सवाल /भारत में बेरोजगारी नहीं, अच्छी नौकरियों की समस्या: मोहनदास पई

Moneybhaskar.com

Jun 16,2019 05:28:00 PM IST

नई दिल्ली। इंफोसिस के पूर्व सीएफओ और कई क्षेत्रों में निवेश करने वाले टीवी मोहनदास पई ने कहा है कि भारत में नौकरी की समस्या नहीं है, असल समस्या कम सैलरी वाली है। पई का कहना है कि भारत में कम सैलरी वाली नौकरियां ज्यादा पैदा होती हैं जिन्हें उच्च शिक्षित युवा पसंद नहीं करते हैं।

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भारत में पैदा नहीं हो रहीं अच्छी नौकरियां

पीटीआई से बातचीत करते हुए मोहनदास पई ने कहा कि भारत में अच्छी नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यहां 10 से 15 हजार की कम सैलरी वाली नौकरियां ज्यादा पैदा होती हैं जिसकी अच्छी डिग्री वाले युवा कल्पना भी नहीं करते हैं। पई ने कहा कि इस कारण भारत में सैलरी समस्या है नौकरी नहीं। साथ ही पई ने कहा है भारत में क्षेत्रीय और भौगोलिक समस्याएं भी ज्यादा हैं। चीनी मॉडल की वकालत करते हुए पई ने कहा कि भारत को ऐसी इंड्स्ट्रीज की स्थापना करनी चाहिए जिनमें मजदूरों की गहनता ज्यादा हो और ऐसी इंडस्ट्रीज की स्थापना समुद्रों के पास करनी चाहिए। साथ ही हमें रिसर्च और डवलपमेंट पर अधिक निवेश से बचना चाहिए।

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चीन ने पूरी दुनिया को बुलाया

उन्होंने कहा कि हमें देखना चाहिए कि चीन ने क्या किया है। उन्होंने पहले श्रमिक आधारित इंडस्ट्रीज की स्थापना की। इसके बाद पूरी दुनिया को बुलाया और कहा कि हमारे श्रमिकों को इस्तेमाल कर निर्यात इंडस्ट्री की शुरुआत करो। उन्होंने कहा कि हमारे पास श्रमिकों को प्रोत्साहित करने वाली इंडस्ट्रीज नहीं है। हमारे पास सही रणनीति भी नहीं है। यही कारण है कि हम अपने अतिरिक्त श्रमिकों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। पई ने उल्लेख किया चीन ने कई क्षेत्रों में रिसर्च और डवलपमेंट में भी भारी निवेश किया है। चीन ने लोअर स्तर पर प्रोत्साहन नीति अपनाकर इलेक्ट्रॉनिक एसेंबली और चिप क्रिएशन का एक इको सिस्टम तैयार किया है। पई ने कहा कि चीन ने ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण समुद्रों के किनारे किया है, इससे सप्लाई चेन बनाने की लागत में कमी आई है। जबकि हमारे पास समुद्री किनारे इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव है।

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सीएमआईई का 1.1 करोड़ नौकरियां खोने का डाटा गलत

पई ने कहा कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की ओर से 2018 में 1.1 करोड़ नौकरियां खोने का डाटा गलता है। उन्होंने कहा कि 15 से 29 साल के आयुवर्ग में बेरोजगारी की गणना के लिए किए जाने वाले सर्वे का तरीका गलत है। उन्होंने कहा कि नौकरियों को लेकर सबसे सही डाटा ईपीएफओ का पेरोल डाटा है, जो बताता है कि भारत में हर साल 60 से 70 लाख लोग फॉर्मल नौकरी पाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में वाहनों की बिक्री भी नौकरी के प्रक्षेप में देखी जाती है। उन्होंने कहा कि हर साल 30 से 35 लाख लोग वाहन खरीद में छूट मिलने पर नौकरी पाते हैं। उदाहरण के लिए भारत में हर साल 7 लाख ट्रैक्टर, 6 लाख ऑटोरिक्शा, साढ़े सात लाख ट्रक हर साल खरीदे जाते हैं। इसके अलावा हर साल करीब 28 लाख कारों की बिक्री होती है जिसके लिए 5 लाख से ज्यादा ड्राइवरों की जरुरत पड़ती है। उन्होंने कहा कि हर साल 30 से 35 लाख ड्राइवरों की नौकरियां पैदा होती हैं।

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