। औद्योगिक घराने इस काम में आगे आएंगे तो सरकार मदद करेगी। सरकार ऐसे तकनीकी प्रशिक्षण खोल रही है जिनके माध्यम से परंपरागत तकनीकी को मजबूत बनाकर लोगों का कौशल विकास किया जा रहा है। 

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परंपरागत उद्योगों के विकास पर विशेष फोकस

गडकरी ने कहा कि सरकार परंपरागत उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। परंपरागत काम दक्षता के साथ आगे बढ़े इसके लिए उनका कौशल विकास किया जा रहा है। कौशल विकास केंद्रों के जरिए कामगारों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि देश के परंपरागत उत्पादों को विश्व स्तरीय बनाया जा सके और इसके जरिए रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा किए जा सकें। उन्होंने इस संबंध में बांस उद्योग का जिक्र किया और कहा कि इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और बांस उत्पादों को नई तकनीकी के साथ विकास किया जा रहा है। बांस से निर्मित सामान की देश ही नहीं विदेशों में भी बहुत मांग है। बांस का सामान बनाने के लिए नई तकनीकी का इस्तेमाल किए जाने के साथ ही कामगारों का कौशल विकास किया जा रहा है। सरकार इस दिशा में विशेष ध्यान दे रही है।

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