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किसानों को DBT से मिले बिजली सब्सिडी, आधार से किया जाए लिंकः नीति आयोग

अमिताभ कांत ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से किसानों को बिजली सब्सिडी मिलनी चाहिए।

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नई दिल्ली. नीति आयोग के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अमिताभ कांत ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से किसानों को बिजली सब्सिडी देने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर में खेती के उद्देश्य से दी जाने वाली सब्सिडी को डीबीटी से मिलना चाहिए और इसे आधार से लिंक किया जाना चाहिए। राज्य सरकारें खेती में उत्पादकता बढ़ाने के लिए बीते लगभग चार दशक से मुफ्त या सब्सिडाइज्ड बिजली देने की पॉलिसी पर काम कर रही हैं।

 

बिजली को आधार से किया जाए लिंक

एक कार्यक्रम के दौरान कांत ने कहा, 'देश में हर क्षेत्र में आधार को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमें बिजली के लिए आधार लिंकिंग को बढ़ावा देना चाहिए।' सस्टेनेबल एनर्जी फॉर ऑल की एक रिपोर्ट के मुताबिक डीबीटी को आधार से लिंक किए जाने से कृषि में पावर कन्जम्प्शन और लॉस का बेहतर अनुमान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही कस्टमर्स के लिए बिजली चोरी करना भी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।

 

किसानों को नहीं मिल रहा सही फायदा

सस्टेनेबल एनर्जी फॉर आल, बिजनेस, सिविल सोसाइटी, सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ काम करने के लिए बनाई गई मल्टी-स्टेकहोल्डर पार्टनरशिप है। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा सिस्टम में मिल रही पावर सब्सिडी से किसानों को जहां उम्मीद से कम फायदा मिल रहा है, वहीं पावर यूटिलिटीज वित्तीय तौर पर अव्यावहारिक हो रही हैं और उनको इन्वेस्टमेंट जुटाना मुश्किल हो रहा है। वहीं इससे राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है।

 

डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पर नहीं पड़े सब्सिडी का बोझ

कांत ने कहा, 'इससे (डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी देने) क्षमता सुनिश्चित होगी और सुनिश्चित होगा कि सही व्यक्ति को सब्सिडी मिले।' उन्होंने कहा कि पावर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में प्राइवेटाइजेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है। कांत ने कहा, 'यह गंभीर स्थिति है और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के ऊपर सभी तरह की सब्सिडी का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।'

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