Utility

24,712 Views
X
Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Policyई-व्हीकल पॉलिसी से 20 लाख करोड़ रु का हो सकता है बैट्री मार्केट, ग्‍लोबल हब बनेगा भारत

ई-व्हीकल पॉलिसी से 20 लाख करोड़ रु का हो सकता है बैट्री मार्केट, ग्‍लोबल हब बनेगा भारत

नई दिल्‍ली. भारत ने 2030 तक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर शिफ्ट करने की योजना बनाई है, जिससे उस समय तक बैट्री का बाजार लगभग 20 लाख करोड़ रुपए (300 अरब डॉलर) का हो जाएगा। यह जानकारी नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्‍टीट्यूट ने मिलकर तैयार की गई एक रिपोर्ट में सामने आई है। इसमें भारत के ग्‍लोबल हब बनने की संभावना भी जताई गई है।

 

6.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत

2030 तक बैट्री की ग्लोबल डिमांड का 40 फीसदी भारत से आने की उम्मीद है। इसके लिए भारत को करीब 6.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होगी। इस निवेश से बैट्री की 20 गीगावाट क्षमता की फैक्‍ट्ररियों का निर्माण करना होगा।

 

भारत बन जाएगा बैट्री उत्‍पादन का बड़ा केन्‍द्र

रिपोर्ट के अनुसार भारत अगर 2030 तक 100 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों पर आना चाहता है तो उसे बड़े पैमाने पर बैट्री प्रोडक्शन करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने बड़ा लक्ष्‍य तय किया जो गेम चेंजर साबित हो सकता है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इस पैमाने पर काम होने से कॉस्‍ट में भी कमी आ सकती है। 2030 तक शेयर्ड वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन और कनेक्टिंग मोबिलिटी सिस्‍टम से 20 लाख करोड़ रुपए का बाजार तैयार हो जाएगा।

 

बड़ी संभावना बड़ा मौका

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अनुसार इंडियन मोबिलिटी ट्रांसफार्मेशन से भारत में बड़ी आर्थिक विकास की संभावनाओं का द्वार खुलेगा। इसमें इनोवेटिव बिजनेस मॉडल और सहयोगी सरकारी नीतियां भारत को ग्‍लोबल हब बनाने में मदद कर सकती हैं। इससे नए जॉब्‍स भी क्रिएट करने में मदद मिलेगी। इन सबसे ज्‍यादा पर्यावरण को सुधारने में भी मदद मिलेगी।

और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

Trending

NEXT STORY

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.