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अर्थव्यवस्था /मोदी की नई सरकार को जीडपी ने किया निराश, जनवरी-मार्च में जीडीपी पांच साल के निचले स्तर पर

money bhaskar

May 31,2019 06:59:32 PM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली दूसरी पारी की सरकार को शुक्रवार को जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों ने निश्चित रूप से निराश किया। शुक्रवार को गत वित्त वर्ष 2018-19 की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) का जीडीपी आंकड़ा जारी किया गया। आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान जीडीपी विकास दर मात्र 5.8 फीसदी रही जो पिछले पांच साल में सबसे कम है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 की आखिरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों के साथ पूरे वित्त वर्ष के जीडीपी का आंकड़ा साफ हो गया। सरकार के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी विकास दर 6.8 रही जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी विकास दर 7.2 फीसदी थी। इससे पहले वित्त वर्ष 2013-14 में जीडीपी में 6.4 फीसदी की दर से विकास हुआ था। अंतिम तिमाही में जीडीपी की विकास दर चीन की 6.4 फीसदी विकास दर से कम है।

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कृषि, उद्योग व मेन्यूफैक्चरिंग सेक्टर से मिली निराशा

अचल जीडीपी या स्थिर (2011-12) कीमतें अब 140.78 लाख करोड़ रुपये आंकी गई हैं। वित्त वर्ष 19 के दौरान जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 2017-18 के 7.2 प्रतिशत की तुलना में संशोधित कर 7 प्रतिशत किया गया था। जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान, विकास पिछले नौ महीनों में मुख्य रूप से कृषि, उद्योग और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मंदी के कारण 5.8 प्रतिशत तक लुढ़क गया। मार्च तिमाही के लिए यह संख्या 6.5 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कम थी। पिछली सात तिमाहियों में देश की जीडीपी वृद्धि दर पहली बार चीन की जीडीपी वृद्धि दर से नीचे आयी है। बीते वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत थी।

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प्रति व्यक्ति आय बढ़ी

वित्त वर्ष 2018-19 में सकल राष्ट्रीय आय 139.32 लाख करोड़ रुपए रही जबकि इससे पहले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 130.34 लाख करोड़ रुपए पर था। आलोच्य वित्त वर्ष में प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एक लाख 26 हजार 40 रुपए दर्ज की गयी है। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह एक लाख 14 हजार 958 रुपए रही थी।

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निर्माण क्षेत्र में सबसे ज्यादा और खनन में सबसे कम रही जीडीपी रेट

आंकड़ों के अनुसार बीते वित्त वर्ष के दौरान सबसे ज्यादा निर्माण क्षेत्र में 8.7 प्रतिशत की जीपीडी ग्रोथ रेट रही। इसके बाद लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं की जीडीपी वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत से अधिक रही है। वित्त, भू संपदा और विशेषज्ञता सेवाओं में 7.4 प्रतिशत, बिजली, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य सेवाओं में सात प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसके अलावा कृषि, वनोपज और मछली पालन में 2.9 प्रतिशत, विनिर्माण एवं व्यापार, होटल, परिवहन और संचार में 6.9 प्रतिशत और प्रसारण संबंधी सेवाओं में 6.9 प्रतिशत वृद्धि दर रही है। सबसे कम ग्रोथ रेट खनन में 1.3 प्रतिशत रही।

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उद्योग से निराशा

अप्रैल के दौरान आठ प्रमुख बुनियादी ढांचा उद्योगों में वृद्धि दर पिछले महीने के 4.9 प्रतिशत के मुकाबले 2.6 प्रतिशत पर आ गई। अप्रैल 2019 में संयुक्त सूचकांक अप्रैल 2019 से मार्च 2018-19 के दौरान 4.3 प्रतिशत की दर से 127.5 पर रहा। मार्च में देश का औद्योगिक उत्पादन 21 महीने के निचले स्तर को छूते हुए मंदी के उच्च स्तर पर पहुंच गया। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अनुसार कारखाना उत्पादन मार्च 2018 में सीएसडी डेटा के अनुसार 5.3 प्रतिशत बढ़ गया था।

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सरकार की सेहत ठीक

वर्ष 2018-19 में देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.4 प्रतिशत पर रहा, जो मोटे तौर पर अंतरिम बजट अनुमान के अनुरूप था। वित्तीय वर्ष के दौरान खर्च 24.1 लाख करोड़ रुपये के संशोधित लक्ष्य के मुकाबले 23.1 लाख करोड़ रुपये था।

क्या होता है जीडीपी

जीडीपी किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का सबसे जरूरी पैमाना है। जीडीपी किसी खास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल कीमत है। भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए। भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज़ यानी सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर होती है। वैसे, जीडीपी की वृद्धि दर मापने के लिए कृषि पैदावार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, रेलवे, सड़क परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा और सरकारी राजस्व व्यय के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है।

जीडीपी से कैसे हम पर फर्क पड़ता है

जीडीपी का आंकड़ा देश की आर्थिक तरक्की का संकेत देता है। आसान शब्दों में, अगर जीडीपी का आंकड़ा बढ़ा है तो आर्थिक विकास दर बढ़ी है और अगर ये पिछले तिमाही के मुकाबले कम है तो देश की माली हालत में गिरावट का रुख है। जीडीपी से सरकार की नीतियां तय होती हैं। जीडीपी ज्यादा है तो सरकार के पास टैक्स कलेक्शन भी ज्यादा आएगा। यानी सरकार खर्च भी ज्यादा कर सकेगी। इसका मतलब हुआ कि सरकार आपके लिए रोड, बिजली, पानी समेत कई जनउपयोगी चीजों में खर्च कर आपको ज्यादा सुविधाएं मुहैया कराएगी।

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